कहानी एक राजा और उनके चार पुत्रों की है राजा चाहता है उसके बाद उसका सबसे योग्य पुत्र राजगद्दी संभाले इसके लिए अपने चारों पुत्रों को राज्य से बाहर जाकर धन कमाने को कहता है शर्त के अनुसार जो सबसे अधिक धन अर्जित करेगा वही राजगद्दी का हकदार होगा पूरी कहानी सुनकर जानते हैं उन चारों में से सबसे योग्य पुत्र कौन था और क्यों हरिशंकर परसाई द्वारा लिखी गई कहानी जैसे उनके दिन फिरे”, अमित तिवारी जी की आवाज में
हरिशंकर परसाई जी का अनुभव ऐसा है कि उन्हें लगता है कि हर कोई किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्त है| भाई !सबके अपने-अपने अलग-अलग दुख है, अपने -अपने संघर्ष है| कोई अपनी संपन्नता के कारण दुखी है, कोई अपनी न्यूनतम जीवन भी ना जी पाने के कारण दुखी है |ऐसे में व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई जी है किस बीमारी से ग्रसित होना चाहते हैं? आखिर किस लिए ?बेहद व्यंग्यपूर्ण तरीके से लिखी गई कहानी अपनी-अपनी बीमारी, सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में..
भोलाराम 60 वर्ष का एक वृद्ध है कि अचानक से मृत्यु हो जाती है धर्मराज के दूत भोलाराम की आत्मा को स्वर्ग ले जाने के लिए आते हैं किंतु रास्ते से ही भोलाराम की आत्मा कहीं गायब हो जाती है यह बात दूत धर्मराज और नारद जी को बतलाते हैं नारद जी पुनः पृथ्वी लोक में भोलाराम की आत्मा को ढूंढने के लिए आते हैं क्या नारद जी को भोलाराम की आत्मा मिल पाती है आखिर भोलाराम की आत्मा गायब कहां हो गई हरिशंकर परसाई द्वारा लिखी रोचक व्यंग कहानी भोलाराम का जीव सुनते हैं अमित तिवारी जी की आवाज में
मगर मैं सोचता हूँ – आदमी क्यार चूहे से भी बद्तर हो गया है? चूहा तो अपनी रोटी के हक के लिए मेरे सिर पर चढ़ जाता है, मेरी नींद हराम कर देता है। इस देश का आदमी कब चूहे की तरह आचरण करेगा? लेखक ऐसा क्यों सोच रहा है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं हरिशंकर परसाई के द्वारा लिखी गई कहानी चूहा और मैं ,निधि मिश्रा की आवाज में
शोध में पुरातत्व विभाग को एक सन 1950 ईस्वी की स्मारक मिलती है जिसमें खुदी हुई चार पंक्तियां होती है कवि का नाम गोवर्धन दास लिखा होता है पुरातत्व विभाग को गोवर्धन दास के बारे में पहले से कुछ भी ज्ञात नहीं होता है गोवर्धन दास कवि कैसे बना क्या उसका है उसका इतिहास और पुरातत्व विभाग में उनके विषय में क्या लिखा पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं हरिशंकर परसाई द्वारा लिखी गई कहानी सन् 1950 ईसवी
कहानी में सुमित एक अपने कॉलेज की ही मुस्लिम लड़की सिदरा से अपने प्यार का दावा करता है हिज़ाब से सिर्फ उसकी खूबसूरत आकर्षित कर देने वाली आंखों को देख कर | दूसरी ओर मुस्लिम कौम के ही एक दूसरे युवक जीशान भी सिदरा से अपने प्यार का दावा करता है किंतु सिदरा हिज़ाब हटाकर अपना से चेहरा दिखाती है तब क्या होता है? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जुनैदद्वारा लिखी गई कहानी हिज़ाब ,अमित तिवारी की आवाज में
बद्री प्रसाद अपनी सरकारी नौकरी के कारण मुंबई में रहते हैं जबकि उनकी पत्नी उमा अपने दोनों बच्चों के साथ एक अलग शहर में है उमा एक अध्यापिका है बद्री प्रसाद चाहते हैं अपनी नौकरी छोड़कर उनके साथ मुंबई में रहे किंतु उमा अपनी नौकरी छोड़ना नहीं चाहती है बद्री प्रसाद इन परिस्थितियों में क्या निर्णय लेते हैं जाने के लिए सुनते हैं कहानी फैसले
एक पुरुष का स्त्री के बिना कोई अस्तित्व नहीं होता है ,कैलाश की परवरिश ऐसे माहौल में हुई है जहां पर स्त्रियों की उपेक्षा की जाती है कैलाश के जीवन में जब मांडवी का प्रवेश होता है तो उसकी इस सोच में बदलाव आता है सुनते हैं कृष्णकांत के द्वारा लिखी गई कहानी पुनर्जन्म ,अमित तिवारी जी की आवाज में
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बुराई और अपराध के दलदल में एक बार इंसान धसता है ,तो फिर लाख कोशिशों के बावजूद वह निकल नहीं पाता | सत्ता की चकाचौंध में इंसान अपना जमीर अपना सब कुछ गवा देता है | ऐसी कहानी है एक युवा लड़के अभिनव सिंह की क्या होता है उसके साथ ?जानते हैं कहानी “गिरता सूरज “ में ….
