धरोहर इक्कीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार बृज शुक्ल घायल जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनके साहित्यकार पुत्र डॉ प्रवीण शुक्ल जी के साथ ।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये कल सुनते हैं डॉ कुँवर बेचैन जी को। वर्तमान की मंचीय काव्य परंपरा में अग्रणी, सुमधुर प्रस्तोता डॉ कुंवर बेचैन जी वास्तव में गीतकुंवर हैं। उनके गीतों का वैविध्य, और प्रतीक योजना तो अद्भुत है ही साथ में उनका स्वर उसमें और अधिक सौंदर्य वृद्धि कर देता है। वे गीतों के साथ लोकरंजन व लोकमंगल दोनों की कार्य सम्पादित करने में सक्षम हैं। आइये हिंदी गीतिकाव्य के अलंकारिक स्वर को सुनें
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में कल सुनिये छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश से श्री रोहित रूसिया जी को। हम जिस भी कला की ओर देखते हैं, उसमें पारंगत होते हैं या निष्णात होने का प्रयास करते हैं उसे हमारा दैनिक अनुभव और अधिक बेहतर बनाता है। पेंटिंग में लगने वालों रंगों की कीमत तो शायद कुछ हजार में होती होगी परंतु उसका मूल्य लाखों में होने के लिए उसको बनाने वाले के अनुभव का गहन होना आवश्यक है। क्रेता उन रंगों का मूल्य नहीं चुकाता बल्कि उस असीम अमूल्य अनुभव को कुछ देने का प्रयास करता है जो बनाने वाले नें अपने दिन, घण्टे और मिनट उस कला के लिए खर्च करके अर्जित किये हैं। ऐसे ही अनुभवी और जीवन के सार को निचोडकर गीतों में पिरो देने वाले रचनाकार हैं श्री रोहित रूसिया जी। वे बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी हैं। एक श्रेष्ठ कवि होने के साथ साथ वे सक्रिय और प्रसिद्ध रंगकर्मी भी हैं। उनका अनेक क्षेत्रों का अनुभव उनके गीतों को और अधिक पैनापन भी देता है और भावपक्ष को और अधिक प्रभावी भी बनाता है ।
धरोहर श्रृंखला बाइसवीं और अन्तिम शब्दांजलि कीर्तिशेष गीतकार आत्म प्रकाश शुक्ल जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार श्रद्धेय डॉ. शिवओम अम्बर जी के साथ
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में आइये आज सुनते हैं वरिष्ठ गीतकार श्री माहेश्वर तिवारी जी को। श्री माहेश्वर तिवारी जी हिंदी गीतकाव्य परम्परा के उन गीतकारों में से हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन गीतों को समर्पित किया। उनके गीतों को पढ़कर, उनकी शैली से प्रेरणा ले न जाने कितने कवि तैयार हुए। आप गीत को मंत्र की भाँति मारक बनाने में निष्णात हैं। आपके नवगीतों का प्रकृति चित्रण इतना सजीव है कि जैसे प्रकृति स्वयं देह धारण होकर वार्तालाप कर रही हो। मंचों पर गीत धारा को निष्कलुष, और जीवंत रखने में आपका योगदान अतुलनीय है।
शिवोहम साहित्यिक मंच की प्रस्तुति #गीतों_की_ओर में कल सुनिये प्रसिद्ध गीतकार श्री यश मालवीय जी को। मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः । यत्क्रौंचमिथुनादेकमवधी काममोहितम् ।। (रामायण, बालकाण्ड, द्वितीय सर्ग, श्लोक १५) कहा जाता है कि यह श्लोक रामायण का आधारभूत श्लोक है जो सदैव से यह परिभाषित करता रहा है कि कविता का उद्भव करुणा से हुआ है। वास्तव में कविता मात्र करुणा का नहीं वरन हमारे जीवन के अनेकानेक अनुभवों का रूपांतर है। एक प्रेमी विरह में प्रेमिका का स्मरण कर गीत रच सकता है तो वही वही प्रेमी मिलन के क्षणों में नायिका की वेणी में पुष्प गूँथते हुए भी काव्यपथ की ओर चल सकता है। माँ मीरा अपने पदों में अपने आराध्य को याद कर लेती है तो बाबा सूर अपने सखा को बुला लेते हैं। कहीं महीयसी महादेवी की पीड़ा बिलखती है तो कहीं बाबा नागार्जुन का रोष व्यंग करता है, कहीं भूषण के छंद गर्जन करते हैं तो कहीं काका के कुंडलिया अट्टहास करते से दिखाई देते हैं। हमारे जीवन के हर अनुभव को कविता नें देखा है, लिखा है और गाया है। गीतों के अनंत मार्ग के एक ऐसे ही पथिक से हम मिलते हैं जिन्हें हम श्री यश मालवीय के नाम से जानते हैं। वे उन चुनिंदा रचनाकारों में से हैं कि वे जिस राह पर चल रहे थे उसी राह पर मील के पत्थरों में उनके नाम को अंकित कर दिया गया है। उनके विषय में बहुत कुछ भी कह दिया जाए तो कहीं किसी को अतिशयोक्ति का भान नहीं होगा ऐसे गीत पथ के अग्रगामी पथिक, गीत कविता के अनन्य पुरोधा के अमृतमय गीतों के श्रवण लाभ का आनंद लें
धरोहर बीसवीं शब्दांजलि कीर्तिशेष रचनाकार श्री संतोष कुमार वर्मा “फ़न” जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए उनकी कवयित्री पुत्री सपना सोनी जी के साथ ।
बैसवारा उत्तर प्रदेश की वह भूमि जिसने भारत के इतिहास में कलम और तलवार दोनों से अपना विशेष स्थान बनाया है। मंचीय कविता के लोग कहते हैं कि अगर बैसवारे के श्रोताओं ने आपको मन से सुन लिया तो आप पूरे हिंदुस्तान में कहीं भी बहुत अच्छे से सुने जाएंगे। महाप्राण निराला जी, सुमन जी, आचार्य नंद दुलारे बाजपेयी जी, सनेही जी जैसे अद्भुत साहित्यकारों को अपने अंक में बिठाने वाली इस वसुंधरा के एक अप्रतिम गीतकार से हम परिचय करेंगे #शिवोहम_साहित्यिक_मंच के #धरोहर की द्वितीय शब्दान्जलि में। स्मृतिशेष शिव बहादुर सिंह भदौरिया जी नवगीत के अति विशिष्ट रचनाकर हुए हैं। नवगीत दशक से लेकर नवगीत का कोई भी वृहद समवेत संकलन आपकी उपस्थिति के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। उनके गीत ग्राम्यांचल की मिट्टी से लेकर महानगर की अधुनिकता तक को अपने मे समेट कर चलते हैं।
शिवोहम सहित्यिक मंच धरोहर की प्रथम शब्दांजलि कालजयी रचनाकार डॉ उर्मिलेश शंखधर जी की कविताएं और स्मृतियाँ सुनिये उनकी पुत्री श्रीमती सोनरूपा विशाल जी के साथ।
धरोहर बाहरवीं शब्दांजलि यशशेष जनकवि विपिन मणि जी की रचनाएं और स्मृतियाँ सुनिये उनके पुत्र डॉ. उदय मणि जी के साथ
धरोहर श्रृंखला बाइसवीं और अन्तिम शब्दांजलि कीर्तिशेष गीतकार आत्म प्रकाश शुक्ल जी की रचनाएँ और संस्मरण सुनिए लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार श्रद्धेय डॉ. शिवओम अम्बर जी के साथ
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