यह कहानी शिक्षा व्यवस्था पर एक व्यंग्यात्मक कटाक्ष है जिससे हमे यह बोध होता है कि आखिर किस प्रकार उच्च अधिकारियों द्वारा शिक्षा के नाम पर केवल अपने स्वार्थ ही सिद्ध किए जाते हैं।
अतृप्त आत्माओं से भरे एक महल की कथा जिसका एक एक पत्थर जिंदा व्यक्तियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
“Chitrokor” is a story of a solvent housewife, a mom whose life is dedicated in pursuing creative art as part of her hobby. She got her husband in support of her passion. But after her husband’s death the relative whose house she was sheltered, used to believe in materialism. And he used to preach her son that money making is the only way that’s meaningful in life. First the lady tried to live with her passion even exposing her hobby to her child hiding from the shelter giver. But when he came to know and resisted vehemently, she didn’t even hesitate to leave the house with her child for the sake of her passion on art.
The story shows how after giving a shelter to a distressed lady a distinguished man in that village was cornered and became the victim of politics which bound him to lose the legal case which led him to lose his property.
अतृप्त आत्माओं से भरे एक महल की कथा जिसका एक एक पत्थर जिंदा व्यक्तियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
उर्वशी एक आधुनिक लड़की है जो होशियार होने के साथ ही जीवन में कुछ कर दिखाने की चाहत रखती है। प्रेम विवाह कर पति से उपेक्षित होने के बाद भी उसने हिम्मत न हारते हुए अपनी जिंदगी में कुछ कर दिखाने की चाहत को पूरा करने का प्रयास किया जिसमें उसकी खूबसूरती ही उसके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई। उसकी जिंदगी एक कटी पतंग की तरह झूलने लगी।
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कहानी उस ओर संकेत करती है कि समाज में पुरुष सिर्फ अपने पुरुषत्व को दिखाने की चाहत में स्त्रियों पर अत्याचार करने में अपना गौरव महसूस करते हैं |कहानी का मुख्य पात्र कन्हैयालाल की जब नई-नई शादी होती है तो आपके दोस्तों के समझाने पर अपनी नई नवेली दुल्हन लाजो पर अत्याचार शुरू कर देता है |करवा चौथ वाले दिन भी लाजो के प्रति रूखे व्यवहार से लाजो खिन्न हो जाती हो जाती है |कहानी में आगे क्या होता है? क्या लाजो कन्हैयालाल को छोड़ देती है? कन्हैयालाल को अपनी भूल का अहसास होता है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं यशपाल के द्वारा लिखी गई कहानी करवा का व्रत, नयनी दीक्षित की आवाज में…
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एक आम लड़की की तरह सुमिता ने भी शादी के सुनहरे सपने देखे थे। सोम के रुप में जीवनसाथी को पाकर सुमिता जैसे खुशी से पागल सी हो गई थी। लेकिन उसका यह भ्रम बहुत जल्दी टूट गया। शादी के तीन दिन बाद ही उसे सोम की बीमारी का पता चला । उसे लगा कि जैसे वह ठगी गई है। तब, उसने एक अहम फैसला लिया।
आपने आज तक ऐसे लोगो के बारे में तो सुना ही होगा जो की कही से पैसे उठाते हैं और गरीबो में बांट देते हैं , आप उनको चाहे तो शैतान समझे या फिर देवता ये आपके ऊपर है , कई बार इंसान को ऐसी चीज़ों से लगाव हो जाता है , जो उसके लिए बहुत मायने रखने लगती हैं , और इंसान कई बार उनको खुद से ज़्यादा समझने लगता है , ये कहानी भी एक ऐसे ही इंसान की है , जो कानून की नज़र में गलत होता है उसे सज़ा मिलती है , पर आप खुद ये समझे की क्या वो सच में ग़लत है ?
जब मैंने पहली बार उन्हें देखा तो वह रहमान भाई की खिड़की में बैठी लंबी-लंबी गालियाँ और कोसने दे रही थी । उस दिन पहली दफा मुझे मालूम हुआ कि हमारी इकलौती सगी फूपी, बादशाही खानम है। हर ईद- बकरीद को मेरे अब्बा मियां बेटों को लेकर सीधे फूपी अम्मा के यहाँ कोसने और गालियाँ सुनने जाया करते। मरते दम तक भाई- बहन का मिलन न हुआ । जब अब्बा मियां पर फालिश का चौथा हमला हुआ और बिल्कुल ही वक्त आ गया तो हलहलाती, छाती कूटती, सफेद पहाड़ की तरह भूचाल लाती हुई बादशाही खानम उसी ड्यूटी पर उतरी जहाँ अब तक उन्होंने कदम नहीं रखा था।
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