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दिनांक की किताब का विमोचन होना था उसने इस कार्यक्रम हेतु कुछ प्रतिष्ठित लोगों को बुलाने का मन बनाया किंतु समस्या यह थी उन लोगों की आपस में बनती नहीं थी इस बात का प्रभाव किस प्रकार दिनांक किताब के विमोचन पर पड़ा जाने के लिए सुनते हैं अभिज्ञात द्वारा लिखी गई कहानी अंदर की मौत अमित तिवारी जी की आवाज में
56 वर्षीय विधुर एक 18 वर्षीय युवती रीता से विवाह कर लेते हैं किंतु रीता कभी भी उन्हें अपना पति के रूप में स्वीकार नहीं कर पाती है बल्कि उनके पुत्र रमेश को अपना पति स्वीकार करती है अब यह स्थिति धर्म संकट में डालती है ऐसी स्थिति में समाज इस बात को स्वीकृति देगा कि नहीं पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं अमृतलाल नागर की लिखी कहानी धर्म संकट सुमन की आवाज में सुमन वैद्य जी की आवाज में
अपनी भावी बहू को ले कर मेरे भी कुछ सपने थे, अरमान थे और बेटा अपनी पसंद से शादी करे मुझे उसमें भी कोई एतराज़ नहीं था। मगर जब ध्रुव ने मीतू यानी मैत्रीय को मेरे सामने ला कर खड़ा किया तो उस दुबली पतली , कटे बालों और ज़ींस टी शर्ट वाली लड़की में मैं अपनी बहू देख ही नहीं पा रही थी । शादी के बाद उसने इस घर को बड़ी सहजता से अपना लिया था पर मैं ना जाने क्यों उसको अपना नहीं पा रही थी । ना जाने क्यों उसकी हर छोटी बात भी मुझे नागवार हो जाती थी .” क्या मीतू अपनी सासू माँ को अपने स्नेहबँध में बांध सकी … सुनिए मालती जोशी जी की कहानी स्नेहबँध मे
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बुराई और अपराध के दलदल में एक बार इंसान धसता है ,तो फिर लाख कोशिशों के बावजूद वह निकल नहीं पाता | सत्ता की चकाचौंध में इंसान अपना जमीर अपना सब कुछ गवा देता है | ऐसी कहानी है एक युवा लड़के अभिनव सिंह की क्या होता है उसके साथ ?जानते हैं कहानी “गिरता सूरज “ में ….
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जहाँ चील की आँखें अपने लक्ष्य को देख कर वार करती हैं, वहाँ वे अदृश्य चीलें अंधी होती हैं, और अंधाधुंध हमला करती हैं। उन्हें झपट्टा मारते हम देख नहीं पाते और हमें लगने लगता है कि जो कुछ भी हुआ है, उसमें हम स्वयं कहीं दोषी रहे होंगे। नायक की पत्नी शोभा नायक के साथ नहीं रहती है अचानक एक दिन नायक को शोभा एक पार्क में दिखाई देती है| नायक फिर से शोभा से मिलना चाहता है |क्या नायक का शोभा से पुनः मिलन हो पाएगा ? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी चीले, सुमन वैद्य जी की आवाज में…
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