कहानी उस गंदी राजनीति को दर्शाती है जहां राजनीतिज्ञ बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में भी अपनी गंदी और घिनौनी राजनीति करने से बाज नहीं आते |उनके लिए मानव संवेदनाएं और भावनाएं कोई महत्व नहीं रखती जानते हैं किस प्रकार? फणीश्वर नाथ रेणु द्वारा लिखी गई कहानी पुरानी कहानी: नया पाठ” ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
क्या आपने कभी उस नदी का खौफ महसूस किया है, जिसे पूरा देश ‘माँ’ कहकर पूजता है? जब जीवनदायिनी गंगा ही अपना रौद्र रूप धारण कर ले और पल भर में बस्तियों को निगलने लगे… तो प्रकृति के आगे इंसान की हैसियत क्या रह जाती है?
‘जय गंगा’ हिंदी साहित्य के दिग्गज कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला रिपोर्ताज (जीवंत कथा) है। यह मात्र एक कोरी कल्पना नहीं, बल्कि 1947 की उस खौफनाक बाढ़ का आँखों देखा और दिल दहला देने वाला सच है, जिसने पूरे इलाके की छाती पर तांडव किया था।
यह दास्तां सिर्फ पानी के कहर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के उस कड़वे सच को भी बेनकाब करती है जो आपदा के समय सामने आता है। एक तरफ कहानी में वो बेबस और गरीब ग्रामीण हैं, जो केले के पत्तों का ‘भेला’ (जुगाड़ की नाव) बनाकर लहरों से लड़ते हुए अपनी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ… समाज का वो अमीर और संवेदनहीन तबका है, जो मौत के इस खौफनाक मंजर के बीच भी अपनी सुरक्षित और बड़ी नावों पर ‘हारमोनियम और तबले’ के साथ जल-विहार (पिकनिक) का लुत्फ़ उठा रहा है।
रेणु जी की जादुई लेखनी आपको सीधे उस उफनती नदी के बीच ले जाकर खड़ा कर देती है। भूख, खौफ, बेबसी और इन सबके बीच भी ज़िंदा रहने की इंसान की कभी न टूटने वाली हिम्मत—यही ‘जय गंगा’ की असली आत्मा है।
किताब के पन्नों पर लिखी बाढ़ को आप सिर्फ पढ़ते हैं, लेकिन जब आप इसे सुनते हैं, तो आप उसे महसूस करते हैं। जब तेज़ लहरों की डरावनी गड़गड़ाहट, टूटते हुए कच्चे मकानों का दर्द और रेणु जी के ठेठ देसी किरदारों की आवाज़ आपके कानों तक पहुँचेगी, तो यह कहानी आपके ज़हन से हफ्तों तक नहीं उतरेगी।
प्रकृति के खौफ और इंसानियत की इस सबसे सच्ची और झकझोर देने वाली दास्तां को महसूस करें। अपनी आँखें बंद करें और लहरों के बीच ज़िंदा रहने की इस जंग का हिस्सा बनें।
एक अनाथ की मानसिकता क्या हो सकती है? एक वो चाहे तो हमेशा खुद को अनाथ ,अकेला ,बेसहारा महसूस करता रहे और अपनी किस्मत को कोसता रहे|दूसरा वो हर जगह परिवार बनाने के बारे में सोचे , हर जगह परिवार बनाये और अपनी ज़िंदगी में खुशियां भर ले | यह सब आपके ऊपर है कि आप अपनी ज़िंदगी में क्या चाहते हैं? ये कहानी है एक ऐसे शख्श की जिसकी ज़िंदगी की रेल गाडी में कई स्टेशन आये पर वो तलाश में था अपने परिवार के स्टेशन की….
