वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
शिवोऽहम् साहित्यिक मंच के माध्यम से आइये आराधना करते हैं आदिशक्ति माँ भगवती की ईश आस्था के साथ कि महामारी के कठिन दौर में माँ अपना वरद हस्त हम सबके ऊपर बनाये रखें और पूरे भारतवर्ष को ही नहीं वरन पूरे विश्व को आपदा से निपटने की शक्ति प्रदान करें।
हम सुनेंगे श्री दुर्गा सप्तशती का हिंदी काव्यानुवाद और साथ ही शक्ति मंत्रों की व्याख्या डॉ मधु चतुर्वेदी जी के साथ पूरे नवरात्र लगातार।
आज पहली कड़ी और पहला अध्याय।
Shrimad Bhagwat Gita adhyay-14 By Sri Anup Jalota
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मानव है मेरे राम – Episode -78 – Dr. Pradeep Dixit
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Shrimad Bhagwat Gita adhyay-15 By Sri Anup Jalota
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मानव है मेरे राम – Episode -56 – Dr. Pradeep Dixit
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श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 16
दैवासुर सम्पद्विभाग योग
मनुष्य के भीतर दो प्रकार की प्रवृत्तियाँ होती हैं—दैवी और आसुरी।
भगवान श्रीकृष्ण गीता के इस महत्वपूर्ण अध्याय में इन दोनों स्वभावों का विस्तार से वर्णन करते हैं।
दैवी गुण जैसे निडरता, सत्य, करुणा, क्षमा, विनम्रता और आत्मसंयम मनुष्य को उन्नति, शांति और मोक्ष की ओर ले जाते हैं। वहीं अहंकार, क्रोध, लोभ, छल, हिंसा और असत्य जैसी आसुरी प्रवृत्तियाँ व्यक्ति को दुःख, अशांति और पतन की ओर धकेलती हैं।
यह अध्याय हमें स्वयं के भीतर झाँकने का अवसर देता है और बताता है कि जीवन में वास्तविक सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि हमारे चरित्र और आचरण से निर्धारित होती है।
🎧 सुनिए “श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 16 : दैवासुर सम्पद्विभाग योग” और जानिए कि दैवी गुणों को अपनाकर तथा आसुरी प्रवृत्तियों से बचकर हम अपने जीवन को कैसे अधिक सार्थक, शांत और उद्देश्यपूर्ण बना सकते हैं।
केवल Gaatha पर।
हर श्लोक में जीवन का एक नया दृष्टिकोण। 🙏📖
Shrimad Bhagwat Gita adhyay-18 By Sri Anup Jalota
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