कानपुर इतिहास से वर्तमान तक सदैव साहित्य का केंद्र रहा है। पत्रकारिता में कानपुर में सदैव अपने को अग्रणी गिनाया है और साथ ही रोज़गार के अवसर प्रदान करने में कानपुर अग्रणी रहा है। कानपुर की विशुद्ध साहित्यिक धरती नें भारतीय साहित्य को कई अनमोल रत्न प्रदान किये हैं श्री वीरेंद्र आस्तिक जी उन्हीं रत्नों में से एक है । उनके गीतो की संप्रेषण सामर्थ्य, उनका अद्भुत शब्द विन्यास और उनकी भाषाई पकड़ अद्भुत है।
धरोहर सत्रहवीं शब्दांजलि यशशेष कवि निर्दोष हिसारी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनकी सुपुत्री कवयित्री अल्पना सुहासिनी जी साथ
धरोहर इक्कीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार बृज शुक्ल घायल जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनके साहित्यकार पुत्र डॉ प्रवीण शुक्ल जी के साथ ।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनते हैं श्री राजेन्द्र गौतम जी को। कल खगोल विज्ञान के अनुसार सूर्य ग्रहण है। अर्थात कल सूर्य पृथ्वी पर दिखाई नहीं देगा क्योंकि सूर्य और पृथ्वी के मध्य चंद्रमा आ जायेगा। परंतु यह आंशिक है। ग्रहण एक स्वाभाविक क्रिया है। भारतीय साहित्य भी ऐसे साहित्यिक ग्रहणों के कई काल से गुजरा है। तमाम असाहित्यिक राहुओं और केतुओं नें साहित्य के दैदीप्यमान सूर्य को निगलने का प्रयास किया है परंतु उस काल में कई साहित्यकार सूर्य की उन बचकर निकलने वाली रश्मियों की भाँति खड़े हो गए जो हमें यह आभास दिलाती रहीं हैं कि समय कठिन है पर उम्मीद नहीं छोड़ी जानी चाहिए। श्री राजेन्द्र जी उन उम्मीद की किरणों में से एक हैं। समय कैसा भी हो, गैर साहित्यिकता नें कितना भी मजबूती से पैर जमाये रहे हों आप सदैव साहित्यिक मार्ग पर अनवरत चलते रहे। आइये साहित्य मार्ग के दृढ़ अनुगामी से मिलें
धरोहर आठवीं शब्दांजलि कालजयी रचनाकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कविवर पं़ गोविन्द प्रसाद तिवारी जी की रचनाएं और स्मृतियाँ सुनिये उनके पुत्र श्री अभय तिवारी जी के साथ।
धरोहर उन्नीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार पं. प्रेमनाथ द्विवेदी “रामायणी”जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनके पुत्र डाॅ.कमलेश द्विवेदी के साथ ।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये आज सुनते हैं वरिष्ठ गीतकार श्री माहेश्वर तिवारी जी को। श्री माहेश्वर तिवारी जी हिंदी गीतकाव्य परम्परा के उन गीतकारों में से हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन गीतों को समर्पित किया। उनके गीतों को पढ़कर, उनकी शैली से प्रेरणा ले न जाने कितने कवि तैयार हुए। आप गीत को मंत्र की भाँति मारक बनाने में निष्णात हैं। आपके नवगीतों का प्रकृति चित्रण इतना सजीव है कि जैसे प्रकृति स्वयं देह धारण होकर वार्तालाप कर रही हो। मंचों पर गीत धारा को निष्कलुष, और जीवंत रखने में आपका योगदान अतुलनीय है।
शिवोहम_साहित्यिक_मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनें कानपुर नगर से वरिष्ठ गीतकार श्री हरीलाल मिलन जी को। कानपुर सदैव से साहित्यिक गतिविधियों में उर्वर रहा है। अन्य शहरों के इतर कानपुर की एक अपनी विशेषता है कि कानपुर में अनेक साहित्यिक संस्थाओं के माध्यम से होने वाली कवि गोष्ठियों में आपको ऐसे रचनाकार मिल जाएंगे जिन्हें मंच पर आप दीपक लेकर भी खोजें तो शायद नहीं मिलेंगे। अनेक ऐसे नाम आज भी कानपुर में हैं जिन्हें मंच का कोई लालच नहीं, कोई लिप्सा नहीं परंतु उनकी साहित्य साधना अति उत्कृष्ट है। वे बिना प्रशंसा की आस में सतत अपने सहित्यिक पथ पर गतिमान हैं। श्री हरीलाल मिलन जी कानपुर की साहित्यिक खेप की धरोहर हैं। वे निरंतर अपनी साहित्य साधना के जाज्वल्यमान सूर्य से शब्दों की उर्वरा धरती को जीवन रश्मि प्रदान करते रहे हैं। वे अनेक कालजयी रचनाओं के रचनाकार हैं। उनका राष्ट्रभाषा गान पूरे हिंदुस्तान नें एक स्वर में अनेक रेडियो स्टेशनों के माध्यम से गुनगुनाया है।