पँचकौड़ी मिरदंगिया एक छोटी जात का बूढ़ा कलाकार है |जो मृदंग बजाता है |पहले तो लोग उसी कला को पसंद करते थे ,किंतु धीरे-धीरे लोग उससे अलग होते गए | पँचकौड़ी मिरदंगिया को एक 10 से 12 साल के लड़के मोहना से विशेष लगाव होता है और उसे अपने द्वारा गाए रसप्रिया सुनाना और सिखाना चाहता है |क्या है मोहना और मिरदंगिया का रिश्ता पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं फणीश्वर नाथ रेणु द्वारा लिखी गई कहानी रसप्रिया , सुमन वैद्य जी की आवाज में
देश एक है, देशवासी भी एक हैं, राज्य अलग हैं, भाषाएँ अलग हैं और इसी की बुनियाद पे कई बार लोग आपस में बट जाते हैं|भेदभाव करने लगते हैं, पर इन सबसे अलग हो कर कोई अपनी धुन में मस्त होकर जीना चाहे भी तो लोग उसे जीने नहीं देते |फिर भी जीवन आगे बढ़ता जाता है , और इंसान खुश रहने के रास्ते निकाल ही लेता हैं , भाषाओं के आगे भी बहुत कुछ है…
अकल बड़ी या भैंस , ये तो हम कई सालो से और युगो से सुनते आ रहे हैं , पर आज तक इसका सही उतार नहीं मिला,,,एक नजर में तो ऐसा लगता है की अकाल बड़ी है पर दूसरे ही पल कोई कहता है की जिसके पास जिस चीज़ की कमी होगी वो इंसान उसी को चुनेगा ,,ये बात मज़ाकिया लग सकती है , पर सवाल भी कुछ ऐसा ही है ,,,आइये इस कहानी को सुनते हैं ,,और आनंद लेते हैं अकाल और भैंस का
कहानी एक एक मां बचन की है| जिसके दो बेटे बिन्नी और लाली है| बचन अपने छोटे बेटे बिन्नी के साथ मुंबई की एक छोटी बस्ती में रह रही है| लाली एक दूसरे शहर में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रह रहा है |लाली के अस्वस्थ होने की खबर जब बचन को मिलती है ,तो वह बड़ी बेचैन होकर लाली को देखने जाती है | किंतु अब यहां उसे बिन्नी की याद सताने लगती है |मोहन राकेश के द्वारा लिखी गई कहानी आर्द्रा में जान सकते हैं मां की ममता को ,जिसे आवाज दी है सुमन वैद्य जी ने
गंगू एक ब्राह्मण युवक है |वह अपने मालिक के यहां काम करता है |गंगू जब एक विधवा स्त्री से विवाह करने का निर्णय लेता है तो मैं अपने मालिक के यहां से काम छोड़ देता है |उसका मालिक गंगू के इस निर्णय से अप्रसन्न है |क्या वास्तव में गंगू का यह निर्णय उचित है ? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी बालक सुमन वैद्य जी की आवाज में
हीरा और मोती नाम के दो बैलों की कहानी है दोनों एक साथ रहते हैं और एक दूसरे के बहुत अच्छे मित्र हैं झूरी उनका मालिक है झूरी का साला इन दोनों बैलों को अपने साथ ले जाता है वहां जमकर काम करवाता है और खाने को कुछ भी नहीं देता है दोनों बैल वहां से भाग जाते हैं यहां से शुरू हो जाती है उनके संघर्ष की कहानी क्या फिर से अपने मालिक के पास पहुंच पाते हैं उनके साथ क्या होता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी दो बैलों की कथा सुमन वैद्य जी की आवाज में
जयराज एक चित्रकार है और रानीखेत की सुंदर वादियों में प्रकृति के सुंदर चित्र बनाता है किंतु इन चित्रों में मनुष्य की अनुपस्थिति उसे अपने चित्र में अधूरे पन का एहसास दिलाती है इसी बीच उसके एक मित्र का पत्र आता है कि वह अपने पत्नी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए उसे रानीखेत भेज रहा है जयराज का चित्रकार मन नारी के सौंदर्य को चित्रित करने की कल्पना की उड़ान लेने लगता है क्या होता है जब उसकी मुलाकात नीता से होती है क्या वास्तव में उसकी कल्पना यथार्थ हो पाती है पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं यशपाल जी के द्वारा लिखी गई कहानी चित्र का शीर्षक सुमन वैद्य जी की आवाज में
