ज़िंदगी में बहुत आगे निकल आने पर भी हमें कई बार महसूस होता है कि अतीत हम में आज भी ज़िंदा है| हम उससे कितना ही पीछा छुड़ाने की कोशिश क्यों न कर लें पर वो हमारा पीछा कभी नहीं छोड़ता और रह -रह कर हमारी आँखों के सामने आता रहता है , ऐसे में इंसान क्या करे? कभी अतीत के आगे झुकने का मन करता है तो कभी उससे लड़कर आगे बढ़ने का , इसी कशमकश को बयां करती ये कहानी…
जो देश सोने की चिड़िया हुआ करता था वो अब गरीब होने लगा और उस देश से बाहर निकल कर गया हुआ इंसान , बाहर के देशो में बहुत खुश होता है |साफ़ सफाई,चकाचौंध सब कुछ उसे अच्छा लगता है|वो पैसे कमाने में लग जाता है,अपने नाम बनाने में लग जाता है, पर वो नाम ही क्या नाम जिसे कोई अपनेपन से पुकार भी न सके ? देश से बाहर जाकर अपनी पहचान बना पाना एक गर्व की बात है पर क्या उस पहचान में अपनापन होता है ?
72 वर्ष के एक वृद्ध की कहानी है जो 20 साल तक अपनी एक जमीन के लिए अदालतों का चक्कर काटता रहता है अब इस उम्र में उसे जमीन मिल भी जाती है किंतु अभी जमीन का कब्जा बाकी होता है वह बेहद कशमकश की स्थिति में है कि अब क्या करें क्या वह वयोवृद्ध जमीन का सुख उठा पाता है क्या होता है उसके साथ पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी द्वारा लिखी गई कहानी मरने से पहले सुमन वैद्य जी की आवाज में
जहाँ चील की आँखें अपने लक्ष्य को देख कर वार करती हैं, वहाँ वे अदृश्य चीलें अंधी होती हैं, और अंधाधुंध हमला करती हैं। उन्हें झपट्टा मारते हम देख नहीं पाते और हमें लगने लगता है कि जो कुछ भी हुआ है, उसमें हम स्वयं कहीं दोषी रहे होंगे। नायक की पत्नी शोभा नायक के साथ नहीं रहती है अचानक एक दिन नायक को शोभा एक पार्क में दिखाई देती है| नायक फिर से शोभा से मिलना चाहता है |क्या नायक का शोभा से पुनः मिलन हो पाएगा ? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी चीले, सुमन वैद्य जी की आवाज में…
कहानी में दो गरैया नायक के घर में घोसला बनाने के लिए संघर्ष कर रही है | घर का मालिक उन दोनों गौरैयों को अपने घर से निकालने की कोशिश कर रहा है | क्या कहानी के अंत तक उसकी यह कोशिश सफल होती है या फिर उसका हृदय -परिवर्तन हो जाता है| जानने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी द्वारा लिखी गई कहानी दो गौरैया ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
सत्य की खोज में इंसान हमेशा से रहा है और इसे खोजने के लिए कभी उसने धर्म को गहराई से समझने की कोशिश की है तो कभी सामज को और इन सबके अलावा जीवन आसान नहीं होता , मनुष्य को अत्याचार भी सहने पड़ते हैं कई बार ,,, आसान से शब्दों में कहा जाये तो सत्य , धर्म , राजनीति , सामाजिकता और अत्याचार इन सबसे घिरा इंसान सत्य की खोज कैसे करेगा और इन सब का उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
जैसा की हम सब जानते हैं मंटो ने उन औरतो और उन गलियों के बारे में बहुत लिखा है , जिनमे जाने वाले ही उन गलियों और उन औरतो को गालियां देते हैं , तरह तरह की बातें करते हैं , पर क्या कभी किसी ने उन गलियों के मर्द के बारे में सोचा है , जो उन औरतो के लिए ग्राहक लेके आते हैं , कभी सोचा है उनके आत्म सम्मान के बारे में ? एक ऐसे ही आदमी कहानी है ये जो उन रंगीन गलियों में अपना काम करता है , जहां की ज़िंदगी में शायद अँधेरे के सिवा कुछ नहीं है
मंटो की कहानियां हमेशा की समाज की उन वास्तविकताओं से हमें रूबरू करवाती हैं , जिन्हे हम देख के भी अनदेखा क्र देते हैं,,, ये कहानी भी समाज की उन आवाज़ों को सुनाने का प्रयास करती है , जिन्हे हम सुनते तो हैं पार्ट अनसुना कर देते हैं ,,, गरीब परिवार में होने पर ये आवाज़ें कुछ ज्यादा ही सुनाई देने लगती हैं ,, आप भी सुने ,,और बताएं क्या सुना आपने ?
