शुरु से तो वह जानती थी कि यह जो छोटा सा अनाकर्षक मगर भला सा चेहरा है, वह सच नहीं एक घुटा हुआ साईकियाट्रिस्ट है, उसे पता है, विवाहित महिलाओं की ग्रंथियां, मन की जरूरतें।कहानी की नायिका 45 वर्ष की शादीशुदा महिला है |उसकी दोस्ती एक पुरुष साईकियाट्रिस्ट से हो जाती है | किंतु अब नायिका को को महसूस हो रहा है कहीं ना कहीं मन में एक खेद का रेशा अटका पड़ा है, नायिका ऐसा क्यों सोच रही है क्या है इसके पीछे की कहानी| जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ के द्वारा लिखी गई कहानी खेद का रेशा अटका, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
यह कहानी एक सांवली सी लड़की फिरदौस की है और फरजाना उसकी अन्य दो बहने गोरी और सुंदर है सब की शादियां खूब धूमधाम से होती है उन्हीं की एक बड़ी बहन है फिरदौस कद काठी नाक नक्श अच्छे हैं किंतु सांवला रंग |घर के कामों में वह निपुण है किंतु उदासीन और सहमी सहमी रहती है उसका सांवला रंग उसके व्यक्तित्व को उदासीन बना रहा है क्या उसके जीवन में भी खुशियां आती हैं पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ के द्वारा लिखी गई कहानी एक सांवली सी परछाई पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
कहानी में लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ द्वारा एक प्रश्न उठाया है क्या दहेज की समस्या केवल लड़के वाले खड़ी करते हैं? कहानी सुनकर इस बात की सार्थकता जानते हैं पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
पत्नि के भाग्य से जुड पति का भाग्य प्रखर होता है। मीनू तू भाग्यलक्ष्मी है मीनू जब मात्र 19 वर्ष की थी तब अपने से उम्र में काफी बड़े साइंटिस्ट विलास जी से उसका विवाह करा दिया गया था | शादी से पूर्व मीनू इस बेमेल विवाह से खुश नहीं थी | किंतु क्या हुआ विवाह के उपरांत मीनू के साथ? क्या वे उस घर की भाग्यलक्ष्मी बन पाई? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ द्वारा लिखी गई कहानी भाग्य लक्ष्मी ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
70 वर्षीय विधुर रिटायर लेफ्टिनेंट केशव शर्मा की मित्रता अपने ही जैसे मिस्टर कण्णन के साथ हो जाती है| वे वे एक दूसरे के साथ गोल्फ खेलते ,बातें करते और अच्छा समय बिताते | वे एक-दूसरे के बेहद अंतरंग मित्र बन जाते हैं |केशव पूरे सप्ताह मिस्टर कण्णन से नहीं मिल और उनके बारे में कोई समाचार नहीं प्राप्त कर पाते तो वह बेहद व्यग्र हो जाते हैं |क्या हुआ था मिस्टर कण्णन को ?क्या यह मित्रता और प्रगाढ़ हो पाएगी? जानते हैं मनीषा को श्रेष्ठ द्वारा लिखी गई कहानी अंतरंग , पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
गीति और अनिरुद्ध का प्रेम विवाह हुआ था, किंतु आज एक जरा सी बात पर दोनों का जमकर झगड़ा हुआ| गीति इस झगड़े के बाद अनिरुद्ध का घर छोड़ने का निर्णय कर लेती है किंतु कहानी के एक प्रसंग में गीति अपने निर्णय पर विचार करने लग जाती है |क्या है कहानी का वह प्रसंग जो गीति को अपने निर्णय को बदलने पर मजबूर कर देता है |क्या होगा गीति और अनिरुद्ध के वैवाहिक का ?जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ द्वारा लिखी गई कहानी टिटहरी ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में….
