अमृता बहुर्मुखी प्रतिभा की धनी रहीं। उनके अंदर जितना अनुराग रहा,उतना ही दर्द छुपा रहा। बंटवारे का दर्द उन्हें बहुत तकलीफ देता था। जीवन के अंतिम पड़ाव पर थीं अमृता जब पाकिस्तान से तौसीफ़ उनसे मिलने आईं। मिलने की खुशी से अधिक, उनके उस वक़्त लिखे गद्य काव्य में बचपन की यादों का दर्द, अपने साथियों से, बंटवारे के कारण या मृत्यु के कारण बिछड़ने का दर्द, समाज के बदलते स्वरूप का दर्द बड़ी सरलता से व्यक्त हुआ और दिल की गहराइयों तक उतर गया।
सुनते हैं दर्द शीर्षक के अंतर्गत, अमृता के इस दर्द को उकेरती मैं तुम्हें फिर मिलूँगी काव्य संग्रह की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पे,पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
मैं तुम्हे फिर मिलूँगी काव्य संग्रह की कुछ कविताओं को शीर्षक दिया है मुलाक़ात।
अमृता बीमार थीं, बहुत बीमार। अपने नग्मों, अपनी कविताओं के माध्यम से वो कभी अपनी माँ को याद करतीं, कभी सभी बंधनों के परे जा, कृष्ण से, गणेश से, साईं से मिलतीं, कभी बस अपने प्रेमी से मुलाक़ात के लिए किसी भी सीमा को पार करने की बात करतीं।
सुनते हैं शीर्षक मुलाक़ात के अंतर्गत समाहित मैं तुम्हे फिर मिलूँगी की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पे, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
अमृता अपने सपने लिखतीं थीं अपनी डायरी में।
उनींदे सपने, गहरी नींद के सपने, जागती आंखों के सपने…
ये कुछ सपने जो उन्होंने 2001 से ले कर 2003 के बीच देखे और लिखे। कुछ सपनों पर कविता या नज़्म लिखी, कुछ को बस उड़ने के लिए छोड़ दिया।
उनकी आत्मा की चेतना तक पहुंचाते हैं ये सपने
सुनते हैं, मैं तुम्हें फिर मिलूँगी काव्य संग्रह में दर्ज़ अमृता के कुछ सपने, गाथा ऐप्प पे, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी इस कविता से शुरुवात होती है इस शीर्षक प्रेम की कविताओं की।
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी आखिरी कविता थी जो अमृता ने लिखी थी। प्रेम से लबरेज़ ये कविता, आंखे नम कर देती है। बेइन्तहां प्रेम में डूबी अमृता, बेहद बीमार अमृता पूरे प्रेम और समर्पण से अपने आप को तैयार कर लेती हैं अपनी आने वाली अन्त यात्रा के लिए।
प्रेम शीर्षक के अंतर्गत जी कविताएँ हैं, उनमें न सिर्फ उनका अपने साथी के लिए प्रेम उमड़ता है, बल्कि, उंस ईश्वर के लिए भी प्रदर्शित होता है जिसके आगे उन्होंने समर्पण कर दिया है।
सुनते हैं शीर्षक प्रेम के अंतर्गत, आत्मा की परमात्मा के लिए प्रेम में डूबी मैं तुम्हें फिर मिलूँगी की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पर, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
मैं तुम्हे फिर मिलूँगी काव्य संग्रह की कुछ कविताओं को शीर्षक दिया है मुलाक़ात।
अमृता बीमार थीं, बहुत बीमार। अपने नग्मों, अपनी कविताओं के माध्यम से वो कभी अपनी माँ को याद करतीं, कभी सभी बंधनों के परे जा, कृष्ण से, गणेश से, साईं से मिलतीं, कभी बस अपने प्रेमी से मुलाक़ात के लिए किसी भी सीमा को पार करने की बात करतीं।
सुनते हैं शीर्षक मुलाक़ात के अंतर्गत समाहित मैं तुम्हे फिर मिलूँगी की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पे, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
वह एक दिन हीरा मंडी का रास्ता चौबारा छोड़ कर शाहर के सबसे बड़े होटल फ्लैटी में आ गयी थी। वही शहर था, पर सारा शहर जैसे रातों रात उसका नाम भूल गया हो, सबके मुंह से सुनायी देता था -शाह की कंजरी। गजब का गाती थी। कोई गाने वाली उसकी तरह मिर्जे की सद नहीं लगा सकती थी। इसलिये चाहे लोग उसका नाम भूल गये थे पर उसकी आवाज नहीं भूल सके| शाह की कंजरी के नाम से जाने वाली नीलम महफिलों में गाने बजाने एक युवती है शाहनी जी के बड़े बेटे की शादी में उसे बुलाया जाता है तब शाहनी नीलम के साथ किस प्रकार का बर्ताव करती है अमृता प्रीतम के द्वारा लिखी गई कहानी शाह की कंजरी में …
गुलियाना का एक ख़त ….जिसके नाम का अर्थ है फूलों सी औरत ……पर वह लोहे के पैरों से लगातार दो साल चल कर युगोस्लाविया से चल कर अमृता तक आ पहुंची | गुलियाना की कहानी इस दुनिया के किसी भी देश की नारी की कहानी है। ये कहानी अमृता प्रीतम ने दशकों पहले लिखी थी लेकिन आज भी ख़त के वो सवाल वहीं खड़े हैं
नज़्म क्या है? यह प्रश्न हमेशा गूंजता रहता है किंतु अमृता प्रीतम की इस नज़्म को पढ़कर इसका जवाब मिल गया है| क्या है इसका जवाब ?इसे जानने के लिए के लिए सुनते हैं अनुर्वी की आवाज में अमृता प्रीतम की यह नज़्म
समापन – भाग -5
Dr. Dharmveer भर्ती जी द्वारा रचित कृति कनुप्रिया का ये समापन है
कनु की प्रिया जिसके हृदय में प्रतिक्षण कनु ही व्याप्त रहता है, ऐसी कनुप्रिया सम्पूर्ण रचना में छाई हुई है. राधा को कभी कनु अपना अन्तरंग सखा लगता है तो कभी रक्षक, कभी लीला बन्धु कभी आराध्य और कभी लक्ष्य.
