राजा विक्रमादित्य के परोपकारी होने का वृतांत इस कहानी में मिलता है| राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार अपनी महामंत्री की एकमात्र पुत्री के प्राणों की रक्षा करने हेतु असंभव से दिखने वाली परिस्थितियों को संभव किया और दुर्लभ ख्वांग बूटी लेकर आए जिससे उसके प्राणों की रक्षा की जा सकी? कैसे ??इस रोचक वृतांत जानते हैं सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी इक्कीसवीं पुतली चन्द्रज्योति विक्रमादित्य और दुर्लभ ख्वांग बूटी,शिवानी आनंद की आवाज में…
अर्जुन पुत्र अभिमन्यु की मृत्यु के समय, अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा गर्भ से थी और अभिमन्यु की मृत्यु के पश्चात उत्तरा ने एक बालक परीक्षित को जन्म दिया | परीक्षित के जन्म की क्या कथा है और परीक्षित इतिहास में अपने किन गुणों के लिए जाने जाते हैं ?इस पूरी कथा को सुनने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी परीक्षित के जन्म की कथा, शिवानी आनंद की आवाज में…
किसी झूठ की बार- बार पुनरावृत्ति होने पर ,वह सच की भांति प्रतीत होने लगता है किंतु ऐसे समय अपनी बुद्धि का प्रयोग करना अति आवश्यक हो जाता है| ऐसा ही कुछ उस ब्राह्मण के साथ होता हैजब वह अपनी बुद्धि का प्रयोग और अपने पर विश्वास ना करके ठगों के द्वारा ठगा जाता है | किस प्रकार?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी बकरा और ब्राह्मण, शिवानी आनंद की आवाज में…
राजा विक्रमादित्य ने एक बार अद्भुत- अलौकिक स्वप्न देखा| उस अद्भुत- अलौकिक सपने की उन्होंने ज्योतिषियों से अपने सपने की चर्चा की और उन्हें इसकी व्याख्या करने को कहा। सारे विद्वान और पण्डित इस नतीजे पर पहुँचे कि महाराजाधिराज ने सपने में स्वर्ग का दर्शन किया है तथा सपने का अलौकिक महल स्वर्ग के राजा इन्द्र का महल है। देवता शायद उन्हें वह महल दिखाकर उन्हें सशरीर स्वर्ग आने का निमन्त्रण दे चुके है। किंतु क्या वास्तव में सपने की सत्यता यही साबित हुई इसे जानने के सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी अट्ठाईसवीं पुतली वैदेही स्वर्ग की यात्रा, शिवानी आनंद की आवाज में…
एक बार राजा विक्रमादित्य दरबार में बैठे थे और दरबारियों से बातचीत कर रहे थे। बातचीत के क्रम में दरबारीयों में इस बात पर बहस छिड़ गई कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से। बहस का अन्त नहीं हो रहा था, क्योंकि दरबारियों के दो गुट हो चुके थे। एक कहता था कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है क्योंकि मनुष्य का जन्म उसके पूर्वजन्मों का फल होता है। राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार प्रत्यक्ष उदाहरण देकर इस बहस का अंत किया? यह जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी की कहानी तेइसवीं पुतली धर्मवती मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से ,शिवानी आनंद की आवाज में …
राक्षसों के चंगुल से एक युवती को ,राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार अपने पराक्रम के द्वारा मुक्त कराया ?इसे जानने के लिए पूरी कहानी सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी से ली गई कहानी सिंहासन बत्तीसी-बारहवी पुतली – पद्मावती
राजा विक्रमादित्य न सिर्फ अपना राजकाज पूरे मनोयोग से चलाते थे, बल्कि त्याग, दानवीरता, दया, वीरता इत्यादि अनेक श्रेष्ठ गुणों के धनी थे। वे किसी तपस्वी की भाँति अन्न-जल का त्याग कर लम्बे समय तक तपस्या में लीन रहे सकते थे। ऐसा कठोर तप कर सकते थे कि इन्द्रासन डोल जाए।विक्रमादित्य की कठिन साधना से किस प्रकार इंद्र का आसन भी डोल गया इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानी में से एक कहानी छब्बीसवीं पुतली मृगनयनी रानी का विश्वासघात ,शिवानी आनंद की आवाज में
एक बार राजा विक्रमादित्य के सलाहकारों ने बताया कि पाताल लोक के राजा शेषनाग का ऐश्वर्य देखने लायक है| विक्रमादित्य ने सशरीर पाताल लोक जाकर उनसे भेंट करने की ठान ली |जब वह पाताल लोक पहुंचे तो शेषनाग उनके व्यवहार से अति प्रसन्न हुए और भेंट स्वरूप अलग-अलग खूबियों वाले चार बहुमूल्य रत्न उन्हें दिए |अब वापस मृत्युलोक पर लौटने पर राजा विक्रमादित्य ने उन बहुमूल्य बहुमूल्य रत्नों का क्या किया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सोलहवीं पुतली सत्यवती राजा विक्रमादित्य और पाताल लोक की यात्रा, शिवानी आनंद की आवाज में..
Reviews for: Sinhasan Battisi – twentyone Putli chandrajyoti (सिंहासन बत्तीसी -इक्कीसवीं पुतली – चन्द्रज्योति)