कुंभ मेला, विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन, भारत की संस्कृति और आस्था की अद्भुत मिसाल है। इसकी शुरुआत पौराणिक कथा से होती है, जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत कुंभ को लेकर देवता और असुरों के बीच संघर्ष हुआ। उस संघर्ष के दौरान अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरीं। इन चार स्थानों पर ही आज कुंभ मेले का आयोजन होता है।
हर 12 साल में लाखों श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों पर स्नान कर अपने पापों से मुक्ति पाने और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने आते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह भारत की विविधता और एकता का प्रतीक भी है।
आइए, इस अद्भुत परंपरा को समझें और गर्व करें अपनी सांस्कृतिक धरोहर पर।
70 वर्षीय विधुर रिटायर लेफ्टिनेंट केशव शर्मा की मित्रता अपने ही जैसे मिस्टर कण्णन के साथ हो जाती है| वे वे एक दूसरे के साथ गोल्फ खेलते ,बातें करते और अच्छा समय बिताते | वे एक-दूसरे के बेहद अंतरंग मित्र बन जाते हैं |केशव पूरे सप्ताह मिस्टर कण्णन से नहीं मिल और उनके बारे में कोई समाचार नहीं प्राप्त कर पाते तो वह बेहद व्यग्र हो जाते हैं |क्या हुआ था मिस्टर कण्णन को ?क्या यह मित्रता और प्रगाढ़ हो पाएगी? जानते हैं मनीषा को श्रेष्ठ द्वारा लिखी गई कहानी अंतरंग , पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
कुंभ में नागा साधुओं की अनोखी भूमिका
कुंभ मेला केवल आस्था और अध्यात्म का पर्व नहीं, यह नागा साधुओं के साहस, तपस्या और अनूठे जीवन का अद्भुत दर्शन भी है।
नागा साधु:
आत्मसंयम और त्याग के प्रतीक
कठिन तपस्या और ब्रह्मचर्य का मार्ग
आंतरिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति का स्रो
एक जेबकतरे के द्वारा इंसानियत का परिचय देना , इस कहानी को और भीभावुक बनाती है कैसे? जानते हैं ज्ञानप्रकाश विवेक द्वारा लिखी गई कहानी जेबकतरा , पूजा श्रीवास्तव की आवाज में आवाज में
फुलवा मात्र मात्र 10 साल की मासूम बच्ची है |जिसके साथ मुखिया के पोते ने बलात्कार किया है| कहानी में फुलवा के अपराधी को सजा दिलाने की जद्दोजहद में उससे बार-बार उसे बार-बार उस बात का स्टेटमेंट लिया जाता है |मासूम फुलवा स्टेटमेंट और बलात्कार जैसी बातों से अनभिज्ञ है| स्टेटमेंट के नाम पर मासूम फुलवा के साथ साथ क्या हो रहा है ?दिल को झकझोर देने वाली रश्मि की कहानी स्टेटमेंट, सुनते हैं निधि मिश्रा के द्वारा
एक युवक अविनाश अवस्थी जो कि पुलिस में अधिकारी है, 8 वर्ष की आयु से अपनी विधवा मां पर किए गए समाज द्वारा शोषण को देखकर उसकी मानसिक स्थिति एक आक्रोश में तब्दील हो जाती है |वह किस प्रकार उस समाज से इस बात का बदला लेता है |इसे जानने के लिए सुनते हैं कहानी “मां “…..
राब की करामात एक हास्य कहानी है। सुनिए ससुराल मे एक शर्मीले दामाद जी का क्या हाल हुआ जब उन्हें राब यानी की खीर बहुत पसंद आ गयी !!
सन 1946 में हुए हिंदू-मुस्लिम दंगों पर आधारित यह कहानी कोलकाता शहर की है। स्त्रियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार और भेदभाव से संतृप्त हैं उनका तिरस्कार और निरादर होता है। समाज में फैली इस विकृति को देखकर -सुनकर मन व्यथित हो जाता है
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