ये कहानी है एक ऐसे इंसान की जो एक जानवर को पाल के रखता है , और समय के साथ वो जानवर बड़ा होता जाता है , उस इंसान के घर में उसकी बीवी भी बहुत कलेश करती है क्युकी उसकी अपने पति से कुछ उमीदें और कुछ शक हैं जिनको वो अधूरा पति है , दूसरी और वो जानवर समय के साथ बड़ा होता जाता है , और वो उस इंसान को खाना चाहता है , फिर एक वक्त ऐसा आता है की उस जानवर जिसे कैद किया गया था इंसान में लड़ाई होती है ,,, कौन था वो जानवर ? और क्या हुआ इस लड़ाई में ? जानने के लिए सुनिए ये कहानी
ये कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने जीवन में कभी हार नहीं मानी। जीवन में बहुत सी विसम परिस्तिथियाँ आई पर उनके क़दम कभी नहीं डगमगाए और वो हर मुश्किल का सामना करते हुए , सकरात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते गए , इनकी कहानी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है
ग़ुलाम देश के लोगो की आखों में जब आज़ादी का सपना होता है तो एक अनपढ़ इंसान भी सपने देखने लगता है , वो सोचने लगता है सब बदल जायेगा , अब वो भी गोरों के बराबर हो जायेगे ,,,और ज़रूरत पड़ने पर इतने सालों से गोरों ने जो अत्याचार किये हैं उसपे , उनका बदला भी वो ले पायेगा , उसके कानो ने नए कानून के बारे में सुना होता है , पर क्या सच में नए कानून से कुछ बदलेगा ? क्या सच में नया कानून आएगा ?
गाय के नेत्रों में हिरन के नेत्रों-जैसा विस्मय न होकर आत्मीय विश्वास रहता है। उस पशु को मनुष्य से यातना ही नहीं, निर्मम मृत्यु तक प्राप्त होती है, परंतु उसकी आंखों के विश्वास का स्थान न विस्मय ले पाता है, न आतंक। महादेवी वर्मा जी के द्वारा लिखित प्रसिद्ध कहानियों में से है कहानी गौरा गाय |महादेवी जी के स्नेह पाकर गौरा गाय हष्ट-पुष्ट हो गई थी, किंतु एक समय ऐसा भी आया गौरा अपने बछड़े को छोड़कर सदा के लिए चल बसी |आखिर क्या हुआ था गौरा के साथ ?जानते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में कहानी गौरा गाय….
कहानी में लेखक कार्निवल गया है वही उसे तेरह-चौदह वर्ष का एक लड़का दिखाई देता है उसके गले में फटे कुरते के ऊपर से एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी है और जेब में कुछ ताश के पत्ते है । उसके मुँह पर गम्भीर विषाद के साथ धैर्य की रेखा है लेखक न जाने क्यों उसकी ओर आकर्षित होता है |लेखक उस लड़के के साथ कुछ समय बिताता है| छोटा जादूगर से जानने वाले उस लड़के के जीवन में क्या- क्या घटित हो रहा है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी छोटा जादूगर ,निधि मिश्रा की आवाज में
नज़्म क्या है? यह प्रश्न हमेशा गूंजता रहता है किंतु अमृता प्रीतम की इस नज़्म को पढ़कर इसका जवाब मिल गया है| क्या है इसका जवाब ?इसे जानने के लिए के लिए सुनते हैं अनुर्वी की आवाज में अमृता प्रीतम की यह नज़्म
50 की उम्र पार करने के बाद भी नेउर एक मेहनती इंसान है| गांव में वह अपनी बूढ़ी पत्नी के साथ खुशी-खुशी रहता है| एक महात्मा के चक्कर में पड़कर के नेउर अपनी पत्नी के सारे गहने और रुपए गवा देता है ||इसके बाद नेउर की जिंदगी में बहुत बड़ी तब्दीली आ जाती है |वह क्या है? जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी की रोचक कहानी नेउर सुमन वैद्य जी की आवाज में
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