देश एक है, देशवासी भी एक हैं, राज्य अलग हैं, भाषाएँ अलग हैं और इसी की बुनियाद पे कई बार लोग आपस में बट जाते हैं|भेदभाव करने लगते हैं, पर इन सबसे अलग हो कर कोई अपनी धुन में मस्त होकर जीना चाहे भी तो लोग उसे जीने नहीं देते |फिर भी जीवन आगे बढ़ता जाता है , और इंसान खुश रहने के रास्ते निकाल ही लेता हैं , भाषाओं के आगे भी बहुत कुछ है…
अकल बड़ी या भैंस , ये तो हम कई सालो से और युगो से सुनते आ रहे हैं , पर आज तक इसका सही उतार नहीं मिला,,,एक नजर में तो ऐसा लगता है की अकाल बड़ी है पर दूसरे ही पल कोई कहता है की जिसके पास जिस चीज़ की कमी होगी वो इंसान उसी को चुनेगा ,,ये बात मज़ाकिया लग सकती है , पर सवाल भी कुछ ऐसा ही है ,,,आइये इस कहानी को सुनते हैं ,,और आनंद लेते हैं अकाल और भैंस का
रतनी बचपन से ही दबंग लड़की रही है |बात-बात पर गालियां देने से भी परहेज नहीं करती |अब उसकी इन आदतों की वजह से उसे कोई विवाह नहीं करना चाहता| रतनी ऐसी क्यों बन गई? क्या है रतनी से नैना जोगिन बनने तक का उसका सफर |जानने के लिए सुनते हैं फणीश्वर नाथ रेणु द्वारा लिखी गई कहानी नैना जोगिन ,सुमन वैद्य की आवाज में ..
बीते समय की बातें, अब यादे भले ही बन गयी हैं पर आज भी वो अच्छी लगती हैं |लोग चाह कर भी उस समय को भूल नहीं पाते ,अगर आप भी इतिहास के पन्नो को पलटकर उस समय के समाज और उस समय के माहौल को अच्छे से जानना समझना और महसूस करना चाहते हैं तो ये कहानी आपके लिए है, इसमें आजादी से पहले का भारत भी आपको नजर आएगा और उसके बाद का भी ,आओ इतिहास के पन्ने पलटें..
क्या आपने कभी उस नदी का खौफ महसूस किया है, जिसे पूरा देश ‘माँ’ कहकर पूजता है? जब जीवनदायिनी गंगा ही अपना रौद्र रूप धारण कर ले और पल भर में बस्तियों को निगलने लगे… तो प्रकृति के आगे इंसान की हैसियत क्या रह जाती है?
‘जय गंगा’ हिंदी साहित्य के दिग्गज कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला रिपोर्ताज (जीवंत कथा) है। यह मात्र एक कोरी कल्पना नहीं, बल्कि 1947 की उस खौफनाक बाढ़ का आँखों देखा और दिल दहला देने वाला सच है, जिसने पूरे इलाके की छाती पर तांडव किया था।
यह दास्तां सिर्फ पानी के कहर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के उस कड़वे सच को भी बेनकाब करती है जो आपदा के समय सामने आता है। एक तरफ कहानी में वो बेबस और गरीब ग्रामीण हैं, जो केले के पत्तों का ‘भेला’ (जुगाड़ की नाव) बनाकर लहरों से लड़ते हुए अपनी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ… समाज का वो अमीर और संवेदनहीन तबका है, जो मौत के इस खौफनाक मंजर के बीच भी अपनी सुरक्षित और बड़ी नावों पर ‘हारमोनियम और तबले’ के साथ जल-विहार (पिकनिक) का लुत्फ़ उठा रहा है।
रेणु जी की जादुई लेखनी आपको सीधे उस उफनती नदी के बीच ले जाकर खड़ा कर देती है। भूख, खौफ, बेबसी और इन सबके बीच भी ज़िंदा रहने की इंसान की कभी न टूटने वाली हिम्मत—यही ‘जय गंगा’ की असली आत्मा है।
किताब के पन्नों पर लिखी बाढ़ को आप सिर्फ पढ़ते हैं, लेकिन जब आप इसे सुनते हैं, तो आप उसे महसूस करते हैं। जब तेज़ लहरों की डरावनी गड़गड़ाहट, टूटते हुए कच्चे मकानों का दर्द और रेणु जी के ठेठ देसी किरदारों की आवाज़ आपके कानों तक पहुँचेगी, तो यह कहानी आपके ज़हन से हफ्तों तक नहीं उतरेगी।
प्रकृति के खौफ और इंसानियत की इस सबसे सच्ची और झकझोर देने वाली दास्तां को महसूस करें। अपनी आँखें बंद करें और लहरों के बीच ज़िंदा रहने की इस जंग का हिस्सा बनें।
पँचकौड़ी मिरदंगिया एक छोटी जात का बूढ़ा कलाकार है |जो मृदंग बजाता है |पहले तो लोग उसी कला को पसंद करते थे ,किंतु धीरे-धीरे लोग उससे अलग होते गए | पँचकौड़ी मिरदंगिया को एक 10 से 12 साल के लड़के मोहना से विशेष लगाव होता है और उसे अपने द्वारा गाए रसप्रिया सुनाना और सिखाना चाहता है |क्या है मोहना और मिरदंगिया का रिश्ता पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं फणीश्वर नाथ रेणु द्वारा लिखी गई कहानी रसप्रिया , सुमन वैद्य जी की आवाज में
