हृदय रोगों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 29 सितंबर 2012 को WHF ने WHO के साथ मिलकर विश्व हृदय दिवस की घोषणा की।
इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। आरएएफ का पूर्ण रूप रैपिड एक्शन फोर्स है। यह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरएएफ) की एक विशेष शाखा है और यह दंगों, दंगा जैसी स्थितियों, भीड़ नियंत्रण, बचाव और राहत कार्यों और संबंधित अशांति से निपटने के लिए 7 अक्टूबर 1992 को पूरी तरह से चालू हो गया।
जीन बैप्टस सीमेन चार्डिन ने 200 से अधिक चित्रों की रचना की। इनका पसंदीदा विषय खेलने वाला बच्चा रहा। घरेलू अंदरूनी शैली के चित्रों का को इन्होंने बखूबी चित्रित किया। उनकी चित्रकारी में बच्चों और घरेलू गतिविधियों को बखूबी दर्शाया गया है
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म मुगलसराय में हुआ ।वह 1964 में भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री बने। काशी विद्यापीठ से उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनके प्रधानमंत्री काल में 1965 में भारत ने पाकिस्तान को कारारी शिकस्त दी। उनके द्वारा दिया गया’ जय जवान, जय किसान’ का नारा जवानों और किसानों के श्रम को दर्शाता है ।उनके सादगी भरे जीवन और भारत के लिये अभूतपूर्व प्रेम को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
हर साल 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 2004 में हुई, जब कनाडा में वर्ल्ड स्ट्रोक कांग्रेस ने इस दिन को मनाया। दो साल बाद वर्ष 2006 में इस दिन को जन जागरूकता के लिए घोषित किया गया। 2006 में, वर्ल्ड स्ट्रोक फेडरेशन और इंटरनेशनल स्ट्रोक सोसाइटी के विलय के साथ वर्ल्ड स्ट्रोक संगठन स्थापित हुआ। तब से, विश्व स्ट्रोक संगठन (डब्ल्यूएसओ) विभिन्न प्लेटफार्मों पर विश्व स्ट्रोक दिवस (डब्ल्यूएसडी) मनाता आ रहा है।
शांति और विकास के लिये विश्व विज्ञान दिवस सर्वप्रथम 10 नवंबर, 2002 को यूनेस्को (UNESCO) के तत्त्वावधान में दुनिया भर में मनाया गया था। शांति और विकास के लिये विश्व विज्ञान दिवस, आम जनता को उनके जीवन में विज्ञान की प्रासंगिकता दर्शाने और इसे वार्ता में शामिल करने का अवसर प्रदान करता है।
अमेरिका ने ऑपरेशन इंड्योरिंग फ्रीडम के तहत 7 अक्टूबर को अफगानिस्तान में हवाई हमला शुरू किया. नवंबर-दिसंबर में 1300 अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान पहुंचे
द्रौपदी रौद्र रूप धारण कर लेती है। उसके दुर्गा-जैसे तेजोद्दीप्त भयंकर रौद्र-रूप को देख दु:शासन घबरा जाता है और उसके वस्त्र खींचने में स्वयं को असमर्थ पाता है। द्रौपदी कौरवों को पुन: चीर-हरण करने के लिए ललकारती है। सभी सभासद द्रौपदी के सत्य, तेज और सतीत्व के आगे निस्तेज हो जाते
निशिकांत लेखक बनना चाहता है हिंदी के प्रति उसका असीम प्रेम उसे यह करने की प्रेरणा दे रहा है किंतु निशिकांत द्वारा लिखी गई पहली कहानी अपने मित्र को दिखाता है तो मित्र उसकी कहानी को किसी बड़े लेखक की कहानी की नकल बताता है अब ऐसे में निशिकांत का क्या आत्मविश्वास डगमगा जाता है या फिर से कोशिश करता है विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी जानते हैं
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