मिथ्याभिमान – Alka Saini (अल्का सैनी ) – Shivani Anand
सभी अनामिका की योग्यता से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते। किंतु उसका पति जयंत उसकी योग्यता की उड़ान को क्यों पिंजरे में बंद रखना चाहता है ?अनामिका क्यों ऐसा महसूस कर रही है कि जैसे उसके पति ने उसकी उड़ान को रोकने के लिए उसके पंख काट दिए हैं और फिर से वह आसमान से ज़मीन पर आ गिरी हो । जानिए इसके पीछे की कहानी अलका सैनी के द्वारा लिखी गई कहानी मिथ्याभिमान शिवानी आनंद की आवाज़ में..
कसक – Alka saini (अल्का सैनी ) – Shivani Anand
शादी के बाद गरिमा ने पूरी कोशिश की अपने को ससुराल के वातावरण में ढाल लेने की और इसके लिए उसने कोई कसर नहीं छोड़ी ,सबका दिल भी जीत लिया। घर और ऑफ़िस दोनों का काम करके उसे ऐसा महसूस होता था जैसे कि वह एक मशीन बन गई है ।मनीष गरिमा को हमेशा एक आदर्श बीबी, आदर्श बहू के रूप में देखना चाहता है किंतु क्या मनीष भी एक आदर्श पति के रूप में गरिमा के सामने अपने आपको रख पाया है ?क्या कभी मनीष पति होने के नाते गरिमा की भावनाओं को वह समझ पाया है ?क्या है पूरी कहानी जानते हैं शिवानी आनंद की आवाज़ में अलका सैनी के द्वारा लिखी गई कहानी कसक में…
असली पूँजी – Alka saini (अल्का सैनी ) – Shivani Anand
जिज्ञासा और अनीता कॉलेज के दिनों की बहुत पक्की सहेलियां हैं जिज्ञासा शुरू से पढ़ाई में तेज रही है और उसने अनीता की हमेशा पढ़ाई में मदद किया| जिज्ञासा शादी के बाद अपने पति और अपने एक बेटी के साथ अपने घर गृह गृहस्थी में बहुत खुश है किंतु जब वह आज अपनी बेटी के कॉलेज में अपनी पक्की दोस्त अनीता को प्रिंसिपल के रूप में देखकर अपने को उसके आगे हीन समझने लगी। किंतु क्या अनीता की ज़िंदगी को जानने के बाद उसे समझ में आता है कि जीवन की असली पूंजी क्या होती है? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अलका सैनी के द्वारा लिखी गई कहानी असली पूंजी, शिवानी आनंद की आवाज़
हमदर्दी – Alka saini (अल्का सैनी ) – Shivani Anand
एक अमीर आदमी बिना ज़रूरत के भी अपने ऊपर हजारों- लाखों रुपयों को बेमतलब में ख़र्च कर देता है किंतु किसी गरीब की एक छोटी सी मदद करने के लिए क्यों उसके हाथ सिकुड़ जाते हैं? अमीरी -गरीबी के रिश्तो को समझाती हुई अलका सैनी की एक कहानी हमदर्दी सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज़ में…
Do navo ki sawaari (दो नावों की सवारी) – Alka saini (अल्का सैनी ) – Shivani Anand
प्रेम की अलग-अलग अनुभूति होती है प्रेम मीरा और कृष्ण के मध्य भी था कहानी कुछ इसी तरह के भावों को आधुनिक समीकरण के रूप में ढाल दिया गया है कहानी का नायक अभिनव एक शादीशुदा युवक है जिसकी मित्रता अनीता के साथ हो जाती है ।उनकी मित्रता में एक अजीब सी आत्मीयता और लगाव है किंतु जैसे-जैसे अभिनव को सामाजिक मान मर्यादा की तरफ ध्यान आकर्षित होता है उसके अंदर अजीब सी बेचैनी उत्पन्न हो जाती है ।अभिनव की यह बेचैनी उसे किस हद तक ले जाएगी? जानेंगे अलका सैनी के द्वारा लिखी गई कहानी दो नावों में सवार, शिवानी आनंद की आवाज़ में..
एक औरत यह सोचने पर क्यों विवश हो जाती है कि आखिर उसका एक औरत होने के नाते उसका वजूद क्या है ?आज चेतना भी यही सोचने को विवश है जब तक मां-बाप के साथ थी, तब तक उन पर निर्भर थी और आज अपने पति पर निर्भर है। आखिर चेतना ऐसा सोचने के लिए क्यों मज़बूर है ? चेतना के साथ क्या घटित हुआ ?जानिए अलका सैनी के द्वारा लिखी गई कहानी वज़ूद में शिवानी आनंद की आवाज़ में..
