राजा विक्रमादित्य के परोपकारी होने का वृतांत इस कहानी में मिलता है| राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार अपनी महामंत्री की एकमात्र पुत्री के प्राणों की रक्षा करने हेतु असंभव से दिखने वाली परिस्थितियों को संभव किया और दुर्लभ ख्वांग बूटी लेकर आए जिससे उसके प्राणों की रक्षा की जा सकी? कैसे ??इस रोचक वृतांत जानते हैं सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी इक्कीसवीं पुतली चन्द्रज्योति विक्रमादित्य और दुर्लभ ख्वांग बूटी,शिवानी आनंद की आवाज में…
विवाह एक ऐसा बंधन है जिसमें बंधकर हर लड़की को अपने प्रियजनों से विदा लेनी पड़ती है। हेम भी इसी बंधन में बंध कर अपने पिता से दूर अपने ससुराल चली आई थी किंतु तब ये किसने जाना था कि यह विदा एक दिन अनंत कालीन विदा बन जाएगी।
एक बार विजय नगर में बाढ़ आ गई | राहत के नाम पर मंत्री जी ने काफी सारा धन राजकोष से ले लिया |तेनालीरामा को मंत्री जी की के क्रियाकलापों से संशय उत्पन्न हुआ कि वह धनराशि जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचाई जा रही है| तेनालीरामा ने ऐसा क्या किया कि कृष्णदेव राय को भी सच्चाई का पता चल गया ?जानते हैं इस रोचक किस्से को तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी बाढ़ और बचाव ,शिवानी आनंद की आवाज में…
जयकाली देवी जिसके पौरुष से लोग भय खाते थे और उससे सामने कुछ भी कहने से डरते थे। जो अपने मंदिर की स्वच्छता को सब चीजों से ऊपर रखती थी उसके अपने मंदिर में एक शूकर को स्थान देने सी सभी हैरान थे।
कहानी की मुख्य नायिका शशिकला है |जिसका विवाह जयगोपाल बाबू से हुआ है |शशिकला अपनी पिता की एकमात्र लाडली लड़की थी |जयगोपाल वास्तव में एक साधारण सी नौकरी करते हैं किंतु भविष्य को लेकर निश्चिंत है यह सोचकर उसके ससुर के पास पर्याप्त चल- अचल संपत्ति है, जो अंत में उसकी ही हो जाएगी| यहां कहानी में एक नया मोड़ आता है शशिकला की वृद्ध पिता के यहां पुत्र का जन्म होता है| जयगोपाल बाबू की सारी आशाएं चकनाचूर हो जाती है| इधर शशि के मां-बाप दोनों की मृत्यु हो जाती है शशि अपने छोटे नाबालिक अनाथ भाई की देखभाल करना चाहती हैं किंतु पति और भाई दोनों के बीच चल रहे अपने मानसिक द्वंद में बुरी तरह से उलझ कर रह जाती है| कहानी में आगे क्या घटित होता है इसे जान ने के लिए सुनते हैं रविंद्र नाथ ठाकुर के द्वारा लिखी गई कहानी अनाथ, जिसे आवाज दी है शिवानी आनंद ने..
चौथी पुतली कामकंदला की कथा से भी विक्रमादित्य की दानवीरता तथा त्याग की भावना का पता चलता है कैसे ?पूरी कहानी जानने के लिए के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानी सिंहासन बत्तीसी-चौथी पुतली कामकंदला शिवानी आनंद की आवाज में…
राजा विक्रमादित्य अद्भुत कला-पारखी थे। एक आदमी ने अद्भुत कारीगरी का काठ का घोड़ा विक्रमादित्य को महंगे दाम में बेचा | आगे क्या हुआ पूरा जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में कहानी सिंहासन बत्तीसी-आठवीं पुतली पुष्पवती
अचानक एक दिन राजा विक्रमादित्य को एक औरत के रोने की आवाज सुनाई दी राजा उसकी मदद हेतु उसी दिशा में चल दिया ,उस औरत की क्या वास्तविकता है और और राजा ने उसी किस प्रकार मदद की? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-सातवीं पुतली कौमुदी शिवानी आनंद की आवाज में..
राजा विक्रमादित्य के शासन काल में उज्जैन राज्य की समृद्धि आकाश छूने लगी थी। उन दिनों एक सेठ हुआ जिसका नाम पन्नालाल था। वह बड़ा ही दयालु तथा परोपकारी था | अब जब पन्नालाल ने अपने बेटे हीरालाल के विवाह के संबंध में सोचा तो उसके सामने एक बहुत बड़ी समस्या आ गई | वह समस्या क्या थी और विक्रमादित्य ने उसे कैसे हल किया? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी-पन्द्रहवीं पुतली – सुंदरवती
राजा विक्रमादित्य की अतिथि -सेवा की परीक्षा किस प्रकार वरुण देव ने ली और उस परीक्षा का क्या नतीजा निकला ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-छठी पुतली- रविभामा शिवानी आनंद की आवाज में
Reviews for: Sinhasan Battisi – twentyone Putli chandrajyoti (सिंहासन बत्तीसी -इक्कीसवीं पुतली – चन्द्रज्योति)