अक्सर हमारा वक्त बीती -बातों को याद करने में चला जाता है| आप कुछ ऐसा ही पल्लवी के द्वारा लिखी गई कविताyad aa gya mujko gujra zamana(याद आ गया मुझको गुज़रा ज़माना) को सुनकर निश्चित तौर पर सब अपने बचपन में जरूर लौट जाएंगे, उन पलों को याद करेंगे, जो हमारे- आपके जीवन का एक खूबसूरत हिस्सा है |
बड़े बुजुर्ग घर की शान होते हैं उनकी बातों में एक तजुर्बा होता है उनके सानिध्य में सब कुछ कितना सरल हो जाता है बच्चों के लिए उनकी दादी तो पूरा स्नेह का खजाना होती है इसी रिश्ते के मधुर संबंधों काअवलोकन कराती हुई कविता है दादी पल्लवी की आवाज में
सकारात्मक सोच से जटिल से जटिल समस्याओं का निदान संभव है कुछ ऐसी ही विचारधारा को प्रेरित करती हुई पल्लवी के द्वारा लिखी एक कविता आशना
अगर अपने प्रेमी से मिलन संसार की सबसे सुखद अनुभूति है उसी प्रकार अपने प्रेमी से हमेशा का विछोह सबसे दुखद अनुभूति होती है। राधा-कृष्ण के विछोह के प्रसंग से संबंधित ये पंक्तियां उसी पीड़ा का अनुभव कराती हैं। *कृष्ण- राधा के विछोह से संबंधित कोई चित्र
साक्षर होना जीवन में सबसे बड़ा वरदान होता है अतः कविता के माध्यम से यह संदेश प्रेरित किया गया है पढ़ना लिखना हमारे जीवन के लिए कितना आवश्यक है कविता खूब पढ़ते जाना पल्लवी जी की मधुर आवाज
बड़े बुजुर्ग घर की शान होते हैं उनकी बातों में एक तजुर्बा होता है उनके सानिध्य में सब कुछ कितना सरल हो जाता है बच्चों के लिए उनकी दादी तो पूरा स्नेह का खजाना होती है इसी रिश्ते के मधुर संबंधों काअवलोकन कराती हुई कविता है दादी पल्लवी की आवाज में
बजट ट्रिप के लिहाज से देश की पांच सबसे खूबसूरत जगहें – संजय शेफर्ड – पल्लवी
कहीं घूमने जाने का मन है लेकिन आपका बजट allow नहीं कर रहा| तो घुमंतू आपकी यह समस्या भी दूर कर रहा है, घुमंतू को सुनने का यही तो फायदा है ऐसी जगह के बारे में जानिए ,जो कम बजट में टूरिस्ट फ्रेंडली भी हो ।हिमाचल की धर्मशाला एक बेहतरीन विकल्प है वह कैसे? सुनिए पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
Maa Chandraghanta
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा होती है।चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय है।चेहरा शांत एवं सौम्य है और मुख पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही होती है। माता के सिर पर अर्ध चंद्रमा मंदिर के घंटे के आकार में सुशोभित हो रहा जिसके कारण देवी का नाम चन्द्रघंटा हो गया है।अपने इस रूप से माता देवगण, संतों एवं भक्त जन के मन को संतोष एवं प्रसन्न प्रदान करती हैं। मां चन्द्रघंटा अपने प्रिय वाहन सिंह पर आरूढ़ होकर अपने दस हाथों में खड्ग, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र,धनुष, भरे हुए तरकश लिए मंद मंद मुस्कुरा रही होती हैं। इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं। इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए। इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। इसलिए हमें चाहिए कि मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विहित विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करना चाहिए। इससे सारे कष्टों से मुक्त होकर सहज ही परम पद के अधिकारी बन सकते हैं। यह देवी कल्याणकारी है।मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जन्म-जन्म का डर समाप्त हो जाता है और जातक निर्भय बन जाता हैं।
Chants credit- Jyoti upreti sati
समापन – भाग -5
Dr. Dharmveer भर्ती जी द्वारा रचित कृति कनुप्रिया का ये समापन है
कनु की प्रिया जिसके हृदय में प्रतिक्षण कनु ही व्याप्त रहता है, ऐसी कनुप्रिया सम्पूर्ण रचना में छाई हुई है. राधा को कभी कनु अपना अन्तरंग सखा लगता है तो कभी रक्षक, कभी लीला बन्धु कभी आराध्य और कभी लक्ष्य.
कनुप्रिया के समापन में राधा कृष्ण की पुकार की प्रतीक्षा में जन्मांतरों की अनंत पगडंडी के कठिनतम मोड़ पर अडिग खड़ी है!
जन्मांतरों से, जन्मांतरों तक…
चलिए गाथा पर सुनते हैं कनुप्रिया का समापन, पल्लवी की आवाज़ में
सुनहरी चिड़िया | Sunehri Chidiya | Hindi Poem | हिंदी कविता | Motivational Poems by Anupam Dhyani
Let India shine in its original Glory! Jai Hindi! The Golden Bird!
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