कनुप्रिया के समापन में राधा कृष्ण की पुकार की प्रतीक्षा में जन्मांतरों की अनंत पगडंडी के कठिनतम मोड़ पर अडिग खड़ी है!
जन्मांतरों से, जन्मांतरों तक…
चलिए गाथा पर सुनते हैं कनुप्रिया का समापन, पल्लवी की आवाज़ में
samaj ki buraiyon aur kaise ladkiyaan purush pradhaan samaj mein aaj ke samay mein bhi apni pehchaan dhoondh rahee hain… yeh ek sochne yogya baat hai… cover page: ek ladki, old man, table pe rakhha chai ka cup
अक्सर हमारा वक्त बीती -बातों को याद करने में चला जाता है| आप कुछ ऐसा ही पल्लवी के द्वारा लिखी गई कविताyad aa gya mujko gujra zamana(याद आ गया मुझको गुज़रा ज़माना) को सुनकर निश्चित तौर पर सब अपने बचपन में जरूर लौट जाएंगे, उन पलों को याद करेंगे, जो हमारे- आपके जीवन का एक खूबसूरत हिस्सा है |
कहानी विदेश में रह रहे एक भारतीय परिवार की है ।जहां उन्हीं के बेटे का शादी का कार्ड आज उनके पास आया है ।कार्ड में मां -बाप का नाम भी नहीं है विदेशी संस्कृति से प्रभावित बेटे में भारतीय संस्कृति और संस्कार की छाप कहीं भी नज़र नहीं आ रही है ।ऐसा क्यों हुआ? क्या यह पीढ़ी का अंतर है या फिर देशांतर लेकिन आज जिस बात के लिए मां-बाप अपने बेटे के लिए अफ़सोस कर रहे हैं, क्या वह स्वयं इस बात के लिए जिम्मेदार हैं ?इस प्रश्न को समेटे हुए कहानी किस मोड़ पर रूकती है सुनते हैं सुदर्शन प्रियदर्शिनी की लिखी कहानी देशांतर, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में..
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला शहर के बाहरी क्षेत्र में बसा मैकलॉडगंज पर्यटकों में काफी फेमस है। यहां तिब्बती मूल के काफी लोग रहते हैं, इस वजह से इसे लिटिल लहासा या धासा के नाम से भी जाना जाता है।गाथा के घुमंतू के साथ सुंदर आइए चलते हैं पल्लवी के साथ
हिंदी साहित्य की विधा मुक्तक जिसमें कम शब्दों में बहुत बड़ी बात बयान की जाती हैहिंदी साहित्य की विधा मुक्तक जिसमें कम शब्दों में बहुत बड़ी बात बयान की जाती है
मंजरी परिणय – भाग -2
Dr. Dharmveer भर्ती जी द्वारा रचित कृति कनुप्रिया का ये द्वितीय खंड है
मंजरी परिणय में तीन कविताएँ है।
इन कविताओं में, राधा के प्रश्नों का, कनु की व्याकुलता का, निजता के द्वंद का; मन को द्रवित करने वाला बेहद सुंदर चित्रण है।
राधा, कृष्ण के चले जाने के पश्चात, विव्हल हो कर स्मरण करती है कि किस प्रकार आम्र बौर के नीचे खड़े हो, कनु उसकी प्रतीक्षा करते थे, परंतु लोक लाज से बंधी राधा अपने कनु के पास उस क्षण नही पहुंच पाती थी।
कनु का आम्र बौर की मंजरी से राधा संग परिणय कर लेना, राधा का बेचैन हो जाना और अपने कनु के समीप न आ पाने की व्यथा बताना। और आम्र बौर का ठीक ठीक अर्थ न समझ पाने में अपनी असमर्थता दिखाना… फिर कनु से मासूमियत से पूछ लेना… की तुम मेरे कौन हो ?
मंजरी परिणय की कविताएँ प्रेम में पड़ी राधा की आकुलता का सुंदर चित्रण है
चलिए गाथा पर सुनते हैं कनुप्रिया का द्वितीय खंड- मंजरी परिणय, पल्लवी की आवाज़ में
सीने में उठने वाला वो दर्द जब अलग हो जाए हमसे वो इंसान जिससे हम बेहद मोहब्बत करते हैं। उसी दर्द को दर्शाती है यह कविता।
30 seconds of positive energy, positive poetry.
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