देव शक्ति नाम के राजा के एक पुत्र के पेट में एक साँप चला जाता है और वह उसी के पेट में अपना बिल बना लेता है |जिस कारण राजकुमार का शरीर प्रतिदिन अस्वस्थ होता जा रहा है अब आगे क्या होता है राजकुमार के साथ ?पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी दो सांपों की कथा ,सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
कहानी का मुख्य पात्र नरेंद्र एक चित्रकार है |उसे कम समय में ही प्रसिद्धि इसलिए प्राप्त हो गई क्योंकि वह जो भी चित्र बनाता था उसमें अपनी सारी योग्यता लगा देता था |नरेंद्र को चित्रकारी में ऐसी महत्वाकांक्षा थी कि वह ऐसा चित्र बनाना चाहता था जिसमें उसकी भावनाएं और विचारों का अद्भुत संगम नजर आए|नरेंद्र को इस संदर्भ में एक कला प्रदर्शनी में चित्र बनाने का मौका प्राप्त हुआ, उस कला प्रदर्शनी के लिए नरेंद्र कौन सा चित्र बनाएं अमर हो जाए ऐसी महत्वाकांक्षा उस की चरम सीमा पर थी |कहानी के अंत में आखिर नरेंद्र ने ऐसा चित्र बनाया, जिससे वह अमर तो हो गया किंतु उस चित्र को बनाने के लिए उसने अपने जीवन की क्या कीमत चुकाई ? यह कहानी का बेहद मार्मिक प्रसंग है |जिसे जान सकते हैं रविंद्र नाथ ठाकुर के द्वारा लिखी गई कहानी अंतिम प्यार में, शिवानी आनंद की आवाज में….
विक्रमादित्य के द्वारा मृग के रूप में श्रापित राजकुमार को मृग रूप से मुक्ति दिला कर, पुनः राजकुमार को उसका राज्य वापस दिलाने की एक रोचक घटना है| जिसे सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी तीसवीं पुतली जयलक्ष्मी मृग रूप से मुक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में..
संसार की ओर देखने की जैसी हमारी दृष्टि होगी, संसार हमें वैसा ही दिखाई देगा।कैसे ? विनोबा भावे द्वारा लिखी गई कहानीजैसी दृष्टि सुनते हैं ,शिवानी आनंद के द्वारा
पांडु पुत्र अर्जुन ने जयद्रथ का वध करने की प्रतिज्ञा ली, किंतु गुरु द्रोणाचार्य ने ऐसे व्यूह की रचना की, कि उस दिन का युद्धयुद्ध खत्म होने की सीमा तक जयद्रथ अर्जुन के सामने नहीं आया| ऐसे में किस प्रकार अर्जुन की प्रतिज्ञा पूर्ण हो पाई एवं भीम पुत्र घटोत्कच एवं गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु किस प्रकार हुई ?महाभारत की इन रोचक प्रसंगों को सुनते हैं ,शिवानी आनंद की आवाज में…
समय द्वारा अपने मनोरंजन के लिए वायु. जल, अग्नि और कई प्रकार के जीवों के उपरांत मनुष्य के बनाए जाने की कथा।
पांडु जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर धर्मराज के रूप में विश्व में जाने जाते रहे हैं |कहानी में इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है| जब यक्ष के प्रश्नों का उत्तर युधिष्ठिर के अन्य भाई नहीं दे पाते हैं ,तो उन सबको मृत्यु प्राप्त हो जाती है किंतु युधिष्ठिर यक्ष के प्रश्नों के उत्तर देकर यक्ष को प्रसन्न कर देते हैं और अपना मनचाहा वरदान भी प्राप्त कर लेते हैं |कैसे? इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी यक्ष और युधिष्ठिर संवाद भाग -1 शिवानी आनंद की आवाज में …
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