इस कहानी में एक पिता और बेटे के कहे अनकहे जज़्बातों को , उनके एहसासों को बड़ी सच्चाई और ख़ूबसूरती के साथ प्रस्तुत किया गया है।
इस कहानी में एक पिता और बेटे के कहे अनकहे जज़्बातों को , उनके एहसासों को बड़ी सच्चाई और ख़ूबसूरती के साथ प्रस्तुत किया गया है।
सब औरतें एक जैसी होती हैं, कि आखिरकार उनमें कोई फर्क नहीं होता। इस बात को मत सुनना क्योंकि यह झूठ है। हरेक औरत का अपना स्वाद और अपनी खुशबू होती है।‘ ‘पर यह सच नहीं है यार।‘ कमल कह रहा था, ‘इस मारुति की पिछली सीट पर कई औरतें लेटी हैं, लेकिन जब वे रुपयों को पर्स में ठंूसती हुई, हंसकर निकलती हैं, तो एक ही जैसी गंध छोड़ जाती हैं। बीवी की गंध हो सकता है, कुछ अलग होती हो। क्या खयाल है तुम्हारा?‘ मुंबई में कमल और उसका एक दोस्त पूरी रात मस्ती में गुजारना चाहते हैं | इसी घटनाक्रम में उनकी मुलाकात ऐसी लड़कियों और औरतों से होती है जो देह व्यापार जैसे घिनौने व्यवसाय से जुड़ी होती हैं | आखिर उसके पीछे उनकी क्या वजह थी पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कहानी उस रात की गंध
धीरेंद्र अस्थाना जी की कहानी ओरंगउटान इस ओर संकेत करती है कि क्या एक मनुष्य अपने आप को एक ऐसे जीव से तुलना कर सकता है जिसमे की वह अपना अक्स देखता हो? उसी तरह जिस तरह जंगल मे रहने वाला ओरंगउटान काफी बुद्धिमान वनमानुष है किंतु इसके बावजूद भी अकेला रहता है| कभी-कभी इंसान में धीरे-धीरे ऐसी प्रवृत्ति सामाजिक दबाव के चलते उत्पन्न हो जाती है |मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और अपने आप को अकेला महसूस करता है और धीरे-धीरे मानव जाति का हर इंसान ओरंगउटान होता जा रहा|
कभी -कभी दूसरे की खुशियां इंसान खुद जब महसूस करता है, तब वह जान पाता है कि अपने अंदर की खाली गुफा से या अपने अंदर के खालीपन से वह कैसे बाहर आ सकता है ? जब इंसान अपने स्टैंडर्ड को बहुत बहुत ही ऊंचा समझने लगता है और उसे लगता है कि उसके साथ तालमेल बैठाने के लिए दूसरे इंसान को उस तक पहुंचना होगा |तो कभी-कभी अपने दंभ से बहुत अकेला पड़ जाता है | इस कहानी का महेंद्र अपने दिल की इस खाली गुफा से कैसे बाहर निकलता है?
कहानी जीवन की उस सत्यता से परिचय कराती है कि इंसान तभी अपनों की अहमियत का एहसास करता है, जब वह व्यक्ति उसके पास नहीं होता | कहानी में 62 वर्ष के राजीव निगम को जब सुबह यह पता चलता है कि उसकी पत्नी आरती रात में उसे और घर को छोड़कर कहीं चली गई है | तब राजीव निगम एहसास करता है कि आखिर 40 वर्ष साथ गुजारने के बाद, इस उम्र में आरती को यह कठोर फैसला क्यों लेना पड़ा होगा |धीरेंद्र अस्थाना की बेहद रोचक और दिल को छू लेने वाली कहानी है ‘पराधीन ‘,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में…
तिलिस्मी दुनिया जहां बड़े लोग, बड़े व्यापार, बड़ी पार्टियां, बड़ी सुंदरता ,बड़ी मारकाट ,बड़ी सफलता और चकाचौंध कर देने वाली जिंदगी को पाने के लिए इंसान ऐसी नींद के आगोश में चला जाता है कि उसके कारण वह अपने सच्चे रिश्ते, सच्चा प्यार और यहां तक की अपने से भी प्यार करना भूल जाता है |वह समझ नहीं पाता है कि उस नींद के बाहर की दुनिया अब उसके लिए कितनी अजनबी हो चुकी है ?एक आम -इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी में आए हुए कई बदलावों को चित्रित करती हुई धीरेंद्र अस्थाना की कहानी नींद के बाहर ,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में
मैं तो समझ रहा था कि तुम इस बँगले में‚ इस घटना के बाद रहना नहीं चाहोगी‚ लेकिन आज मैंने समझा कि तुम्हारा विश्वास तो हिमालय से भी ऊँचा है। तुम्हारे विश्वास को कोई तुफान नहीं डगमगा सकता। आज तुमने मेरे विश्वास को टूटने से बचा लिया।”—डिप्टी साहब ने पत्नी की आँखों के आँसू पोंछते हुए भरे कण्ठ से कहा। डिप्टी साहब जी के आज गृह प्रवेश है | तभी खबर आती है कि उनका भतीजा राजुल अब इस दुनिया में नहीं रहा |पूरा माहौल शोक सभा में बदल जाता है ,वहां आए सभी आगंतुक की बातों से डिप्टी साहब का मन शुभ -अशुभ के फेर में पड़ने लग जाता है | कहानी में आगे क्या होता है? जानने के लिए सुनते हैं डॉक्टर जगदीश व्योम जी के द्वारा लिखी गई कहानी शंका का अंकुर, अमित तिवारी जी की आवाज में
गजाधर बाबू नौकरी के चलते छोटे शहर में रहते हैं जबकि उनका पूरा परिवार उनकी पत्नी उनके बच्चे सभी एक दूसरे बड़े शहर में अपने घर में रहते हैं गजाधर बाबू जी का जब रिटायरमेंट होता है तो वह अपने परिवार के साथ रहने के उद्देश्य से उनके पास जाते हैं किंतु क्या उनका वही पूरा परिवार उन्हें गृह स्वामी की तरीके से प्यार व सम्मान देता है क्या उन्हें परिवारिक खुशी प्राप्त हो पाती है उषा प्रियंवदा जी के द्वारा लिखी इस कहानी वापसी में सुनते हैं अमित तिवारी जी की आवाज में ..
