हिंदी साहित्य की विधा मुक्तक जिसमें कम शब्दों में बहुत बड़ी बात बयान की जाती हैहिंदी साहित्य की विधा मुक्तक जिसमें कम शब्दों में बहुत बड़ी बात बयान की जाती है
“मुरझाई दिए की बाती पवन का वेग नहीं सहन कर पाती ,मशाल हवा के संग अनूठा नृत्य निर्वाण है “ , हमें अपने को इतना कठोर बना लेना चाहिए कि बड़े से बड़े अवसाद को भी सरलता से झेल सकें ,ना कि जरा से अवसाद में हम बिखर जाएं | कविता “मुझे मशाल रास आती है” के मूल रूप में इसी संदेश को दिया गया है…
नागार्जुन के काव्य संग्रह हजार- हजार पांव वाली से ली गई रचना उनको प्रणाम… कवि ने अपनी रचना के माध्यम से उन सभी को उन सभी को शत-शत नमन किया है जिनका किसी न किसी रूप में अपनी सेवाओं के द्वारा देश ,समाज आदि के लिए अतुलनीय योगदान रहा है |नागार्जुन के द्वारा लिखी गई इस खूबसूरत प्रेरक रचना को आवाज दी है डॉक्टर पवन मिश्रा
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pragati sharma