जहाँ चील की आँखें अपने लक्ष्य को देख कर वार करती हैं, वहाँ वे अदृश्य चीलें अंधी होती हैं, और अंधाधुंध हमला करती हैं। उन्हें झपट्टा मारते हम देख नहीं पाते और हमें लगने लगता है कि जो कुछ भी हुआ है, उसमें हम स्वयं कहीं दोषी रहे होंगे। नायक की पत्नी शोभा नायक के साथ नहीं रहती है अचानक एक दिन नायक को शोभा एक पार्क में दिखाई देती है| नायक फिर से शोभा से मिलना चाहता है |क्या नायक का शोभा से पुनः मिलन हो पाएगा ? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी चीले, सुमन वैद्य जी की आवाज में…
अनोखी यात्रा – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
कहानी अनोखी यात्रा में, प्यार की एक अनोखी यात्रा पर निकले जो दो लोग उस प्यार में, जिस तरह के बेलौस और बेसाख़्ता मोहब्बत है वह देखने को मिलेगी। प्यार को किसी भाषा, शब्द ,वाक्य किसी की जरूरत नहीं होती क्योंकि प्यार अपने आप में भाषा होता है। चाहे वह दो प्यार करने वाले उसे अनजान ही क्यों ना हो, बेपनाह मोहब्बत की ऐसी दास्तां सुनिए नयनी दीक्षित की आवाज़ में
पत्नियो पर तो आप सबने बहुत चुटकुले और व्यंग सुने होंग़े। सुनिए पतियों पर लिखा गया ये कुछ मीठा और कुछ तीखा व्यँग सूर्यबाला जी की कहानी “गर्व से कहो हम पती हैं”
इंसान की उस संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती यह कहानी जब कभी अपने खून के रिश्ते वास्तव में कोई जिसने गलत काम किया हो और एक ऐसा रिश्ता जो आपके लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देंलेकिन आपका खून का रिश्ता ना हो के बीच में कोई चुनाव करना होता है तो इंसान सहज भाव से अपने खून के रिश्ते का चुनाव कर लेता है और एक पल में ही दूसरे रिश्ते को ठुकरा देता है भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी साग मीट सुमन वैद्य जी की आवाज में
रात! तारे-तारे, तारे! लूनी के मन में एक विचार उठा, मैं इन्हें देख रही हूँ, वह भी एक बार तो इन्हें देख ही लेगा और पहाड़ों की याद कर लेगा… तारे क्षण-भर झपक लेंगे; जब जागेंगे, तब मैं इन्हें अलपक ही देख रही हूँगी, पर वह-? भाई बहन के निश्छल प्रेम को दर्शाती यह कहानी जिसमें जिसने भाई-बहन अनाथ होते हैं और एक दूसरे के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं किंतु भाई को मिलता है प्राण दंड मिलता है तो बहन की मनोदशा किस प्रकार हो जाती है भूतकाल में बिताए हर एक क्षण को याद कर रही है
“तुम फौजी बड़े बेवफा होते हो शादी करोगे ,फिर कल फर्ज के नाम पर शहीद कहलाओगे | तुम्हारे पीछे मैं विधवा ……” कहानी में आकाश एक नेवी कमांडर है और एक भूमि नाम की लड़की से बहुत प्यार करता है | भूमि भी उससे बेतहाशा प्यार करती है |किंतु जब आकाश ,भूमि के सामने शादी का प्रस्ताव रखता है तो उसे वह अस्वीकार कर देती है | पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं ऋषभ आदर्श के द्वारा लिखी गई कहानी “विधवा “,अमित तिवारी जी की आवाज में….
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