एक बार विजय नगर में बाढ़ आ गई | राहत के नाम पर मंत्री जी ने काफी सारा धन राजकोष से ले लिया |तेनालीरामा को मंत्री जी की के क्रियाकलापों से संशय उत्पन्न हुआ कि वह धनराशि जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचाई जा रही है| तेनालीरामा ने ऐसा क्या किया कि कृष्णदेव राय को भी सच्चाई का पता चल गया ?जानते हैं इस रोचक किस्से को तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी बाढ़ और बचाव ,शिवानी आनंद की आवाज में…
हरसुंदरी ने मां न बन पाने के कारण अपने पति निवारण का विवाह शेलबाला नाम की किशोरी से तो कर दिया पर उसे क्या पता था कि इसके बाद उसका जीवन इतनी मुश्किलों से भर जाएगा।
राजा विक्रमादित्य जैसा न्यायप्रिय, दानी और त्यागी और कोई न था | राजा को एक बार दो व्यक्ति दिखाई दिए एक मानव मुण्डों की माला पहने बीभत्स दिखने वाला कापालिक है तथा दूसरा एक बेताल है |उन दोनों में किसके लिए द्वंद चल रहा है और राजा किस प्रकार निर्णय देते हैं इस रोचक कहानी को आवाज दी है शिवानी आनंद में..
यह कहानी शिक्षा व्यवस्था पर एक व्यंग्यात्मक कटाक्ष है जिससे हमे यह बोध होता है कि आखिर किस प्रकार उच्च अधिकारियों द्वारा शिक्षा के नाम पर केवल अपने स्वार्थ ही सिद्ध किए जाते हैं।
सुभाषिनी नाम की ऐसी लड़की की कहानी जो बोल नहीं सकती, इसलिए उसकी मित्रता भी मूक प्राणियों से अधिक है जिसे बोलने वाले समाज से हमेशा निरादर ही प्राप्त हुआ।
हिरण्यधनु नामक निषाद का पुत्र एकलव्य भी धनुर्विद्या सीखने के उद्देश्य से द्रोणाचार्य के आश्रम में आया, किन्तु कर्ण के समान ही निम्न वर्ण का होने के कारण द्रोणाचार्य ने उसे अपना शिष्य बनाना स्वीकार नहीं किया। निराश होकर एकलव्य वन में चला गया। उसने द्रोणाचार्य को उनकी मूर्ति के समक्ष अपना गुरु मानकर उनके समक्ष धनुर्विद्या का ज्ञान करने लगा| इस पर द्रोणाचार्य ने एकलव्य से गुरुदक्षिणा के रूप में उसके दाहिने हाथ के अँगूठे की माँग की| आखिर द्रोणाचार्य जी ने गुरु दक्षिणा के रूप में एकलव्य से उसके हाथ का अंगूठा क्यों मांगा ? क्या हुआ उसके बाद एकलव्य के साथ और क्यों इतिहास में एकलव्य का नाम प्रसिद्ध है? इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानी में से एक कहानी एकलव्य की गुरुभक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में…
हर मां बाप के लिए उसका बच्चा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा होता है| इस बात को किस प्रकार बीरबल ने अकबर को समझाया ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैंमोनीषा मुकुंदन की अकबर बीरबल की कहानियां,अंजू जेटली की आवाज में..
राजा शल्य को दुर्योधन ने महाभारत संग्राम भूमि में कर्ण का सारथी बनने का आदेश दिया ,किंतु जब राजा शल्य ने महाभारत युद्ध में श्रीकृष्ण की भूमिका का उल्लेख किया तो दुर्योधन ने उसे कर्ण का अपमान समझा| तो क्या हुआ क्या राजा शल्य करण के सारथी बनने के लिए तैयार हुए और उनकी इस युद्ध में क्या भूमिका रही ?इस रोचक प्रसंग को सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी शल्य का सारथी बनना ,शिवानी आनंद की आवाज में..
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