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में कल सुनिये छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश से श्री रोहित रूसिया जी को। हम जिस भी कला की ओर देखते हैं, उसमें पारंगत होते हैं या निष्णात होने का प्रयास करते हैं उसे हमारा दैनिक अनुभव और अधिक बेहतर बनाता है। पेंटिंग में लगने वालों रंगों की कीमत तो शायद कुछ हजार में होती होगी परंतु उसका मूल्य लाखों में होने के लिए उसको बनाने वाले के अनुभव का गहन होना आवश्यक है। क्रेता उन रंगों का मूल्य नहीं चुकाता बल्कि उस असीम अमूल्य अनुभव को कुछ देने का प्रयास करता है जो बनाने वाले नें अपने दिन, घण्टे और मिनट उस कला के लिए खर्च करके अर्जित किये हैं। ऐसे ही अनुभवी और जीवन के सार को निचोडकर गीतों में पिरो देने वाले रचनाकार हैं श्री रोहित रूसिया जी। वे बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी हैं। एक श्रेष्ठ कवि होने के साथ साथ वे सक्रिय और प्रसिद्ध रंगकर्मी भी हैं। उनका अनेक क्षेत्रों का अनुभव उनके गीतों को और अधिक पैनापन भी देता है और भावपक्ष को और अधिक प्रभावी भी बनाता है ।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये आज सुनें गाज़ियाबाद निवासी श्री वेद शर्मा जी को। मनुष्य के विचार जब चिन्तन की भट्टी में पकते हैं तो सुदृढ़ होकर जीवन दर्शन बनता है। जिसका जीवन दर्शन जितना अधिक सुदृढ़ और व्यवहारिक होगा वह अपने जीवन में सफलता के सोपान उतनी शीघ्रता से चढ़ेगा। यही बात साहित्य पर भी लागू होती है जिसका जीवन दर्शन जितना विशद उसका साहित्य उतना अधिक उत्कृष्ट और लोकमंगलकारी होगा। श्री वेद शर्मा जी जीवन के अनुभवों को भट्टी का ताप महसूस कर सकने वाले गीतकार हैं। उनके गीतों में उनके जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, उनके आशावाद और उनकी सृजनशीलता का स्पष्ठ रूपांतरण हुआ है। उनके गीत उनके जीवन के खट्टे – मीठे अनुभवों के अनुवाद से हैं।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में कल सुनिये पूर्णिमा वर्मन जी को। हिंदी कविता सहित्य विधा है जिसका दरवाज़ा महिलाओं नें समय समय पर खटखटाया भी है और अधिकारपूर्वक उसमे दाखिल भी हुई हैं। कहीं माँ मीरा नें अपने मोहन को पुकारा तो उनके शब्द माधुर्य के आगे बड़े बड़े तपस्वियों का तप फीका पड़ गया। कहीं श्रद्धेया महादेवी की अपनी पीड़ा गीतों में मुखर होकर हमारे सामने आई तो पूरे संसार को रुला गयी। कहीं आदरेया सुभद्राकुमारी चौहान में अंग्रेजों को झांसी की रानी के स्वर में ललकारा तो पूरा हिंदुस्तान उनके स्वर में स्वर मिला उठा। श्रृंखला में अनगिन नाम हैं जो लिखें जाएं तो समय और स्याही दोनों का अभाव हो जाएगा। उसी श्रंखला में समकालीन अनेक नाम हैं जिन्होंने साहित्य जगत में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज भी कराई वरन स्वयं को नाम से लेकर हस्ताक्षर तक स्थापित भी किया। ऐसे ही एक नाम आदरणीया पूर्णिमा वर्मन जी से हम मिलेंगे कल शिवोहम साहित्यिक मंच के फेसबुक पेज पर जिनके गीत उनको हिंदी की कवयित्रियों में विशेष स्थान दिलाते हैं। उनके गीतों का स्त्री विमर्श, उनके गीतों की श्रंगारिकता, शब्द चयन, विषय वैविध्य सब कुछ अद्भुत है। वे श्रोताओं के साथ साथ पाठकों की भी प्रिय हैं।
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pragati sharma