चौथी पुतली कामकंदला की कथा से भी विक्रमादित्य की दानवीरता तथा त्याग की भावना का पता चलता है कैसे ?पूरी कहानी जानने के लिए के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानी सिंहासन बत्तीसी-चौथी पुतली कामकंदला शिवानी आनंद की आवाज में…
हरसुंदरी ने मां न बन पाने के कारण अपने पति निवारण का विवाह शेलबाला नाम की किशोरी से तो कर दिया पर उसे क्या पता था कि इसके बाद उसका जीवन इतनी मुश्किलों से भर जाएगा।
एक बार विजय नगर में बाढ़ आ गई | राहत के नाम पर मंत्री जी ने काफी सारा धन राजकोष से ले लिया |तेनालीरामा को मंत्री जी की के क्रियाकलापों से संशय उत्पन्न हुआ कि वह धनराशि जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचाई जा रही है| तेनालीरामा ने ऐसा क्या किया कि कृष्णदेव राय को भी सच्चाई का पता चल गया ?जानते हैं इस रोचक किस्से को तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी बाढ़ और बचाव ,शिवानी आनंद की आवाज में…
एक था नन्हा खरगोश, जिसेअपने लंबे कान अपने पूरे शरीर में सबसे अधिक पसंद थे, लेकिन एक दिन झाड़ियों में भेड़िए से बचते हुए उसके कान ज़ख्मी हो गए जिससे वह बेहद दुखी रहने लगा। लेकिन अपनी बहादुरी से उसने कुछ ऐसा किया की सभी उसे नन्हा बहादुर कहकर पहले से भी ज्यादा प्रेम करने लगे।
कहानी मैं एक स्कूल जाने वाला लड़का जब अपनी बहन के साथ गुड़िया की शादी का खेल खेलता है, तो उसके अध्यापक और सहपाठी उसका मजाक उड़ाते हैं और उसे ‘दुल्हन ‘कह कर बुलाते हैं| क्या होता है पूरी कहानी में ?जानने के लिए सुनते हैं रविंद्र नाथ ठाकुर के द्वारा लिखी गई कहानी दुल्हन “,शिवानी आनंद की आवाज में
राक्षसों के चंगुल से एक युवती को ,राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार अपने पराक्रम के द्वारा मुक्त कराया ?इसे जानने के लिए पूरी कहानी सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी से ली गई कहानी सिंहासन बत्तीसी-बारहवी पुतली – पद्मावती
विक्रमादित्य के राज्य में एक गरीब दरिद्र ब्राह्मण और भाट रहते थे |दोनों की पुत्रियों के विवाह के लिए उन दोनों के पास धनराशि नहीं थी | विक्रमादित्य ने दोनों की पुत्रियों के विवाह के लिए धन प्रदान किया| किंतु भाट को 1000000 स्वर्ण मुद्राएं ,जबकि ब्राह्मण को कुछ सौ स्वर्ण मुद्राएँ ही प्रदान की | विक्रमादित्य ने इस प्रकार का पक्षपात क्यों किया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी पच्चीसवीं पुतली त्रिनेत्री ईश्वर से आस ,शिवानी आनंद की आवाज में..
एक बार राजा विक्रमादित्य दरबार में बैठे थे और दरबारियों से बातचीत कर रहे थे। बातचीत के क्रम में दरबारीयों में इस बात पर बहस छिड़ गई कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से। बहस का अन्त नहीं हो रहा था, क्योंकि दरबारियों के दो गुट हो चुके थे। एक कहता था कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है क्योंकि मनुष्य का जन्म उसके पूर्वजन्मों का फल होता है। राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार प्रत्यक्ष उदाहरण देकर इस बहस का अंत किया? यह जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी की कहानी तेइसवीं पुतली धर्मवती मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से ,शिवानी आनंद की आवाज में …
राजा विक्रमादित्य जैसा न्यायप्रिय, दानी और त्यागी और कोई न था | राजा को एक बार दो व्यक्ति दिखाई दिए एक मानव मुण्डों की माला पहने बीभत्स दिखने वाला कापालिक है तथा दूसरा एक बेताल है |उन दोनों में किसके लिए द्वंद चल रहा है और राजा किस प्रकार निर्णय देते हैं इस रोचक कहानी को आवाज दी है शिवानी आनंद में..
विक्रमादित्य के सिंहासन की दूसरी पुतली चित्रलेखा द्वारा सुनाई गई कहानी जिसमें एक साधु विक्रमादित्य को एक फल देता है और उसे एक यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होने का वरदान देता है |क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में कहानी विक्रम और बेताल की कहानियों में से एक कहानी सिंघासन बत्तीसी -दूसरी पुतली चित्रलेखा
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