मानव है मेरे राम – Episode -44 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए क्यों राम, सुग्रीव की सेना का नेतत्व ग्रहण नहीं करते | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -62 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए राम के द्वारा युद्ध के लिए की गयी व्यूह रचना के बारे में | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -43 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए क्यों लक्ष्मण में सुग्रीव के प्रति क्रोध उत्पन्न हुआ | मानव है मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -56 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए कैसे राम ने अपनी सेना का नेतत्व किया रावण के विरुद्ध युद्ध में | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -23 – Dr. Pradeep Dixit
मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -12- Dr. Pradeep Dixit
जानिए क्यों राम के कारण ऋषियों को खतरा था चित्रकूट में । “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -10- Dr. Pradeep Dixit
जानिए किस तरह राम ने अपनी नेतृत्व कुशलता से अयोध्या में होने वाले जन विद्रोह को रोका । “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -29 – Dr. Pradeep Dixit
मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -22 – Dr. Pradeep Dixit
मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -13- Dr. Pradeep Dixit
जानिए क्यों अनसुइया ने सीता को दिए थे आभूषण | “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode – 3- Dr. Pradeep Dixit
जानिए महर्षि विश्वामित्र द्वारा तड़का वध के लिए राम को पुरस्कार स्वरुप दी गयी ब्रह्म शक्तियों के बारे में, “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l अगली कड़ी में जानिए कहाँ गाया जाता है, राम को जगाने वाला श्लोक I
मानव है मेरे राम – Episode -39 – Dr. Pradeep Dixit
कैसे किया राम ने बाली का वध | | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -8- Dr. Pradeep Dixit
जानिए क्यों नारद ने राम विवाह के मुहूर्त को अशुभ कहा था ? “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -25 – Dr. Pradeep Dixit
मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode – 2- Dr. Pradeep Dixit
जानिए महर्षि विश्वामित्र के द्वारा श्री राम के रूपांतरण की कहानी “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में। मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l अगली कड़ी में जानिए महर्षि विश्वामित्र द्वारा तड़का वध के लिए राम को पुरस्कार स्वरुप दी गयी ब्रह्म शक्तियों के बारे में I
मानव है मेरे राम – Episode -68 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए कैसे विभीषण ने राम की सहायता की रावण का वध करने में | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -41 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए क्यों राम और सुग्रीव की पीड़ा एक सामान है || मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -10- Dr. Pradeep Dixit
जानिए किस तरह राम ने अपनी नेतृत्व कुशलता से अयोध्या में होने वाले जन विद्रोह को रोका । “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
Shrimad Bhagwat Gita adhyay-6 By Sri Anup Jalota
Credit: International Gita society
मानव है मेरे राम – Episode -35 – Dr. Pradeep Dixit
मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
Maa Chandraghanta
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा होती है।चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय है।चेहरा शांत एवं सौम्य है और मुख पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही होती है। माता के सिर पर अर्ध चंद्रमा मंदिर के घंटे के आकार में सुशोभित हो रहा जिसके कारण देवी का नाम चन्द्रघंटा हो गया है।अपने इस रूप से माता देवगण, संतों एवं भक्त जन के मन को संतोष एवं प्रसन्न प्रदान करती हैं। मां चन्द्रघंटा अपने प्रिय वाहन सिंह पर आरूढ़ होकर अपने दस हाथों में खड्ग, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र,धनुष, भरे हुए तरकश लिए मंद मंद मुस्कुरा रही होती हैं। इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं। इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए। इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। इसलिए हमें चाहिए कि मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विहित विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करना चाहिए। इससे सारे कष्टों से मुक्त होकर सहज ही परम पद के अधिकारी बन सकते हैं। यह देवी कल्याणकारी है।मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जन्म-जन्म का डर समाप्त हो जाता है और जातक निर्भय बन जाता हैं।
Chants credit- Jyoti upreti sati
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