कहानी पाश्चात्य सभ्यता लिवइन रिलेशनशिप आधारित है |प्रतिमा बिना शादी के प्रणव के साथ रह रही है वह उसके बच्चे की मां बनने जा रही है| उसके अनुसार स्वतंत्रता, अस्तित्व, वजूद, पसंद, सब शादी के साथ मिटने लगते है| किन्तु क्या उसे एहसास हो पायेगा कि सारे रिश्ते रस्मों के मोहताज होतें हैं |
कहानी ऐसी लड़की की है जिसके लिए विवाह जैसी बातों का कोई मतलब नहीं है | वह पूरी तरह लीव इन पार्टनर जो यूज एण्ड थ्रो में विश्वास करती है। उसके लिए डेटिंग एक फिजिकल डिमांड है , अपनी बायलोजिकल नीड्स को पूरा करने के लिए |उसके व्यवहार में यह बात क्यों शामिल हुई जानने के लिए सुनते हैं स्वाति तिवारी के द्वारा लिखी गई कहानी रिश्तों के कई रंग ,अंजू जेटली की आवाज में
बुढ़ापे में एकाकीपन और उसके कारण अवसाद को समेटे स्वाति तिवारी की कहानी बंद मुट्ठी बेहद भावुक कर देने वाली है जानते हैं कैसे एक वृद्धा जिसे सभी चाची कहते हैं अपना एकाकीपन किस प्रकार समेट रही है ?अंजू जेटली आवाज में
अनु आज अपना 50 वां जन्मदिन मना रही है सुबह-सुबह उसके बचपन के दोस्त शेखर का फोन आता है कि उसके साथ उसका जन्मदिन बनाना चाह रहा है किंतु आज भी अनु उसी सामाजिकता के दायरों में भी वही परंपरागत डरपोक भारतीय नारी की तरहजो पति की पसंद-नापसंद से आगे कोई सोच नहीं रखती है |क्या अनु शेखर को अपने यहां बुला पाएगी |अनु आगे क्या निर्णय लेती है जानने के लिए सुनते हैं स्वाति तिवारी की लिखी कहानी बंद मुट्ठी में चाकलेट ,अंजू जेटली की आवाज
कहानी की नायिका नीरजा एक अति महत्वाकांक्षी महिला है| अपनी महत्वाकांक्षा को अहमियत देते हुए नीरजा अपना वैवाहिक जीवन को उपेक्षित करती है| आज उसे समझ में आ रहा है कि वैवाहिक जीवन कितना शाश्वत है क्या नीरजा अपनी उस मृगतृष्णा से बाहर आ पाएगी |
एक कामकाजी महिला के ऊपर समाज किस प्रकार शोषण करता है इसी बात दर्शाती है कहानी एक फलसफा जिन्दगी कहानी में सुभद्रा सुंदर सुशिक्षित लड़की है |जिसको कई बार नौकरी में शोषित किया जा रहा है| सुभद्रा कैसे इस बात से बाहर निकलती है जानने के लिए सुनते हैं स्वाति तिवारी की लिखी हुई कहानी एक फलसफा जिन्दगी ,अंजू जेटली की आवाज में
कहानी ऐसी लड़की की है जिसके लिए विवाह जैसी बातों का कोई मतलब नहीं है | वह पूरी तरह लीव इन पार्टनर जो यूज एण्ड थ्रो में विश्वास करती है। उसके लिए डेटिंग एक फिजिकल डिमांड है , अपनी बायलोजिकल नीड्स को पूरा करने के लिए |उसके व्यवहार में यह बात क्यों शामिल हुई जानने के लिए सुनते हैं स्वाति तिवारी के द्वारा लिखी गई कहानी रिश्तों के कई रंग ,अंजू जेटली की आवाज में
कहानी केतकी और अंश की एक अधूरी प्रेम कहानी को इंगित करती है |केतकी बहुत ही सुंदर, शिक्षित और बेहद व्यवहार कुशल लड़की है |उसके मां -बाप नहीं है, मौसी – मौसा जी ने उसका पालन किया है | केतकी और अंश एक साथ पढ़ाई कर रहे हैं |अंश और केतकी एक दूसरे को बेहद पसंद करते हैं किंतु जब अंश, केतकी के सामने अपने प्रेम का इजहार करता है तब केतकी इस बात को अस्वीकार कर देती है | आखिर क्या वजह है इसके पीछे ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अनुलता राज नायर द्वारा लिखी कहानी केतकी ,अंजू जेटली की आवाज में
