धरोहर सत्रहवीं शब्दांजलि यशशेष कवि निर्दोष हिसारी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनकी सुपुत्री कवयित्री अल्पना सुहासिनी जी साथ
शिवोहम_साहित्यिक_मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनें कानपुर नगर से वरिष्ठ गीतकार श्री हरीलाल मिलन जी को। कानपुर सदैव से साहित्यिक गतिविधियों में उर्वर रहा है। अन्य शहरों के इतर कानपुर की एक अपनी विशेषता है कि कानपुर में अनेक साहित्यिक संस्थाओं के माध्यम से होने वाली कवि गोष्ठियों में आपको ऐसे रचनाकार मिल जाएंगे जिन्हें मंच पर आप दीपक लेकर भी खोजें तो शायद नहीं मिलेंगे। अनेक ऐसे नाम आज भी कानपुर में हैं जिन्हें मंच का कोई लालच नहीं, कोई लिप्सा नहीं परंतु उनकी साहित्य साधना अति उत्कृष्ट है। वे बिना प्रशंसा की आस में सतत अपने सहित्यिक पथ पर गतिमान हैं। श्री हरीलाल मिलन जी कानपुर की साहित्यिक खेप की धरोहर हैं। वे निरंतर अपनी साहित्य साधना के जाज्वल्यमान सूर्य से शब्दों की उर्वरा धरती को जीवन रश्मि प्रदान करते रहे हैं। वे अनेक कालजयी रचनाओं के रचनाकार हैं। उनका राष्ट्रभाषा गान पूरे हिंदुस्तान नें एक स्वर में अनेक रेडियो स्टेशनों के माध्यम से गुनगुनाया है।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये आज सुनते हैं वरिष्ठ गीतकार श्री माहेश्वर तिवारी जी को। श्री माहेश्वर तिवारी जी हिंदी गीतकाव्य परम्परा के उन गीतकारों में से हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन गीतों को समर्पित किया। उनके गीतों को पढ़कर, उनकी शैली से प्रेरणा ले न जाने कितने कवि तैयार हुए। आप गीत को मंत्र की भाँति मारक बनाने में निष्णात हैं। आपके नवगीतों का प्रकृति चित्रण इतना सजीव है कि जैसे प्रकृति स्वयं देह धारण होकर वार्तालाप कर रही हो। मंचों पर गीत धारा को निष्कलुष, और जीवंत रखने में आपका योगदान अतुलनीय है।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनते हैं वरिष्ठ गीतकार श्री यतीन्द्रनाथ राही जी को। श्री यतीन्द्रनाथ राही जी के गीत भारतीय समाज का काव्य चित्रण हैं। उनके गीत हमारे इर्द गिर्द ही घूमते से नज़र आते हैं। समाज की विद्रूपताओं का सजीव चित्रण कर समाधान तक पहुंचाना उनके गीतों की विशेषता है। आइये हिंदी काव्य परंपरा के आभामय हस्ताक्षर को सुनें
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनते हैं श्री राजेन्द्र गौतम जी को। कल खगोल विज्ञान के अनुसार सूर्य ग्रहण है। अर्थात कल सूर्य पृथ्वी पर दिखाई नहीं देगा क्योंकि सूर्य और पृथ्वी के मध्य चंद्रमा आ जायेगा। परंतु यह आंशिक है। ग्रहण एक स्वाभाविक क्रिया है। भारतीय साहित्य भी ऐसे साहित्यिक ग्रहणों के कई काल से गुजरा है। तमाम असाहित्यिक राहुओं और केतुओं नें साहित्य के दैदीप्यमान सूर्य को निगलने का प्रयास किया है परंतु उस काल में कई साहित्यकार सूर्य की उन बचकर निकलने वाली रश्मियों की भाँति खड़े हो गए जो हमें यह आभास दिलाती रहीं हैं कि समय कठिन है पर उम्मीद नहीं छोड़ी जानी चाहिए। श्री राजेन्द्र जी उन उम्मीद की किरणों में से एक हैं। समय कैसा भी हो, गैर साहित्यिकता नें कितना भी मजबूती से पैर जमाये रहे हों आप सदैव साहित्यिक मार्ग पर अनवरत चलते रहे। आइये साहित्य मार्ग के दृढ़ अनुगामी से मिलें
कानपुर इतिहास से वर्तमान तक सदैव साहित्य का केंद्र रहा है। पत्रकारिता में कानपुर में सदैव अपने को अग्रणी गिनाया है और साथ ही रोज़गार के अवसर प्रदान करने में कानपुर अग्रणी रहा है। कानपुर की विशुद्ध साहित्यिक धरती नें भारतीय साहित्य को कई अनमोल रत्न प्रदान किये हैं श्री वीरेंद्र आस्तिक जी उन्हीं रत्नों में से एक है । उनके गीतो की संप्रेषण सामर्थ्य, उनका अद्भुत शब्द विन्यास और उनकी भाषाई पकड़ अद्भुत है।
धरोहर इक्कीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार बृज शुक्ल घायल जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनके साहित्यकार पुत्र डॉ प्रवीण शुक्ल जी के साथ ।
धरोहर बाहरवीं शब्दांजलि यशशेष जनकवि विपिन मणि जी की रचनाएं और स्मृतियाँ सुनिये उनके पुत्र डॉ. उदय मणि जी के साथ
बैसवारा उत्तर प्रदेश की वह भूमि जिसने भारत के इतिहास में कलम और तलवार दोनों से अपना विशेष स्थान बनाया है। मंचीय कविता के लोग कहते हैं कि अगर बैसवारे के श्रोताओं ने आपको मन से सुन लिया तो आप पूरे हिंदुस्तान में कहीं भी बहुत अच्छे से सुने जाएंगे। महाप्राण निराला जी, सुमन जी, आचार्य नंद दुलारे बाजपेयी जी, सनेही जी जैसे अद्भुत साहित्यकारों को अपने अंक में बिठाने वाली इस वसुंधरा के एक अप्रतिम गीतकार से हम परिचय करेंगे #शिवोहम_साहित्यिक_मंच के #धरोहर की द्वितीय शब्दान्जलि में। स्मृतिशेष शिव बहादुर सिंह भदौरिया जी नवगीत के अति विशिष्ट रचनाकर हुए हैं। नवगीत दशक से लेकर नवगीत का कोई भी वृहद समवेत संकलन आपकी उपस्थिति के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। उनके गीत ग्राम्यांचल की मिट्टी से लेकर महानगर की अधुनिकता तक को अपने मे समेट कर चलते हैं।
धरोहर सोलहवीं शब्दांजलि यशशेष गीतकार कीर्तिशेष अमन चांदपुरी जी की रचनाएं और स्मृतियाँ सुनिये उनके मित्र श्री राहुल शिवाय जी के साथ।
धरोहर बीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार श्री संतोष कुमार वर्मा “फ़न” जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनकी कवयित्री पुत्री सपना सोनी जी के साथ ।
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