गुरुत्वाकर्षण से परे वो चली जा रही थी ऊपर… बहुत ऊपर… पा गयी थी वो “महामुक्ति”… आज देह के साथ उसकी आत्मा भी मुक्त हो गयी थी।कहानी एक मध्यमवर्गीय लड़की ललिता की है जिसकी मृत्यु हो चुकी है |किंतु आज उसकी रूह वह सब देख रही है जो उसने जीते जी कभी नहीं देखा क्या ललिता की रूह को मुक्ति मिल पाएगी ?जानने के लिए सुनते हैं कहानी महामुक्ति ,अंजू जेटली की आवाज में
अनजान,अजीब सी लडकी …जो अक्सर लाल स्कार्फ बांधे रहती…..कभी कभी काला भी… लड़की जब घरौंदे बनाती तो लाल स्कार्फ पहनती और जब उनको मिटाती तो काला आखिर क्या राज है इसके पीछे ?जानने के लिए सुनते हैं कहानी लाल स्कार्फ वाली लड़की ,अंजू जेटली की आवाज में
जिद पर अड़े बच्चे को समझाना बच्चों का खेल नहीं इस बात को बीरबल ने अकबर को किस प्रकार समझाया? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अंजू जेटली की आवाज में
वह एक दिन हीरा मंडी का रास्ता चौबारा छोड़ कर शाहर के सबसे बड़े होटल फ्लैटी में आ गयी थी। वही शहर था, पर सारा शहर जैसे रातों रात उसका नाम भूल गया हो, सबके मुंह से सुनायी देता था -शाह की कंजरी। गजब का गाती थी। कोई गाने वाली उसकी तरह मिर्जे की सद नहीं लगा सकती थी। इसलिये चाहे लोग उसका नाम भूल गये थे पर उसकी आवाज नहीं भूल सके| शाह की कंजरी के नाम से जाने वाली नीलम महफिलों में गाने बजाने एक युवती है शाहनी जी के बड़े बेटे की शादी में उसे बुलाया जाता है तब शाहनी नीलम के साथ किस प्रकार का बर्ताव करती है अमृता प्रीतम के द्वारा लिखी गई कहानी शाह की कंजरी में …
मंगल भंगी भूँगी दाई का बेटा है ,जबकि सुरेश जमीदार बाबू महेशनाथ का बेटा है |एक समय भूँगी ने अपने बेटे मंगल से ज्यादा सुरेश को अपना दूध पिला कर उसकी देखभाल की, किंतु क्या भूँगी की मृत्यु के बाद मंगल को जमीदार महेश नाथ के यहां से अपनी मां द्वारा सुरेश को पिलाया दूध का दाम मिल पाता है या फिर उसे एक अछूत के रूप में देखा जाता है| प्रेमचंद जी की बेहद भावपूर्ण कहानी है दूध का दाम, जिसे आवाज दी है सुमन वैद्य जी ने
किसी सजातीय -विजातीय जीव से मेल ना रखने के कारण माली ने उस खरगोश का नाम लड़ाकू रखा। मेरी शिष्याओ ने उसके कट खन्ने स्वभाव के कारण उसे दुर्मुख पुकारना आरंभ किया , और मैंने दुर्वासा की संज्ञा से विभूषित किया । उसका मिलना भी एक दुर्योग ही कहा जाएगा । पड़ोस के दंपति ने खरगोश का एक जोड़ा पाल रखा था। एक रात मार्जारी ने दोनों खरगोश और उनके तीन बच्चों को क्षत-विक्षत कर डाला। केवल एक शशक- शिशु जीवित बचा, जिसे हमारा माली मेरे घर ले आया। मैं उसके अकेलेपन को दूर करने के लिए एक शशक- वधू खरीद लाई। किंतु दुर्मुख ने उसे स्वीकार नहीं किया , परंतु कुछ महीनों के अंतराल में उसकी कलहप्रियता में कुछ अंतर दिखाई पड़ा।
दर्पण – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कितने ही वर्तमान के अरमानों को कुचल कर ,इंसान भविष्य की इमारत बनाने की इच्छा तो रखता है किंतु क्या यह सच नहीं है कि जब भविष्य में जब उन इच्छाओं के पूरा होने का क्षण आता है तब तक उस इच्छा का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। ऐसा ही कुछ हो रहा है नायिका बानी के साथ। बानी जब तक मां-बाप के साथ थी तो उनके कड़े अनुशासन के कारण अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं का दमन करना पड़ता था ।आज जब बानी शादीशुदा है तो पति के नियमों के चलते उसे फिर अपनी इच्छाओं पर मौन का चोला पहनाना पड़ रहा है। इतने वर्षों के बाद जब उसकी छोटी-छोटी इच्छाओं का सम्मान किया जा रहा है तो वह क्यों उत्साह विहीन हो चुकी है ?बेहद भावुक कर देने वाली ममता कालिया की कहानी है दर्पण, जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
मनोहर लाल जब मंत्री बने तो उन्होंने जनता के सामने जिन बातों का वादा किया |क्या वह खुद उन बातों पर अडिग रहे? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सुभाष नीरव के द्वारा लिखी गई कहानी रंग परिवर्तन ,शिवानी आनंद की आवाज में
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