“सूरत को नहीं सीरत को तवज्जो देना सीखें तभी शायद आप असली खूबसूरती का मतलब समझ पाएंगे।
मैं कैसी लगती हूँ – Arvind saxena – Priya bhatia
“मुझको मालूम नहीं… हुस़्न की तारीफ, मेरी नज़रों में हसीन ‘वो’ है, जो तुम जैसा हो..”
भून के अपने दिल को – Arvind saxena – Priya bhatia
तेरे रोने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ऐ दिल.. जिनके चाहने वाले ज्यादा हो.. वो अक्सर बे दर्द हुआ करते हैं….
तुम हो या चाँद – Arvind saxena – Priya bhatia
कल मिरे मेहबूब क्या आ गए छत पर, जला चाँद तमाम रात चमक चमक कर।
तुम मुझे कभी भुला न पाओगे – Arvind saxena – Priya bhatia
हमरी किस्मत में तो सिर्फ यादें हैं तुम्हारी, जिसके नसीब में तू है उसे ज़िन्दगी मुबारक।
“हालात और वक़्त के साथ सबको बदलना पड़ता है। इंसान के बदलाव के बारे में दर्शाती यह कविता जरूर सुनें।
भून के अपने दिल को – Arvind saxena – Priya bhatia
तेरे रोने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ऐ दिल.. जिनके चाहने वाले ज्यादा हो.. वो अक्सर बे दर्द हुआ करते हैं….
कितना सुकून देता है प्यार का एहसाह, और अपने प्यार के पास रहने से कितनी मिलती है ताकत, इस कविता में बखूबी बताया गया है।
सुबल और सुशील नामक पिता और पुत्र की ऐसी कहानी जिसमे इच्छा पूरी करने वाली देवी उन्हें अदला बदली का वरदान देकर उनकी इच्छा पूरी करती हैं लेकिन इस वरदान से तंग आकर वे पुनः देवी से उन्हें पहले जैसा कर देने की प्रार्थना करते हैं।
सत्येंद्र नाथ बोस एक महान क्रांतिकारी थे। ये अरविंद घोष के प्रभाव से क्रांतिकारियों के संपर्क में आए। स्वदेशी का प्रचार करने के उद्देश्य से “छात्र भंडार” नामक संस्था बनाई जिसमें युवकों को क्रांतिकारी दल से जोड़ने का कार्य किया। 21 नवंबर 1908 को सत्येंद्र नाथ देश के लिए शहीद हुए।
Reviews for: Mera phool (मेरा फूल)