मीरा ने आनंद का एक अलग ही पहलू देखा । जिसमें उसे दंभी ,तानाशाह, हिप्पोक्रेट व्यक्ति नजर आया । जिसने उसकी कला की प्रशंसा ना करके उसे उससे अलग होने का हुक्म दे डाला । क्या हमारे समाज में शादी के बाद सिर्फ लड़की को ही नए परिवेश में ढलना होता है ?होता होगा। पर अब नहीं। अब जमाना बदल चुका है । यह नए दौर का जमाना है , जिसमें लड़कियाँ लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। तो फिर मीरा कैसे चुप रह सकती है ?
शादी एक जुआ है।सही दाव लग गया तो पौ बारह, लेकिन अगर दाव उल्टा पड़ गया तो जिंदगी जहन्नुम बन जाती है।इस फ़न में हर कोई माहिर नही होता।वो विरले ही होते है जो इस फ़न में माहिर होते हैं ।
मां बाप के लिए अपने बच्चे ना कोई बोझ होते हैं ना कोई अवसाद होते हैं वह अपने बच्चों को पूरे स्नेह के साथ उनका लालन-पालन करते हैं क्या कभी बच्चे भी अपने मां-बाप कीउसी प्रकार उनकी देखभाल कर पाते हैं इसी भावना से ओतप्रोत है मालती जोशी जी की लिखी कहानी वो तेरा घर यह मेरा घर ,सुनते हैं पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
कभी-कभी हमारा अतीत हमारे वर्तमान में दखलअंदाजी करने लगता है। हम अतीत और वर्तमान के बीच उलझ कर रह जाते हैं। ऐसे में अगर हमें कोई सही रास्ता दिखाए तो हमारा अतीत हमारे वर्तमान पर प्रभाव नहीं डाल पाता । हम अपने वर्तमान में लौट आते हैं। वर्तमान में जीने लगते हैं।
हमारी भारतीय समाज में पति विहीन नारी की हमेशा उपेक्षा की जाती है |हमारी मानसिकता अभी भी नहीं बदली पति कैसा भी हो स्त्री का सुहाग होता है ,किंतु उसके बिना जैसे उस स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं रहता और उसका वजूद महा शून्य में तब्दील हो जाता है इसी संदर्भ में सुनते हैं इस मार्मिक कहानी को महा शून्य को मालती जोशी जी की आवाज में
भौतिकवादी युग में प्यार भी हिसाब किताब से नापतोल कर किया जाता है भावुकता और संवेदनशीलता जैसी चीजें आउटडेटेड होती जा रही है कहानी में पिंकी और उसका मित्र कार्तिक इसी भावना के साथ जीवन में किसी के साथ संबंध जोड़ना चाहते हैं| कहानी के अंत में कहा गया है टूटकर प्रेम करने वाले लोग अब कहां रहे वह पीढ़ी वक्त कब से इतिहास बन गई है सुनते हैं कहानी कैलकुलेशन
जेवर और पीहर बुढ़ापे तक इन दो चीजों का मुंह नहीं टूटता |पीहर के प्रति लगाव इतना जबरदस्त होता है कि उसे बरकरार रखने के लिए कई बार बेटियां अपना जायज हक तक छोड़ देती है| चंद्रहार कहानी में भावनाओं का ताना-बाना इसी बात को लेकर बुना गया है| कहानी ने मीनू 3 साल के बाद अपनी मां से मिलने भारत आती है | मां उसको उसकी पसंद का चंद्रहार देना चाहती है किंतु मीनू उसे लेने से इनकार कर देती है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं मालती जोशी जी की आवाज में कहानी चंद्रहार
यह मनी ऑर्डर तेरे दादा दादी के लिए संजीवनी है उनका मानसिक संबल है यह बात उन्हें एहसास लाती है कि उनका बड़ा बेटा उन्हें भूला नहीं और अपने कर्तव्य से विमुख नहीं हुआ | मात्र ₹1000 के मनीआर्डर आने पर जो कि उनके बड़े बेटे के द्वारा भेजा जाता है दादा दादी गदगद हो जाते हैं जबकि छोटा बेटा और परिवार अपने मां-बाप की सेवा पूरे दिल से करता है ऐसे में उनकी पोती के मन में कई प्रकार के संशय पैदा होते हैं | दिल को छू लेने वाली कहानी
प्रेम में होने पर अक्सर प्रेमी युगल अपनी कल्पना में अपनी प्रेमी अथवा प्रेमिका की तस्वीर बनाते हैं इसी भाव को गीत में प्रस्तुत किया गया है सुनिए भावना तिवारी जी की आवाज में प्रोफेसर रामस्वरूप सिंदूर ji के शब्दों में
रिश्तो के रंग को बदरंग करने की मेरी सजा आज पूरी हुई” ईर्ष्या और द्वेष से” लिप्त यह दो बहनों की कहानी है| जो उनके जीवन को विष के समान कर देती है | आखिर इस भावना का जन्म क्यों होता है और किस हद तक इसका प्रभाव उन दोनों के जीवन पर पड़ता है? जानने के लिए सुनते हैं ज्योत्सना सिंह के द्वारा लिखी गई कहानी सन्यासिनी
मि. कानूनी कुमार, एम.एल.ए. अपने आँफिस में समाचारपत्रों, पत्रिकाओं और रिपोर्टों का एक ढेर लिए बैठे हैं। देश की चिन्ताओं से उनकी देह स्थूल हो गयी है; सदैव देशोद्वार की फिक्र में पड़े रहते हैं जिन कानूनी कुमार जी का देश की समस्याओं से मन हमेशा परेशान रहता है आखिर उनके घर की कानून व्यवस्था के का क्या हाल है जानने के लिए सुनते हैं हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी मिस्टर कानूनी कुमार ,सुमन वैद्य जी की आवाज में
मिस पदमा एक प्रभावशाली वकील है |उसकी अच्छी प्रैक्टिस भी चल रही है |यूं तो मिस पर पदमा के पास रिश्तो की कोई कमी नहीं है, किंतु मिस पदमा ऐसे व्यक्ति को अपना जीवनसाथी बनाना चाहती हैं जो पूरी तरीके से आत्मसमर्पण कर दें |ऐसे में प्रसाद से उसे प्रेम हो जाता है| क्या मिस पदमा को जीवन की वो खुशी प्रसाद के द्वारा प्राप्त होती है ?प्रसाद किस प्रकार का इंसान है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद जी की कहानी मिस पद्मा सुमन वैद्य जी की आवाज में
जहाँ चील की आँखें अपने लक्ष्य को देख कर वार करती हैं, वहाँ वे अदृश्य चीलें अंधी होती हैं, और अंधाधुंध हमला करती हैं। उन्हें झपट्टा मारते हम देख नहीं पाते और हमें लगने लगता है कि जो कुछ भी हुआ है, उसमें हम स्वयं कहीं दोषी रहे होंगे। नायक की पत्नी शोभा नायक के साथ नहीं रहती है अचानक एक दिन नायक को शोभा एक पार्क में दिखाई देती है| नायक फिर से शोभा से मिलना चाहता है |क्या नायक का शोभा से पुनः मिलन हो पाएगा ? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी चीले, सुमन वैद्य जी की आवाज में…
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