वो पड़ोसी के घर से घर जैसे सम्बंध होना, वो बचपन से लेकर बड़े होने तक छतों पर जमने वाली महफ़िलों का साथ हिस्सा बनना, वो पसंदो का मिलना, वो साथ वक़्त बिताना .. वो एक दूसरे को हर बात बताना , वो एक दूसरे से हर बात पूछना… क्या ये सारे लक्षण प्यार के नहीं है ? नयना और अनुराग … प्यार ही था .. और भाभी ने तो बात भी बढ़ा दी थी …प्यारी सी कहानी का अलग सा मगर प्यार सा अंत जाने के लिए सुनिए – अंज़ू शर्मा की लिखी कहानी – “छत वाला कमरा और इश्क़ वाला लव “
बचपन कितना मासूम होता है | कहानी 6- 7 साल की छोटी बच्ची की है जिसका खुद का दिया हुआ नाम है रानी मुखर्जी |बच्ची को एक परिवार गोद लेने के लिए आता है किंतु बच्ची इस बात से पूरी तरीके से अनभिज्ञ है | क्या होता है आगे कहानी में जाने के लिए सुनते हैं संध्या त्रिपाठी जी के द्वारा लिखी गई कहानी रानी मुखर्जी की गुड़िया,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में आवाज में
जबसे निशीथ साथ चलते- चलते अचानक अजाने मोड पर मुड ग़या था तो ठिठक कर उस चौराहे पर उसके आस-पास फुरसत ही बाकि रह गई थी और एक अंधेरा खाली कोना। बस एक सप्ताह और वह उबर आई थी नई जीजिविषा के साथ.. एक आत्मनिर्भर आत्मविश्वासी लड़की के व्यक्तित्व मे एक चुंबकत्व होता है। केतकी रेडियो स्टेशन मे काम करती थी. खूबसूरत थी । बस अगर शादी नहीं करी तो लोगों को बाते बनाने का मौका मिल जाता है। जानिए नायिका केतकी के जीवन मे आने वाले कई उतार-चढ़ावों को और उसका हर बार परिस्थिति को हरा कर आगे बढ़ने की यात्रा , जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ की लिखी कहानी एक नदी ठिठकी सी”, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
कुंभ मेला केवल आस्था और परंपरा का पर्व नहीं, यह खगोलीय घटनाओं और ज्योतिषीय गणनाओं से भी गहराई से जुड़ा है। कुंभ का आयोजन तब होता है जब ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बनता है, जो इसे अत्यधिक पवित्र बनाता है।
ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव:
जब गुरु (बृहस्पति) सिंह, कुंभ, या अन्य विशेष राशियों में प्रवेश करते हैं और सूर्य और चंद्रमा की स्थिति अनुकूल होती है, तब कुंभ मेले का समय तय होता है। यह संयोग सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और इसे आत्मा की शुद्धि के लिए उपयुक्त बनाता है।
ज्योतिष के अनुसार:
कुंभ में स्नान और ध्यान करने से व्यक्ति के जीवन में शुभता, शांति और आध्यात्मिक उन्नति आती है। यह खगोलीय शक्तियों के माध्यम से आत्मा और ब्रह्मांड के बीच के संबंध को सुदृढ़ करता है।
गाथा के साथ जानिए कुंभ और ज्योतिष के इस अद्भुत संगम की कहानियां।
कहानी का नायक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है |उसकी एक शिष्या शाश्वती उसी के मार्गदर्शन में हिंदी साहित्य में पी.एच.डी कर रही है| शाश्वती का अपने गुरु के प्रति एक अलग प्रकार का आत्मीय रिश्ता जुड़ जाता है जिसके कारण प्रोफेसर साहब की जिंदगी में उथल-पुथल हो जाती है | गुरु और शिष्या के संबंधों के बीच क्या होगा? जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ जी द्वारा लिखी गई कहानी शाश्वती ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज..
एक साधारण-सी बस यात्रा में
युवा संदीप और प्रतीक्षा की अनायास मुलाकात होती है।
संदीप रोज़ की तरह ऑफिस जा रहा है,
और प्रतीक्षा भी अपने काम के सिलसिले में
उसी ऑफिस की ओर निकली है।
बस की भीड़, रास्ते की हलचल और
कुछ अनकहे क्षणों के बीच
जब दोनों के बीच बातचीत शुरू होती है, तो यह मुलाकात केवल संयोग नहीं रह जाती।
बातों-बातों में दोनों को यह एहसास होने लगता है कि उनके जीवन की राहें, संघर्ष, ख़ामोशियाँ और सपने कहीं न कहीं एक-दूसरे से मिलते हैं। क्या है संदीप और प्रतीक्षा के जीवन की वह समानता जो दो अजनबियों को एक पल में अपना-सा बना देती है? क्या यह सिर्फ़ इत्तेफ़ाक़ है या जीवन का कोई गहरा संकेत?
इन्हीं सवालों, भावनाओं और मानवीय संवेदनाओं से बुनी संजय विद्रोही की भाव-विभोर कर देने वाली कहानी “हम एक से”
सुनिए पूजा श्रीवास्तव की आत्मीय आवाज़ में—
केवल Gaatha पर।
22- 23 साल कीकी साल कीएकखूबसूरत युवती रेस्तरां में बैली डांसर है |उसकी विवशता ने उसे बेली डांसर बना दिया है किंतु अब यही डांस उसका जीवन है, उसकी रोजी -रोटी है|इसके चलते ही वह अपनी बीमार मां का इलाज करा रही है |बेहद मार्मिक ,संवेदना से भरपूर अंजना वर्मा जी के द्वारा लिखी गई कहानी बेली डांस ,सुनते हैं विनीता श्रीवास्तव की आवाज में…
राब की करामात एक हास्य कहानी है। सुनिए ससुराल मे एक शर्मीले दामाद जी का क्या हाल हुआ जब उन्हें राब यानी की खीर बहुत पसंद आ गयी !!
पँचकौड़ी मिरदंगिया एक छोटी जात का बूढ़ा कलाकार है |जो मृदंग बजाता है |पहले तो लोग उसी कला को पसंद करते थे ,किंतु धीरे-धीरे लोग उससे अलग होते गए | पँचकौड़ी मिरदंगिया को एक 10 से 12 साल के लड़के मोहना से विशेष लगाव होता है और उसे अपने द्वारा गाए रसप्रिया सुनाना और सिखाना चाहता है |क्या है मोहना और मिरदंगिया का रिश्ता पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं फणीश्वर नाथ रेणु द्वारा लिखी गई कहानी रसप्रिया , सुमन वैद्य जी की आवाज में
गुलियाना का एक ख़त ….जिसके नाम का अर्थ है फूलों सी औरत ……पर वह लोहे के पैरों से लगातार दो साल चल कर युगोस्लाविया से चल कर अमृता तक आ पहुंची | गुलियाना की कहानी इस दुनिया के किसी भी देश की नारी की कहानी है। ये कहानी अमृता प्रीतम ने दशकों पहले लिखी थी लेकिन आज भी ख़त के वो सवाल वहीं खड़े हैं
ईश्वर से जब हम अपने को पूरी तरीके से जोड़ लेते हैं तब जीवन में किसी भी वाहय शक्ति का भय से पूर्णतया मुक्त हो जाते हैं |
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