अर्जुन पुत्र अभिमन्यु की मृत्यु के समय, अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा गर्भ से थी और अभिमन्यु की मृत्यु के पश्चात उत्तरा ने एक बालक परीक्षित को जन्म दिया | परीक्षित के जन्म की क्या कथा है और परीक्षित इतिहास में अपने किन गुणों के लिए जाने जाते हैं ?इस पूरी कथा को सुनने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी परीक्षित के जन्म की कथा, शिवानी आनंद की आवाज में…
बाँकुड़ा में रहने वाली एक लड़की अन्नपूर्णा शादी के बाद मुंबई जा बसी है |आज 1 साल के बाद हो अपने मां -बापू को खत लिख रही है| बचपन में बरसात के आने पोखर पर जाकर के केंचुओं को मार देती थी जो उसके लिए आनंद का कार्य था किंतु आज वही अन्नपूर्णा को बरसात अच्छी नहीं लगती और केंचुओं से उसे डर लगता है क्यों ? ऐसा क्या हो गया अन्नपूर्णा के साथ जो उसके लिए जो आनंद था आज मैं उसका भय का कारण हो गया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सुधा अरोड़ा के द्वारा लिखी गई कहानी अन्नपूर्णा मंडल की आखिरी चिट्ठी, शिवानी आनंद की आवाज में…
द्यूत क्रीड़ा में युधिष्ठिर के द्वारा द्रौपदी को भी दाँव लगाने के पश्चात, हार जाने के पश्चात, दुर्योधन ने अपने अनुज भाई दुशासन से से भरी सभा में द्रोपदी का चीर हरण करने का आदेश दिया |इसके उपरांत क्या हुआ?इस कथा को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी द्रौपदी चीर हरण ,शिवानी आनंद की आवाज में…
दर्पण – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कितने ही वर्तमान के अरमानों को कुचल कर ,इंसान भविष्य की इमारत बनाने की इच्छा तो रखता है किंतु क्या यह सच नहीं है कि जब भविष्य में जब उन इच्छाओं के पूरा होने का क्षण आता है तब तक उस इच्छा का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। ऐसा ही कुछ हो रहा है नायिका बानी के साथ। बानी जब तक मां-बाप के साथ थी तो उनके कड़े अनुशासन के कारण अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं का दमन करना पड़ता था ।आज जब बानी शादीशुदा है तो पति के नियमों के चलते उसे फिर अपनी इच्छाओं पर मौन का चोला पहनाना पड़ रहा है। इतने वर्षों के बाद जब उसकी छोटी-छोटी इच्छाओं का सम्मान किया जा रहा है तो वह क्यों उत्साह विहीन हो चुकी है ?बेहद भावुक कर देने वाली ममता कालिया की कहानी है दर्पण, जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
एक गरीब तेरह चौदह वर्ष के एक लड़के की कहानी जो अनाथ है। उस बच्चे की मनोदशा से अपरचीत कहने को सभ्य समाज द्वारा बेहद बुरा- बर्ताव किया जाता है उसे “मवाली” और”चोर” जैसे शब्दों से पुकारा जाता है । बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है इस कहानी को …….
“सूरत को नहीं सीरत को तवज्जो देना सीखें तभी शायद आप असली खूबसूरती का मतलब समझ पाएंगे।
द्रौपदी जब अपना शील खो रही थी , तब आप कहां थे कृष्ण ??? कृष्ण और उद्धव जी के बीच में चल रहे संवाद को उस संदर्भ मे उस प्रसंग को प्रेषित करता है जब धर्मराज युधिष्ठिर, दुर्योधन से द्युत क्रीडा में पराजित हो गए थे | भगवान श्री कृष्ण उसी संदर्भ में उद्धव को स्पष्टीकरण देते हैं | सुनते हैं इस संवाद को अमित तिवारी जी की आवाज में……
दीपा बहुत ही कम उम्र में विधवा हो जाती है दीपा के भाई भाभी उसके विधवा होने पर उसके श्रृंगार और पहनने ओढ़ने पास तंज कसते हैं समाज में विधवा होने पर नारी के प्रति लोगों के इस दृष्टिकोण को उजागर करती हुई कहानी है अनारकली
Reviews for: Mithyaabhimaan
Average Rating
tiwariamit
tiwariamit
project@project