खंडू भाई देसाई का जन्म 23 अक्टूबर, 1898 ई. को गुजरात के वलसाड ज़िले में हुआ था। वलसाड में आरंभिक शिक्षा के बाद वे मुम्बई के विलसन कॉलेज में भर्ती हुए। परंतु 1920 में महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन में कॉलेज का बहिष्कार करके बाहर आ गए।
भारतीय वायु सेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी और पहली उड़ान 1 अप्रैल 1933 को भरी थी। भारतीय वायु सेना को आजादी से पहले ‘रॉयल इंडियन एयर फोर्स’ के नाम से जाना जाता था। आजादी के बाद 1950 में इसके नाम से रॉयल शब्द हटा दिया गया था। भारतीय वायु सेना ने 1933 में पहली बार उड़ान भरी थी।
स्वर्गीय चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा सामाजिक समानता के प्रबल पक्षधर थे, उनके प्रयासों के चलते इस बांध का निर्माण संभव हुआ। 22 अक्टूबर 1963 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस बांध को राष्ट्र को समर्पित किया।
स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र गढ़वाली अपने सांप्रदायिक सौहार्द के लिए मशहूर रहे। जब अंग्रेजों ने निहत्ते पठानों पर गोली चलाने का आदेश दिया तो वीर चंद्र गढ़वाली ने गोली चलाने से मना किया तो इन्हें फांसी की सज़ा ब्रिटिश हुकूमत ने सुना दी। ‘पेशावर कांड के नायक’ के रूप में प्रसिद्ध वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की स्मृति में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना की शुरुआत की गई।
अपना पूरा जीवन भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित करने वाले लाला हर दयाल माथुर एक प्रसिद्ध भारतीय क्रांतिकारी थे ।उन्होंने प्रसिद्ध क्रांतिकारी ‘ग़दर पाटी’ का गठन किया। देशभक्ति के साथ साहित्य के क्षेत्र में उनका अहम योगदान रहा। बौद्ध संस्कृति साहित्य पर उनको ‘डॉक्टरेट’ की उपाधि से सम्मानित भी किया गया।
शांति घोष का जन्म 22 नवंबर, 1916 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था| उनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ घोष था, जो प्रोफेसर और राष्ट्रवादी थे इसलिए शांति घोष पर बचपन से ही राष्ट्रभक्ति का प्रभाव था| वह बचपन से ही क्रांतिकारियों के बारे में पढ़ा करती थीं इसलिए उनका रुझान स्वतंत्रता आंदोलन की तरफ बढ़ने लगा|
वक़्त के महेत्वा को दर्शाती हुई मेरी ये छोटी से कहानी ‘गुन्हेगार’ है।
महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती, भारतीय सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक, 30 अक्टूबर 1883 को अजमेर, राजस्थान, भारत में अपने आश्रयस्थल में निधन हुआ था। उन्होंने आर्य समाज की स्थापना की और अपने जीवन के दौरान भारतीय समाज के सुधार और सामाजिक परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्ध रहे।स्वामी दयानंद सरस्वती की दिशा में अर्थनीति, सामाजिक न्याय, और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान किया गया और उनका योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरणास्त्रोत रहा।
Credit: Josh Talk
हजूर नौकरी करता हूं, जान दे कर सरकार का नमक हलाल कर सकता हूँ पर ईमान नहीं बेच सकता,सरकार मालिक है। मैंने गद्दारी नहीं की, है………. नहीं की, लेकिन खुदा के रूबरू दरोगहलफी करके आकबत नहीं बिगाड़ सकता। यहाँ आप मालिक है, वहाँ वो मालिक है…। ऐसा कुछ कहानी का नायक उबेद कह रहा है | जो बचपन से बस यही सोचता था की मेहनत और सब्र का फल एक दिन मिलेगा ,खुदा सब कुछ देखता है किंतु क्या वाकई उसकी यह सोच सही साबित हुई? क्या वह अपने जीवन की कशमकश में कभी ऐसे मुकाम पर पहुंचा ,जहां उसे वाकई खुदा की मदद मिली हो| पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं यशपाल जी के द्वारा लिखी गई कहानी खुदा की मदद, नयनी दीक्षित की आवाज में…
Reviews for: Khandubhai Kasanji Desai- 23 Oct