एक कामकाजी महिला के ऊपर समाज किस प्रकार शोषण करता है इसी बात दर्शाती है कहानी एक फलसफा जिन्दगी कहानी में सुभद्रा सुंदर सुशिक्षित लड़की है |जिसको कई बार नौकरी में शोषित किया जा रहा है| सुभद्रा कैसे इस बात से बाहर निकलती है जानने के लिए सुनते हैं स्वाति तिवारी की लिखी हुई कहानी एक फलसफा जिन्दगी ,अंजू जेटली की आवाज में
वे तीन दिन – आर्या झा – शेफ़ाली कपूर
आदित्य एक सरकारी कर्मचारी है ।16 साल पुराना प्यार जब उसके सामने आ रहा है तो आदित्य के जीवन में मानो फिर से एक नया रंग भर रहा है। अपनी पुरानी प्रेमिका और पत्नी के बीच आदित्य के जीवन में यह आने वाले 3 दिन एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आ रहे हैं ।क्या आदित्य अपने पुराने प्रेम के खातिर अपनी पत्नी को त्याग देगा या फिर आदित्य को अपनी पत्नी की कदर पहले से अधिक महसूस होने लगेगी? आर्या झा के द्वारा लिखी गई कहानी वे तीन दिन में जानिए, शेफ़ाली कपूर की आवाज़ में…
एक आलीशान कॉलोनी के बीच में एक मैदान जहां पर गरीब बस्ती के लोग ,बच्चे खेलते- कूदते आते -जाते और सर्दियों में धूप सेंकते हैं किंतु आलीशान बंगलों में रहने वालों को यह बात नागुज़ार है तो क्या ये अमीर लोग अपनी झूठी शान के ख़ातिर उस मैदान के साथ ऐसा कुछ करेंगे कि जिससे कोई गरीब आदमी उस मैदान में आये ही ना । क्या होगा? जानने के लिये सुनतें हैं अंजना वर्मा की कहानी नंदन पार्क ,विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में..
सेवा – ममता कालिया – शैफाली कपूर
पुरुषोत्तम सहाय की पत्नी करीब 15 दिनों से अस्पताल में कोमा की स्थिति में पड़ी है। पुरुषोत्तम सहाय अकेले ही अपनी पत्नी की सेवा कर रहे हैं। कहने को पुरुषोत्तम सहाय की दो शादी-शुदा बेटियां, पुत्र, पुत्र-वधू ,पोता सभी है पर ऐसी स्थिति में अपनी उस मां के लिए जिसने ता-उम्र अपने पति और बच्चे की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया ,आज वही बच्चे क्या अस्पताल में जाकर मां की सेवा करना चाह भी रहें हैं या फिर मात्र औपचारिकता (formality) निभा रहे हैं ?ऐसी स्थिति में पुरुषोत्तम सहाय अपने बच्चों से क्या उम्मीद कर रहा है। पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी सेवा ,शेफाली कपूर की आवाज़ में
योगिता और ऋषभ की नई- नई शादी हुई है| ऋषभ अपने दोस्तों के बीच योगिता को दोस्तों के पत्नियों के समक्ष एक अनजानी सी प्रतिस्पर्धा में खड़ा कर देता है| योगिता को जबरदस्ती के इस थोपे हुए होते हुए संग्राम के ऊपर कैसे विजय हासिल होती है जानते हैं विनीता शुक्ला के द्वारा लिखी गई कहानी एक थोपा हुआ संग्राम ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में..
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