दीपक के पाँच संदेश – भाग 2
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
क्या आप जानते हैं कि जीवन में बड़ी सफलता कहाँ छुपी होती है और हमें वह कैसे प्राप्त होती है? इस संदर्भ में सुनते हैं संदीप द्विवेदी को…
दीपक के पाँच संदेश – भाग 5
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
क्या आप जानते हैं कि जिस परीक्षा के नाम से हम सभी को इतना भय लगता है ,असल में परीक्षा की वह प्रक्रिया हमारी जिंदगी में कौन सा गुण विकसित करती है ? निश्चित तौर पर संदीप द्विवेदी के द्वारा पास- फेल से ऊपर परीक्षा का उद्देश्य को सुनकर , परीक्षा को लेकर भय की स्थिति पर भी एक सकारात्मक बदलाव महसूस करेंगे…
विपरीत परिस्थितियों में जब सारे रास्ते बंद हो जाए ,ऐसे में आपको उन परिस्थितियों से कौन बाहर निकाल सकता है? इसके बारे में क्या कहते हैं संदीप द्विवेदी…
कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह (श्री पीरू सिंह शेखावत भी) (20 मई 1918 – 18 जुलाई 1948) भारतीय सैनिक थे। उनका 1947 के भारत-पाक युद्ध में निधन हुआ। उन्हें 1952 में मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया जो शत्रु के सामने वीरता प्राप्त करने के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च भारतीय सम्मान है।
कुमाऊं रेजीमेंट की 13वीं बटालियन, जिसमें 123 वीर जवान थे, भारत-चीन 1962 युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए एक महान योद्धा, मेजर शैतान सिंह भाटी के नेतृत्व में, उच्च शिखरों पर भयंकर मुश्किलों का सामना किया। उनकी अद्वितीय साहस, प्रेरणादायक नेतृत्व और अनन्त बलिदान ने चीनी सैनिकों को अंधेरे में डाल दिया। मेजर शैतान सिंह को आखिरी सांस तक हारने का सोचना तक नहीं था, और उन्होंने दुश्मनों को उल्टे पैर भागते देखा। उन्हें इस अद्वितीय पराक्रम के लिए परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
दीपक के पाँच संदेश – भाग 3
दिवाली पर संदीप द्विवेदी के पाँच संदेश.
देश के पहले गैर राजनीतिज्ञ राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्दुल कलाम, जिनको उनके विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा। भारत के मिसाइल मैन के नाम से जाने जाने वाले अब्दुल कलाम जी ने मिसाइल प्रणाली को उड़ान दी। ‘पद्म भूषण’ और ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित होने वाले वह एक पहले ऐसे राष्ट्रपति बने जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पूर्व ही ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया गया।
दुःशासन द्रौपदी के बाल खींचकर भरी सभा में ले आता है और उसे अपमानित करना चाहता है। तब द्रौपदी बड़े साहस एवं निर्भीकता के साथ दुःशासन को निर्लज्ज और पापी कहकर पुकारती है।द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी जी ने इस खंडकाव्य को जितने प्रभावी ढंग से वर्णन किया है ,उतने ही प्रभावी ढंग से नयनी दीक्षित ने आवाज दी है
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