पिंगमाल्य एक मूर्तिकार है सौन्दर्य की देवी अपरोदिता का वरदान उसे प्राप्त है-उसके हाथ में असुन्दर कुछ बन ही नहीं सकता। अपरोदिता का वरदान पिंगमाल्य को असमंजस की स्थिति में डाल देता है क्या था वह वरदान और आखिर पिंगमाल्य क्या निर्णय लेता है जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय की जी के द्वारा लिखी गई कहानी कलाकार की मुक्ति अमित तिवारी जी की आवाज में
एक मकान मालिक की व्यथा अपना सारा खर्चा और अपने सारे शौक अपने पेइंग-गेस्ट के जरिए पूरा कर लेता है वह पेइंग-गेस्ट उनके यहां से चला जाता है अब उनके घर का सारा खर्चा और उनके शौक कौन पूरा करें इसी बात को बड़े व्यंग्यात्मक शैली में कमलेश पांडे जी द्वारा लिखी गई कहानी तुम कब आओगे अतिथि सुनते हैं अमित तिवारी जी की आवाज में
आउटसोर्सिंग का मतलब है कि अगर अपना काम खुद से ढंग से ना हो पा रहा हो तो किसी दूसरे से करवा लीजिए| यह सिस्टम पृथ्वी लोक में तो पॉपुलर है, लेकिन अब तो देव लोक तक पॉपुलर हो चुका है |कैसे? इसे जानने के लिए कमलेश पांडे के व्यंग आउटसोर्सिंग में सुनेंगे अमित तिवारी की आवाज में
झाबुआ से लौटते हुए इसलिए उदास हूँ कि अन्नास नदी सूख गई है और रंग-बिरंगे प्रिंट वाले कपड़े पहने मोटर साइकिल पर घूमते सीधे-सादे भील आज भी प्रकृति के इतने नज़दीक हैं कि उन्हें इस शोख नदी के मर जाने का शायद अहसास ही नहीं है।असीम राय और मदन झाबुआ नगर जा रहे हैं मदन जी का बचपन वहां गुजरा है अनास नदी को लेकर उनकी काफी यादें हैं अब दोबारा जब वहां पाते हैं तो क्या उन्हें pहले जैसा सब कुछ मिलता है जानने के लिए सुनते हैं कहानी हेमंत जोशी के द्वारा लिखी गई कहानी अनास नदी सूख गई अमित तिवारी जी की आवाज
गाय के नेत्रों में हिरन के नेत्रों-जैसा विस्मय न होकर आत्मीय विश्वास रहता है। उस पशु को मनुष्य से यातना ही नहीं, निर्मम मृत्यु तक प्राप्त होती है, परंतु उसकी आंखों के विश्वास का स्थान न विस्मय ले पाता है, न आतंक। महादेवी वर्मा जी के द्वारा लिखित प्रसिद्ध कहानियों में से है कहानी गौरा गाय |महादेवी जी के स्नेह पाकर गौरा गाय हष्ट-पुष्ट हो गई थी, किंतु एक समय ऐसा भी आया गौरा अपने बछड़े को छोड़कर सदा के लिए चल बसी |आखिर क्या हुआ था गौरा के साथ ?जानते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में कहानी गौरा गाय….
समय द्वारा अपने मनोरंजन के लिए वायु. जल, अग्नि और कई प्रकार के जीवों के उपरांत मनुष्य के बनाए जाने की कथा।
आधुनिक परिवेश में पाल रहे अपने बच्चों की हर जिद, हर जरूरत को किसी भी तरह पूरा करते-करते एक मध्यवर्गीय परिवार किस प्रकार अपने बच्चों से ही पिछड़ जाता है । यह सोचने को मजबूर करती हुई बेहद भावुक कहानी है गति…….
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