राजा विक्रमादित्य के परोपकारी होने का वृतांत इस कहानी में मिलता है| राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार अपनी महामंत्री की एकमात्र पुत्री के प्राणों की रक्षा करने हेतु असंभव से दिखने वाली परिस्थितियों को संभव किया और दुर्लभ ख्वांग बूटी लेकर आए जिससे उसके प्राणों की रक्षा की जा सकी? कैसे ??इस रोचक वृतांत जानते हैं सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी इक्कीसवीं पुतली चन्द्रज्योति विक्रमादित्य और दुर्लभ ख्वांग बूटी,शिवानी आनंद की आवाज में…
One day lord Vishnu converted the most beautiful thing on earth, The Lotus into a beautiful lady so that he can talk to her, but the told him that though she has been converted to a lady her soul remains like a gentle flower and she feel scared from
दो भाईयों की ऐसी कहानी जो अपनी पत्नियों के रोज़ रोज़ के झगड़े से आहत हैं। एक दिन खाना मांगने पर न मिलने से क्रुद्ध हो एक भाई अपनी पत्नी के सर पर प्रहार करता है जिससे कि उसकी मृत्यु हो जाती है लेकिन दूसरा भाई सबके सामने बताता है कि खून भाई ने नहीं बल्कि उसकी पत्नी ने किया है क्योंकि उसका मानना है कि पत्नी तो उसे और मिल जाएगी लेकिन भाई तो दूसरा नहीं मिल सकता।
कर्ण को पिता अधिरथ के समान रथ चलाने की बजाय युद्ध कला में अधिक रुचि थी| कर्ण ,परशुराम जी के पास अपने को ब्राह्मण बता कर युद्ध कला की शिक्षा ले रहे थे, किंतु जब परशुराम को उनके ब्राह्मण ना होने की सच्चाई का पता चला, तब आगे क्या हुआ? इसके पीछे कौन सी कहानी छिपी हुई है? इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी कर्ण को श्राप, शिवानी आनंद की आवाज में…
विक्रमादित्य के राज्य में एक गरीब दरिद्र ब्राह्मण और भाट रहते थे |दोनों की पुत्रियों के विवाह के लिए उन दोनों के पास धनराशि नहीं थी | विक्रमादित्य ने दोनों की पुत्रियों के विवाह के लिए धन प्रदान किया| किंतु भाट को 1000000 स्वर्ण मुद्राएं ,जबकि ब्राह्मण को कुछ सौ स्वर्ण मुद्राएँ ही प्रदान की | विक्रमादित्य ने इस प्रकार का पक्षपात क्यों किया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी पच्चीसवीं पुतली त्रिनेत्री ईश्वर से आस ,शिवानी आनंद की आवाज में..
एक बार पुरुषार्थ और भाग्य में इस बात पर ठन गई कि कौन बड़ा है। राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार झगड़े का अंत किया ? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-तीसरी पुतली चन्द्रकला
राजा भोज को राजा विक्रमादित्य के देवताओं वाले गुणों की कथाएँ सुनकर उन्हें ऐसा लगा कि इतनी विशेषताएँ एक मनुष्य में असम्भव हैं और मानते हैं कि उनमें बहुत सारी कमियाँ है। अत: उन्होंने सोचा है कि सिंहासन को फिर वैसे ही उस स्थान पर गड़वा देंगे जहाँ से इसे निकाला गया है। सिंहासन के गड़वा पुनः देने के पश्चात आगे क्या हुआ ?इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी बत्तीसवीं पुतली रानी रूपवती, शिवानी आनंद की आवाज में..
एक बार राजा विक्रमादित्य के सलाहकारों ने बताया कि पाताल लोक के राजा शेषनाग का ऐश्वर्य देखने लायक है| विक्रमादित्य ने सशरीर पाताल लोक जाकर उनसे भेंट करने की ठान ली |जब वह पाताल लोक पहुंचे तो शेषनाग उनके व्यवहार से अति प्रसन्न हुए और भेंट स्वरूप अलग-अलग खूबियों वाले चार बहुमूल्य रत्न उन्हें दिए |अब वापस मृत्युलोक पर लौटने पर राजा विक्रमादित्य ने उन बहुमूल्य बहुमूल्य रत्नों का क्या किया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सोलहवीं पुतली सत्यवती राजा विक्रमादित्य और पाताल लोक की यात्रा, शिवानी आनंद की आवाज में..
पाँचवीं पुतली – लीलावती ने भी राजा भोज को विक्रमादित्य के बारे में जो कुछ सुनाया उससे उनकी दानवीरता ही झलकती है | कैसे ? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी-पाँचवीं पुतली – लीलावती
Reviews for: Sinhasan Battisi – twentyone Putli chandrajyoti (सिंहासन बत्तीसी -इक्कीसवीं पुतली – चन्द्रज्योति)