बरसात ना होने से सारी फसल सूख गई। जाधो राय के फाके के दिन आ गए। वह पत्नी और इकलौते बेटे साधो के साथ मजदूरी करने लगा। साधे अच्छे खाने के लालच में पादरी के साथ चला गया। बेबस माँ-बाप उसे ढूँढते रहे ।अच्छे दिन आए लेकिन साधो नहीं आया। 14 साल बाद साधो वापस आया , लेकिन धर्म- परिवर्तन के उपरांत। गाँव वालों ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया। किंतु माँ की ममता इंकार नहीं कर सकी। बहुत रोकने की कोशिश की, लेकिन साधो वापस चला गया। मां-बाप विवश थे।
दीनानाथ को एक कार्यालय में जब₹50 की नौकरी मिल जाती है, तो उसकी ईश्वर के प्रति श्रद्धा और बढ़ जाती है| कहानी के एक प्रसंग में दीनानाथ द्वारा गलत कार्य हो जाता है जिसके कारण ईश्वर से दंड मिलने की शंका से दीनानाथ के मन में भय व्याप्त हो जाता है | क्या दीनानाथ का भय वास्तव में सत्य हो जाता है ?क्या दीनानाथ उसी प्रकार ईश्वर में आस्था रख पाता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी बासी भात में खुदा का साझा ,सुमन वैद्य जी की आवाज में….
गौरा शूद्र जाति की गरीब मां की बेटी है | जिसकी शादी मंगरू नामक एक परदेसी से हो जाती है, लेकिन अचानक मंगरू गौरा को छोड़कर बिना कुछ बताए वहां से चला जाता है, कई साल बाद अचानक एक बूढ़ा व्यक्ति गौरा के पास आता है और यह कहकर कि मंगरू ने उसे बुलाया है अपने साथ कोलकाता ले जाता है किंतु बाद में जब गौरा कोलकाता पहुंचती है तो वह बहुत अचंभित हो जाती है आखिर ऐसा क्या हुआ गौरा के साथ?क्या मंगरू ने वापस गौरा को अपने पास बुलाया था ? बूढ़ा व्यक्ति कौन था ?पूरी कहानी को जाने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी शुद्र सुमन वैद्य जी की आवाज में..
शराब एक जहर है जो इंसान को हैवान बना देती है। गांधी जी ने समस्त भारतवासियों से अपील की थी कि जो लोग शराब पीते हैं , वह शराब पीना छोड़ दें ।कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता, जय राम और मिसेज़ सक्सेना, दोनों ही इस कार्य को करने के इच्छुक होते हैं। बारी-बारी से दोनों को यह कार्य सौंपा जाता है। कौन सा फल होता है और कौन विफल ,इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
कुंवर अमरनाथ के बुंदेलखंड जाने की बात सुनकर मनोरमा का मन अनिष्ट शंका से घिर गया । वह कुंवर के साथ चलने की हठ्ठ करने लगी ।कुंवर ने वचन दिया कि वह प्रतिदिन एक पत्र लिखेंगे और जल्द लौटेंगे ।किंतु कुछ समय पश्चात पत्र आने बंद हो गए । मनोरमा को बुरे बुरे ख्याल आने लगे वह स्वयं कुंवर के पास जाती है लेकिन रेल -दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो जाती है और उसकी कुछ अनिष्ट होने की शंका सत्य साबित होती है।
चोखे लाल शर्मा एक रसिक किस्म के संपादक हैं | स्त्रियों के कैसे भी लेख उनकी भूरी- भूरी प्रशंसा चोखे लाल शर्मा जी के द्वारा जरूर होती है |एक बार उग्र प्रेम को झलकाती एक अश्लील कविता प्राप्त हुई | इस कविता के बाद चोखे लाल शर्मा जी का क्या हुआ? क्या अब भी उनका रसिक मिजाज बाकी है ?सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी रसिक संपादक भूपेश पांडे की आवाज में
“शोभना भरतिया, एचटी मीडिया की चेयरपर्सन और भारत की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक, जो देश के सबसे बड़े मीडिया साम्राज्यों में से एक का नेतृत्व करती हैं। पत्रकारिता की दुनिया में अपने बेहतरीन दृष्टिकोण और नेतृत्व से उन्होंने नई मिसालें कायम की हैं। राजसभा सदस्य और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी समझ ने उन्हें एक आदर्श लीडर के रूप में स्थापित किया है। शोभना भरतिया की कहानी एक प्रेरणा है, जो बताती है कि कैसे मजबूत नेतृत्व और साहसिक फैसले किसी को ऊँचाइयों पर पहुंचा सकते हैं।
