धीरेंद्र अस्थाना के द्वारा लिखी गई एक कहानी जिसमें एक इंसान से जाने- अनजाने एक गलती हुई है जिसका उसे पश्चाताप भी है | उस गलती के कारण वह अपनों से नजर भी नहीं मिला पा रहा और आज उसकी उस गलती के कारण वह एक बड़ी बीमारी से ग्रसित हो चुका है |जिसे वह किसी को बता भी नहीं पा रहा है | ऐसे में वह इंसान क्या करें ?क्या वह इंसान घुट घुट कर यूं ही जीता रहे या फिर उसे फिर एक मौका मिलना चाहिए ?ऐसे ही प्रश्नों को लेकर कहानी का ताना-बाना बुना गया है सुनते हैं कहानी Meri Fernadis क्या तुम तक मेरी आवाज पहुंचती है? नयनी दीक्षित की आवाज में
हमारे समाज की कितनी बड़ी विडम्बना है की एक तरफ गरीब के सर पर छत नहीं और वहीं दूसरी तरफ हम धार्मिक स्थलों पर पानी के जैसे पैसा बहाते हैं। ऐसी ही कुछ बात कह रही है मेरी यह कहानी ‘ वो टपकती झोपडी ‘
सत्य की जीत के इस प्रसंग में द्रौपदी द्युत सभा में कौरवों के छल कपट से खेले जाने वाले द्युत क्रीड़ा का पुरज़ोर विरोध कर रही है समस्त धर्माचार्य भीष्म पितामह द्रोणाचार्य विदुर सहित सभी द्रोपदी का साथ देते हुए कौरवों के छल कपट का विरोध कर रहे हैं । द्वारिका प्रसाद महेश्वरी के द्वारा लिखी गई महाभारत में द्युत सभा का वर्णन नयनी दीक्षित की आवाज़ में
जीवन और मृत्यु – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
इंसान जब पैदा होता है तब यह आनंद की स्थिति होती है, लेकिन क्या जब इंसान मरता है तब भी क्या वह कुछ लोगों के लिए आनंद की स्थिति होती है? क्या जब इंसान मरता है तो क्या यह समाज़ अवसरवादिता में बदल जाता है ।कुछ ऐसे ही तर्ज़ पर है यह कहानी जीवन और मृत्यु और इसे लिखा है फ्रेंच लेखक guy de Maupassantने जो वास्तव में समाज़ के प्रति वास्तविक व्यंग है कि सदियों से मनुष्य समाज अपनी सहूलियत के चलते क्या किसी की मृत्यु का इंतजार भी कर सकता है? कहानी को जिस प्रकार बेहद चुटिले अंदाज़ में लिखा गया है वैसे ही नयनी दीक्षित ने उसी अंदाज़ में अपनी आवाज़ देकर कहानी को पेश किया है।
1983 मेंआज ही के दिन देश में पहली बार नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था। यह राष्ट्रमंडल देशों का सातवां शिखर सम्मेलन था। इसकी अध्यक्षता भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने की थी। यह सम्मेलन 29 नवंबर तक चला।
Reviews for: Interview with Acid Attack Survivor Laxmi Agarwal
Average Rating
gurpreetsinghbains13@yahoo.com
ani