30 seconds of positive energy, positive poetry.
कवि हमेशा सत्य का परिचय कराता है ,हो सकता है वह सत्य कटु लगे ऐसी स्थिति में हमेशा कवि की उपेक्षा की जा जाती है |
“तीखा जीवित कांटा बनू ,शवों पर निर्जीव फूल नहीं “, हमें जीवन इस ढंग से जीना चाहिए कि खुद हम अपने ऊपर गर्व महसूस कर सकें |इसी भावना को सजग करते हुए अनुपम ध्यानी की आवाज में खूबसूरत कविता “राख बनो धूल नहीं”…
कभी कभी हमें खुद नहीं पता होता की हम अपने संदूकों में क्या क्या अद्भुत छुपाए बैठे हैं
तो क्या जिए | To Kya Jiye |Hindi Kavita |हिंदी कविता | Motivational Hindi Poems by Anupam Dhyani
There is no recipe for life, but it is important to live each moment as if it is your last. Easier said than done ! But you can try.
To Kya jiye is asking questions to myself. You can ask these or other questions as well.
A curious, unafraid life is a life well lived.
मैं अपना दिल किराये पे चढ़ाना चाहता हूँ ! यह कविता इस युग के प्रेमियों के लिए है !
I am 26 ! I am the date that India became a Republic, but like my brother 15, I too am cursed to be remembered just one day! I am the pain of the nation! This Republic day, let us pledge to keep India- Bharat in us every single day! May the Tricolor hoist everyday in our hearts!
30 seconds of positive energy, positive poetry.
मन और हृदय अलग-अलग संवेदना से क्यों गुजर रहे हैं? अगर मन स्थिर और शांत है फिर क्यों हृदय में संग्राम छिड़ा हुआ है ?बेहद खूबसूरत शब्दों से पिरोया है इस दुविधा को अनुपम ध्यानी जी ने अपनी कविता मन में कोहरा, कोहराम हृदय में अपनी स्वयं की आवाज से
Let the people be what they be. You become the best version of yourself! Chase excellence and let people say what they have to.
हिंदी साहित्य की विधा मुक्तक जिसमें कम शब्दों में बहुत बड़ी बात बयान की जाती हैहिंदी साहित्य की विधा मुक्तक जिसमें कम शब्दों में बहुत बड़ी बात बयान की जाती है
साक्षर होना जीवन में सबसे बड़ा वरदान होता है अतः कविता के माध्यम से यह संदेश प्रेरित किया गया है पढ़ना लिखना हमारे जीवन के लिए कितना आवश्यक है कविता खूब पढ़ते जाना पल्लवी जी की मधुर आवाज
खुसरो के लेखन शैली की अति उत्कृष्ट ग़ज़ल की पंक्तियां “जिहाले मिस्किन “ जिसमें हिंदी और फारसी दोनों का एक साथ प्रयोग किया गया है |पंक्तियों का आशय इस प्रकार है अगर मुझ गरीब को यूं आंखें इधर-उधर दौड़ाकर और बातें बना कर नजरअंदाज ना करो ,मैं अब और जुदाई बर्दाश्त नहीं कर सकता | पूरा सुनने के लिए सुनते हैं रवि शुक्ला की आवाज में अमीर खुसरो द्वारा लिखी गई इस ग़ज़ल के छंद…
Reviews for: S01E15 :THE 30 SECOND PROJECT