कभी कभी हमारी आँखे कुछ ऐसा देखती है जिसके लिए दिमाग़ के पास कोई तर्क नहीं होता । क्या बच्चों ने जो देखा वो सच था ? जानिए भुपेंद्र डोंगरियल की लिखी कहानी “ रहस्य के सबूत नहीं “
क्या बड़ी उम्र में होने वाली शादी में
सपनों और भावनाओं की जगह नहीं बचती?
क्या विवाह सिर्फ़ ज़िम्मेदारियों,
समझौतों और ज़रूरतों का नाम भर है?
और क्या उम्र बढ़ जाने के साथ
मन का साथ, अपनापन और सम्मान चाहने का अधिकार भी खत्म हो जाता है?
अंजू इन्हीं सवालों के बीच अपनी ज़िंदगी जी रही थी।
उम्र बढ़ रही थी, इसलिए भाई ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए उसकी शादी दो बच्चों के विधुर पिता से कर दी।
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के बावजूद,
समझौते उसने भी किए…
लेकिन हर समझौते की एक सीमा होती है।
आख़िर ऐसा क्या हुआ
कि अंजू को अपने जीवन का सबसे बड़ा निर्णय लेना पड़ा?
कौन-सी बातें थीं
जिन्होंने उसके स्वाभिमान को भीतर तक झकझोर दिया?
🎧 सुनिए मालती जोशी की संवेदनशील और विचारोत्तेजक कहानी
“बहुरि अकेला” — केवल Gaatha पर।
कुंभ में नागा साधुओं की अनोखी भूमिका
कुंभ मेला केवल आस्था और अध्यात्म का पर्व नहीं, यह नागा साधुओं के साहस, तपस्या और अनूठे जीवन का अद्भुत दर्शन भी है।
नागा साधु:
आत्मसंयम और त्याग के प्रतीक
कठिन तपस्या और ब्रह्मचर्य का मार्ग
आंतरिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति का स्रो
जबसे निशीथ साथ चलते- चलते अचानक अजाने मोड पर मुड ग़या था तो ठिठक कर उस चौराहे पर उसके आस-पास फुरसत ही बाकि रह गई थी और एक अंधेरा खाली कोना। बस एक सप्ताह और वह उबर आई थी नई जीजिविषा के साथ.. एक आत्मनिर्भर आत्मविश्वासी लड़की के व्यक्तित्व मे एक चुंबकत्व होता है। केतकी रेडियो स्टेशन मे काम करती थी. खूबसूरत थी । बस अगर शादी नहीं करी तो लोगों को बाते बनाने का मौका मिल जाता है। जानिए नायिका केतकी के जीवन मे आने वाले कई उतार-चढ़ावों को और उसका हर बार परिस्थिति को हरा कर आगे बढ़ने की यात्रा , जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ की लिखी कहानी एक नदी ठिठकी सी”, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
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