कभी कभी हमें खुद नहीं पता होता की हम अपने संदूकों में क्या क्या अद्भुत छुपाए बैठे हैं
Let the people be what they be. You become the best version of yourself! Chase excellence and let people say what they have to.
30 seconds of positive energy, positive poetry.
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जश्न-ए -बहारा | Celebrating Life | Hindi Kavita | हिंदी कविता | Poems by Anupam Dhyani
It is so IMPORTANT to pause, reflect, savor the moments that we just let go because we are running this race of life. When you pause is when you realize that the same things that you see is obstacles or impediments or even defeats , were actually life’s most important moment that you so conveniently ignored because you were running a race looking at others.
Jashn-e-bahara jaisi honi chahiye zindagi.
30 seconds of positive energy, positive poetry.
A poet tells all, undiluted, un-afraid! My salute to all poets!
रुकमणी बेहद खूबसूरत एक अनाथ लड़की है जिसका विवाह चालाकी दीवान मयादास अपने पुत्र से कर देता है ,जो मिर्गी ग्रस्त होता है | मयादास की मृत्यु के बाद उसके भतीजे रुक्मणी का जीना दूभर कर देते हैं | रुकमणी अपने बीमार पति का इलाज कराने के लिए उसे लाहौर भेज देती हैं इधर रुकमणी की अमरनाथ यात्रा में मृत्यु हो जाती है |उसका बीमार पति जब वापस आता है तो वह अपने आप को किस स्थिति में पाता है ??इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं “ एक रोमांटिक कहानी
30 seconds of positive energy, positive poetry.
दोस्तों, हम सब के जीवन में कई सीखें हैं | मैं भी ऐसी ही एक सीख को कविता के रूप में आपके साथ साझा कर | आशा करता हूँ कि आपको यह कविता पसंद आएगी | आनंद लीजिये और मेरे इस चैनल पर आते रहिये ऐसी ही प्रेरणा से भरी कविताओं के लिए | धन्यवाद |
पड़ती है !|Hindi Kavita |हिंदी कविता | Motivational Hindi Poems by Anupam Dhyani Before starting something new one must shed the old! One must be patient for victory and always understand that all good things come in time.
साक्षर होना जीवन में सबसे बड़ा वरदान होता है अतः कविता के माध्यम से यह संदेश प्रेरित किया गया है पढ़ना लिखना हमारे जीवन के लिए कितना आवश्यक है कविता खूब पढ़ते जाना पल्लवी जी की मधुर आवाज
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी इस कविता से शुरुवात होती है इस शीर्षक प्रेम की कविताओं की।
मैं तुम्हें फिर मिलूँगी आखिरी कविता थी जो अमृता ने लिखी थी। प्रेम से लबरेज़ ये कविता, आंखे नम कर देती है। बेइन्तहां प्रेम में डूबी अमृता, बेहद बीमार अमृता पूरे प्रेम और समर्पण से अपने आप को तैयार कर लेती हैं अपनी आने वाली अन्त यात्रा के लिए।
प्रेम शीर्षक के अंतर्गत जी कविताएँ हैं, उनमें न सिर्फ उनका अपने साथी के लिए प्रेम उमड़ता है, बल्कि, उंस ईश्वर के लिए भी प्रदर्शित होता है जिसके आगे उन्होंने समर्पण कर दिया है।
सुनते हैं शीर्षक प्रेम के अंतर्गत, आत्मा की परमात्मा के लिए प्रेम में डूबी मैं तुम्हें फिर मिलूँगी की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पर, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
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