बैसवारा उत्तर प्रदेश की वह भूमि जिसने भारत के इतिहास में कलम और तलवार दोनों से अपना विशेष स्थान बनाया है। मंचीय कविता के लोग कहते हैं कि अगर बैसवारे के श्रोताओं ने आपको मन से सुन लिया तो आप पूरे हिंदुस्तान में कहीं भी बहुत अच्छे से सुने जाएंगे। महाप्राण निराला जी, सुमन जी, आचार्य नंद दुलारे बाजपेयी जी, सनेही जी जैसे अद्भुत साहित्यकारों को अपने अंक में बिठाने वाली इस वसुंधरा के एक अप्रतिम गीतकार से हम परिचय करेंगे #शिवोहम_साहित्यिक_मंच के #धरोहर की द्वितीय शब्दान्जलि में। स्मृतिशेष शिव बहादुर सिंह भदौरिया जी नवगीत के अति विशिष्ट रचनाकर हुए हैं। नवगीत दशक से लेकर नवगीत का कोई भी वृहद समवेत संकलन आपकी उपस्थिति के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। उनके गीत ग्राम्यांचल की मिट्टी से लेकर महानगर की अधुनिकता तक को अपने मे समेट कर चलते हैं।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनते हैं श्री राजेश राज जी को। शिवोहम साहित्यिक मंच अपनी गीत यात्रा में अनेक लब्ध प्रतिष्ठित गीतकारों को आपके मध्य ला चुका है और आप सबके सहयोग और उत्साहवर्धन से यह यात्रा अनवरत जारी है। इस तरह के आयजनों का उद्देश्य मात्र मनोरंजन नहीं है बल्कि यह है कि जो आक्षेप हिंदी मंच पर लगते रहे कि कविता समाप्त हो गयी या मृतप्राय है उन सबका पटाक्षेप करना है क्योंकि हिंदी के पास आज भी वो तमाम साधक है जो सतत अपनी साहित्य साधना में लगे हुए हैं और माँ हिंदी के कोष में वृद्धि कर रहे हैं। श्री राजेश राज जी भी उन रचनाकारों में से हैं जिन्होंने सदैव ही साहित्य में सृजन करते समय उत्कृष्टता को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपने मानक स्वयं निर्धारित किए और साहित्यिक जगत की नई पीढ़ी के लिए अनुकरणीय रास्ता भी बनाया। आइये उनके गीतों की रचनात्मकता, उनके कला कौशल और उनकी विलक्षण भाव प्रवणता को सुनें
धरोहर बाहरवीं शब्दांजलि यशशेष जनकवि विपिन मणि जी की रचनाएं और स्मृतियाँ सुनिये उनके पुत्र डॉ. उदय मणि जी के साथ
धरोहर बीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार श्री संतोष कुमार वर्मा “फ़न” जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनकी कवयित्री पुत्री सपना सोनी जी के साथ ।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये आज सुनें गाज़ियाबाद निवासी श्री वेद शर्मा जी को। मनुष्य के विचार जब चिन्तन की भट्टी में पकते हैं तो सुदृढ़ होकर जीवन दर्शन बनता है। जिसका जीवन दर्शन जितना अधिक सुदृढ़ और व्यवहारिक होगा वह अपने जीवन में सफलता के सोपान उतनी शीघ्रता से चढ़ेगा। यही बात साहित्य पर भी लागू होती है जिसका जीवन दर्शन जितना विशद उसका साहित्य उतना अधिक उत्कृष्ट और लोकमंगलकारी होगा। श्री वेद शर्मा जी जीवन के अनुभवों को भट्टी का ताप महसूस कर सकने वाले गीतकार हैं। उनके गीतों में उनके जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, उनके आशावाद और उनकी सृजनशीलता का स्पष्ठ रूपांतरण हुआ है। उनके गीत उनके जीवन के खट्टे – मीठे अनुभवों के अनुवाद से हैं।
धरोहर सोलहवीं शब्दांजलि यशशेष गीतकार कीर्तिशेष अमन चांदपुरी जी की रचनाएं और स्मृतियाँ सुनिये उनके मित्र श्री राहुल शिवाय जी के साथ।
धरोहर बीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार श्री संतोष कुमार वर्मा “फ़न” जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनकी कवयित्री पुत्री सपना सोनी जी के साथ ।
धरोहर सोलहवीं शब्दांजलि यशशेष गीतकार कीर्तिशेष अमन चांदपुरी जी की रचनाएं और स्मृतियाँ सुनिये उनके मित्र श्री राहुल शिवाय जी के साथ।
शिवोहम सहित्यिक मंच धरोहर की प्रथम शब्दांजलि कालजयी रचनाकार डॉ उर्मिलेश शंखधर जी की कविताएं और स्मृतियाँ सुनिये उनकी पुत्री श्रीमती सोनरूपा विशाल जी के साथ।
धरोहर श्रृंखला बाइसवीं और अन्तिम शब्दांजलि कीर्तिशेष गीतकार आत्म प्रकाश शुक्ल जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार श्रद्धेय डॉ. शिवओम अम्बर जी के साथ
धरोहर इक्कीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार बृज शुक्ल घायल जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनके साहित्यकार पुत्र डॉ प्रवीण शुक्ल जी के साथ ।
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