संघर्ष ,सामंजस्य ,जिम्मेदारियाँ ,समर्पण ,त्याग का नाम ज़िदंगी है| आज मिलते हैं ऐसे ही एक शख्सियत से जिन्होंने ज़िदंगी के सारे पहलुओं पर खरे उतरते हुए आज एक विशिष्ट मुकाम हासिल किया है|अपनी मातृत्व- शक्ति ,निपुणता और बेजोड़ आत्मविश्वास के बल पर जीवन की चुनौतियों को आविष्कार के रूप में परिवर्तित कर दिया है| जिससे वो अपनी जैसी लाखों महिलावर्ग के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है|. इनकी संकल्प की शक्ति से आज कितनो के जीवन बदल गए हैं | “पल्लवी उतागी”, का अद्भुत व्यक्तित्व है, ये सुपरबॉटम की सी.ई.ओ और संस्थापक हैं|इन्होंने ऐसे डायपर का आविष्कार किया जो रियूज़ेबल और कपास से निर्मित है| यह भारत की सफल महिला उद्यमी है, जिन्होंने शिशु और पृथ्वी दोनों की देखभाल हेतु अपने उत्पाद को बाजार में उतारा और सफलता प्राप्त की|6
सत्य की खोज में इंसान हमेशा से रहा है और इसे खोजने के लिए कभी उसने धर्म को गहराई से समझने की कोशिश की है | आसान से शब्दों में कहा जाये तो सत्य , धर्म , राजनीति , सामाजिकता और अत्याचार इन सबसे घिरा इंसान सत्य की खोज कैसे करेगा और इन सब का उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
ये कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने जीवन में कभी हार नहीं मानी। जीवन में बहुत सी विसम परिस्तिथियाँ आई पर उनके क़दम कभी नहीं डगमगाए और वो हर मुश्किल का सामना करते हुए , सकरात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते गए , इनकी कहानी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है
एक अनाथ की मानसिकता क्या हो सकती है? एक वो चाहे तो हमेशा खुद को अनाथ ,अकेला ,बेसहारा महसूस करता रहे और अपनी किस्मत को कोसता रहे|दूसरा वो हर जगह परिवार बनाने के बारे में सोचे , हर जगह परिवार बनाये और अपनी ज़िंदगी में खुशियां भर ले | यह सब आपके ऊपर है कि आप अपनी ज़िंदगी में क्या चाहते हैं? ये कहानी है एक ऐसे शख्श की जिसकी ज़िंदगी की रेल गाडी में कई स्टेशन आये पर वो तलाश में था अपने परिवार के स्टेशन की….
कहते हैं “ अपनी धरती और जड़ों से जुड़कर ही मनुष्य अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकता है क्योंकि वे जड़े ही उसकी ज़िन्दगी को मज़बूती देती हैं जिनके सहारे वह आगे सदा आगे बढ़ता है और ज़िन्दगी को गहराई से समझता है “ सब उसे प्यार और दुलार से बाला पुकारते थे और बहुत कम उम्र में ही बाला ने इस बात को समझ कर जीवन में धारण कर लिया था इनका जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है , आइये जानते हैं इनके बारे में
एक स्वयंसेवक को जेल हो जाती है और उसकी पत्नी को यहां तक कि अपने ससुर का भी सहारा नहीं मिलता है |ऐसे में ज्ञानचंदकी पत्नी उसका सहारा बनती है| जानते हैं नारी के निर्भीक ,अलौकिक रूप को प्रेमचंद के द्वारा लिखी गई कहानी अनुभव में भूपेश पांडिया की आवाज में
अगर डटकर मुकाबला किया जाए तो कौन-सा ऐसा अन्याय है, जिसकी धज्जियाँ न बिखेरी जा सकती हैं।कहानी में रजनी एक निडर महिला है| जो सच्चाई के लिए हमेशा लड़ती है |रजनी द्वारा किस प्रकार स्कूल में ट्यूशन का जो घिनौना रैकेट चल रहा होता है, उसका किस प्रकार पर्दाफाश करती है? जानने के लिए सुनते हैं मन्नू मन्नू भंडारी की लिखी कहानी रजनी ,माधवी शंकर की आवाज में…
द्रौपदी ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य की नायिका है |वह केवल दु:शासन ही नहीं वरन् अपने पति को भी प्रश्नों के कटघरे में खड़ा कर स्पष्टीकरण माँगती है। वह भरी सभा में यह सिद्ध कर देती है कि जुए में स्वयं को हारने वाले युधिष्ठिर को मुझे दाँव पर लगाने का कोई अधिकार नहीं है
श्रीमती ने बालपन में ही खेल -खेल में मंदिर के एक मुनि को अपना पति स्वीकार कर लिया | अब श्रीमती सयानी हो चुकी है तो उसके सामने विवाह के कई प्रस्ताव आ रहे हैं और वह सब को अस्वीकार कर रही है| क्या वास्तव में श्रीमती को मुनि पति के रूप में प्राप्त होते हैं? क्या मुनि गृहस्थ जीवन स्वीकार करते हैं ? इंद्र चंद्र शास्त्री जी के द्वारा लिखी गई कहानी प्रेम के धागे जानते हैं सुमन वैद्य जी की आवाज में …
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