उस दिन मैं बिना कुछ सोचे हुए ही भाई निराला जी से पूछ बैठी थी,” आपके किसी ने राखी नहीं बांधी?” ” कौन बहन हम जैसे भुक्कड़ को भाई बनावेगी?” मे, उत्तर देने वाले के एकांकी जीवन की व्यथा थी, या चुनौती ? यह कहना कठिन है ।पर जान पड़ता है किसी अन्य चुनौती के आभास ने ही मुझे उस हाथ के अभिषेक की प्रेरणा दी। उनके अस्त-व्यस्त जीवन को व्यवस्थित करने के असफल प्रयास का स्मरण कर मुझे आज भी हंसी आ जाती है। संयोग से उन्हें कहीं से ₹300 मिले। उन्होंने मुझे अपने खर्च का बजट बनाने का आदेश दिया। अस्तु : नमक से लेकर नापित तक और चप्पल से लेकर मकान के किराए तक का अनुमान- पत्र मैंने बनाया। उन्हें पसंद आया ।पर दूसरे ही दिन वह सवेरे आ पहुँचे। ₹50 चाहिए किसी विद्यार्थी की परीक्षा शुल्क भरना है वरना—–
भक्तिन का यह नाम मेरा दिया हुआ है। पाँच वर्ष की अवस्था में वह ब्याह दी गई और नौ वर्ष की बालावस्था में गौना भी कर दिया गया । गेंहुए रंग और बटिया जैसे मुख वाली कन्याओं को जन्म देने के कारण जेठानियाँ उसकी उपेक्षा करने लगी। पति की मृत्यु के पश्चात उसकी जायदाद पर जेठों की नजर थी। किंतु वह एक सुई की नोक के बराबर भी जायदाद देने को तैयार ना थी। अपनी जायदाद को बचाने के लिए उसने क्या किया?
चीनी फेरीवाला फाटक से बाहर आता दिखाई दिया । उसके कंधे पर भूरे कपड़े का गट्ठर था। मैंने कहा कि मैं फॉरेन नहीं खरीदती, तो सरल विस्मय के साथ उसने कहा कि हम क्या फारन है ? हम तो चाइना से आता है । मैंने अपनी नहीं को और अधिक कोमल बनाकर कहा, मुझे कुछ नहीं चाहिए भाई । चीनी भी विचित्र निकला,’ हमको भाई बोला है ।तुम जरूर लेगा। बहुत अच्छा सिल्क आता है सिस्तर। और उस दिन से उसे मेरे घर में आने जाने की परवानगी मिल गई
बिंदा लेखिका की की बचपन की सहेली है| जो लेखिका के पड़ोस में ही रहती है| बिंदा की सौतेली मां उसे खूब सताती है और घर का सारा काम करवाती है |बिंदा का मातृप्रेम से वंचित रहना और अपनी सौतेली मां के क्रूर व्यवहार को सहन करने के कारण क्या बिंदा का बचपन खिलने से पहले ही मुरझा जाएगा ? महादेवी वर्मा जी की बेहद हृदयस्पर्शी कहानी बिंदा मे जानिए ,जिसे विनीता श्रीवास्तव ने अपनी आवाज दी है…
“दीपशिखा”,महादेवी वर्मा का पाँचवाँ कविता-संग्रह है। इस संग्रह के गीतों का मुख्य प्रतिपाद्य स्वयं मिटकर दूसरे को सुखी बनाना है। दीपशिखा के संग्रह से लिया गया गीत “दीप मेरे जल अकम्पित” सीमा अग्रवाल की आवाज में
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नरेंद्र के मन में एक प्रश्न डंक की भांति परेशान कर रहा है| यह प्रश्न उसकी मां सुशीला के स्त्रीत्व की पवित्रता को लेकर है |क्या नरेंद्र अपनी मां से अपने प्रश्नों का उत्तर ले पाएगा ?क्या वास्तव में में सुशीला के जीवन में इसके पीछे कोई कहानी थी ?सुशीला अपनी पवित्रता नरेंद्र को समझा पाएगी ? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं गजानन माधव मुक्तिबोध के द्वारा लिखी गई कहानी प्रश्न सुमन वैद्य जी की आवाज में….
इस दुराचारी ने अपने स्वार्थ के लिए न मालूम कितनी बालाओं का जीवन नष्ट कराया है उन्हें पथभ्रष्ट कर दिया है। जिस आदरणीय दृष्टि से इस नीच समाज में देखा जाता है वास्तव में यह नीच उसके योग्य नहीं, वरन यह नर पशु है, लोलुपी है, लम्पट है। सिंह की खाल ओढ़े हुए तुच्छ गीदड़ है-रंगा सियार है। मुक्ता पंडित जी से संगीत की शिक्षा ले रही है किंतु पंडित जी दलाली जैसा घिनौना कृत्य करते हैं मुक्ता को भी इसी प्रयोजन का हिस्सा बनाने के आशय से मुक्ता की मुलाकात मणिधर से करवाते हैं मुक्ता जब गर्भ से हो जाती है तो समाज सारा दोष मुक्ता पर मढ़ देता है किंतु क्या पंडित जी और मणिधर को अपने कृत्य पर कोई अफसोस होता है और क्या वे प्रायश्चित करते हैं जानने के लिए सुनते हैं अमृतलाल नागर द्वारा लिखी गई कहानी प्रायश्चित सुमन वैद्य की आवाज में
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