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अच्छा वक्त कब बदल जाए कोई नहीं बता सकता। दुल्हन बनने के सपने देखने वाली आँखों में कब आँसू भर जाए ? कब सपने चूर-चूर हो जाए ? कौन बता सकता है ? वक्त के आगे हम सब बेबस हैं ।वक्त की हर शह गुलाम है ।
“किरण मजूमदार शॉ ने साबित कर दिया है कि सच्ची लगन, कठिन मेहनत, और समझदारी से कोई भी सफलता के शिखर को छू सकता है। बॉयोकॉन की फाउंडर और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी होने के बावजूद, उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बायोकॉन की शुरुआत एक छोटे से गैराज से की और आज इसे वैश्विक पहचान दिलाई। भारत की सबसे ताकतवर महिलाओं में शामिल किरण की कहानी उनकी अटूट इच्छाशक्ति और अद्वितीय प्रबंधन कुशलता की मिसाल है।
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भरे पूरे परिवार में जन्मी शम्मन को उसके मामूली रंग रूप की वजह से कोई तवज्जो ना दी जाती। जिंदगी में दिल को चकनाचूर कर देने वाले कई हादसे भी पेश आए। एक स्कॉटिश फौजी से की गई बेमेल शादी भी न चली। वह शम्मन को छोड़कर विदेश चला गया। लेकिन कुछ ऐसा दे गया कि वह उसे भुला ना पाई।
सौंदर्य की देवी और प्रसिद्ध रंजना को पहली बार किसी ने अनदेखा किया था। वह बर्दाश्त नहीं कर पाई ,लेकिन इसी अदा ने उसे दिलीप की ओर आकर्षित किया । वह एक- दूसरे को बेपनाह चाहने लगे और सुनहरे भविष्य के सपने संजोने लगे । दिलीप काम के सिलसिले में 15 दिन के लिए देहरादून गया और फिर उसका कोई खत ना आया। रंजना परेशान होकर उसके घर गई तो उसके ड्रावर में रेखा नाम की लड़की के प्रेम पत्र हाथ लगे। वह सन्न रह गई। फिर एक पत्र मिला जो दिलीप के पिताजी का था। जिसमें उन्होंने दिलीप की पत्नी और एक बच्ची का जिक्र किया था। यह खत देखकर रंजना को गहरा धक्का लगा। और वह फूट-फूट कर रोने लगी।
रीना ने अभी तक शादी नहीं की है क्योंकि उसे अपने हिसाब से उपयुक्त जीवनसाथी नहीं मिल रहा है इसी बात को छेड़ते हुए उसकी मित्र अनुजा उसे कविता मैडम का उदाहरण देती है कविता मैडम ने काफी उम्र बढ़ने पर शादी की है कविता मैडम की जिंदगी में क्या-क्या उतार-चढ़ाव आए और उन्होंने इतनी बड़ी उम्र में विवाह क्यों किया पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मालती जोशी की लिखी कहानी हादसे और हौसले शिवानी खरे की आवाज में .
कसक – Alka saini (अल्का सैनी ) – Shivani Anand
शादी के बाद गरिमा ने पूरी कोशिश की अपने को ससुराल के वातावरण में ढाल लेने की और इसके लिए उसने कोई कसर नहीं छोड़ी ,सबका दिल भी जीत लिया। घर और ऑफ़िस दोनों का काम करके उसे ऐसा महसूस होता था जैसे कि वह एक मशीन बन गई है ।मनीष गरिमा को हमेशा एक आदर्श बीबी, आदर्श बहू के रूप में देखना चाहता है किंतु क्या मनीष भी एक आदर्श पति के रूप में गरिमा के सामने अपने आपको रख पाया है ?क्या कभी मनीष पति होने के नाते गरिमा की भावनाओं को वह समझ पाया है ?क्या है पूरी कहानी जानते हैं शिवानी आनंद की आवाज़ में अलका सैनी के द्वारा लिखी गई कहानी कसक में…
दिन भर कवि शहर की तमाम गलियों में इधर से उधर चक्कर लगाता रहा; किंतु किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। उसने कभी किसी की खुशामद नहीं की थी और न किसी भद्रलोक का स्वागत गान ही बनाया था। न तो उसने किसी राजा की प्रशंसा में कोई कविता की थी और न किसी बाबू साहब के विवाहोत्सव में कोई छंद पढ़ा था। फिर उसे पूछता ही कौन?
रामकृपाल का बेटा दिनेश शहर में अपने मामू मनमोहन जी के यहां से पढ़कर बैंक में नौकरी कर रहा है |नौकरी करते हुए अभी दिनेश को मात्र 6 महीने हुए हैं और उसकी शादी के लिए बहुत सारे रिश्ते आने लगे हैं |अब रामकृपाल दिनेश की शादी बड़े घर की लड़की और नौकरी पेशा लड़की से करना चाहते हैं| रामकृपाल ऐसी बहू क्यों चाहते हैं ?और क्या उनकी मनोकामना पूरी होती है ?जानने के लिए सुनते हैं सिनीवाली के द्वारा लिखी गई कहानी वंशलोचन निधि मिश्रा की आवाज
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pragati sharma