राजा विक्रमादित्य जैसा न्यायप्रिय, दानी और त्यागी और कोई न था | राजा को एक बार दो व्यक्ति दिखाई दिए एक मानव मुण्डों की माला पहने बीभत्स दिखने वाला कापालिक है तथा दूसरा एक बेताल है |उन दोनों में किसके लिए द्वंद चल रहा है और राजा किस प्रकार निर्णय देते हैं इस रोचक कहानी को आवाज दी है शिवानी आनंद में..
एक बार कृष्णदेव राय के चार प्रिय बेशकीमती फूलदानों में से एक फूलदान उनके सेवक रमैया के द्वारा टूट जाता है| कृष्णदेवराय उसे इस मामूली से अपराध के लिए फांसी की सजा सुना देते हैं ,अब तेनाली रामा किस प्रकार अपने चातुर्य से रमैया की जान बचाता है?? साथ ही कृष्णदेवराय को भी किस प्रकार अपनी गलती का एहसास होता है? इस रोचक किस्से को सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी बेशकीमती फूलदान, शिवानी आनंद की आवाज में…
एक बार विजय नगर में सूखे की स्थिति आ गई |तेनाली रामा ने जो बाग लगाया था वह भी सूख चुका था |तेनाली रामा ने किस प्रकार उपाय करके अपने बाग की सिंचाई कराई |इस रोचक घटना को जानने के लिए सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी बाग की सच्चाई शिवानी आनंद की आवाज में
एक बार कृष्णदेवराय ने विशाल मंदिर बनाने का विचार किया | मंदिर के स्थान से भगवान की मूर्ति चोरी हो गई | तेनालीरामा ने किस प्रकार मूर्ति चोर को पकड़ा |पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं तेनालीरामा की कहानियों में से एक कहानी जटाधारी सन्यासी शिवानी आनंद की आवाज में
धार्मिक ग्रंथों में राजा बलि के पराक्रमी और दानवीर होने के सारे प्रसंगों का अध्ययन किया |अब उन्होंने उनके दर्शन करने का विचार बनाया, लेकिन उनके दर्शन कैसे हो, इसके लिए उन्होंने अपनी राज-पाट और मोह -माया को त्याग कर कठोर तपस्या प्रारंभ कर दी| उनकी तपस्या से उन्हें पाताल लोक में राजा बलि के दर्शन हो पाए ?उसके बाद क्या हुआ इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सताइसवीं पुतली मलयवती विक्रमादित्य और दानवीर राजा बलि,शिवानी आनंद की आवाज में…
एक युवक एक राजकुमारी से प्रेम करता है और विवाह करना चाहता है किंतु राजकुमारी का विवाह उसी से हो सकता है जो खोलते हुए तेल से सकुशल लौट आए| इस बात से हताश युवक की राजा विक्रमादित्य किस प्रकार मदद करते हैं पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-दसवीं पुतली – प्रभावती
विक्रमादित्य के सिंहासन की दूसरी पुतली चित्रलेखा द्वारा सुनाई गई कहानी जिसमें एक साधु विक्रमादित्य को एक फल देता है और उसे एक यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होने का वरदान देता है |क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में कहानी विक्रम और बेताल की कहानियों में से एक कहानी सिंघासन बत्तीसी -दूसरी पुतली चित्रलेखा
एक बार महाराजा विक्रमादित्य वेश बदलकर अपने राज्य में भ्रमण कर रहे थे ,तभी अचानक से उन्हें एक झोपड़े से कुछ आवाजें सुनाई दी |जिससे उन्हें पता चला कि झोपड़ी में रहने वाला रहने वाले दंपत्ति निसंतान है| उन्हें संतान तभी प्राप्त हो सकती है जब स्वयं महाराजा विक्रमादित्य शिव भगवान की स्तुति में अपने अंग हवन कुंड में काट कर डाल दें| महाराजा विक्रमादित्य ने क्या वास्तव में उस दिन निसंतान दंपत्ति के लिए ऐसा किया? क्या हुआ उसके बाद ?इस पूरी घटना को जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सत्रहवीं पुतली विद्यावती विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना,शिवानी आनंद की आवाज में
अचानक एक दिन राजा विक्रमादित्य को एक औरत के रोने की आवाज सुनाई दी राजा उसकी मदद हेतु उसी दिशा में चल दिया ,उस औरत की क्या वास्तविकता है और और राजा ने उसी किस प्रकार मदद की? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-सातवीं पुतली कौमुदी शिवानी आनंद की आवाज में..
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