हर बात को जहाँ तक हो, सँवारना चाहिए। । सूर्यकांत त्रिपाठी जी की लिखी कहानी गधा और मेंढक सुनते हैं निधि मिश्रा की आवाज में
जो अपनी मदद करता है, ईश्वयर उसी की मदद करते हैं।कैसे ?जानते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा लिखी गई कहानी महावीर और गाड़ीवान, निधि मिश्रा की आवाज में
होली का मौसम ऐसा सुहावना होता है, ना केवल इंसान ही नहीं अपितु प्रकृति भी तरह-तरह के रंगों से रंग जाती है….
शक्तिसत्य पर विजय पाती हैबात की सार्थकता समझने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी जी के द्वारा लिखी गई कहानी शिकार को निकला शेर,निधि मिश्रा की आवाज में
एक जहाज के कप्तान से एक सौदागर उसके पिता की मृत्यु के बारे में प्रश्न पूछता है वह जानना चाहता है कि उसे वही कार्य करने में डर क्यों नहीं लगता जिस कारण उसके पिता की मृत्यु हुई कप्तान क्या उत्तर देता है ? इस छोटी सी कहानी से क्या सीख मिलती है जाने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा लिखी गई कहानी सौदागर और कप्तान और निधि मिश्रा जी की आवाज में
एक कंजूस व्यक्ति के पास बहुत सारा सोना था लेकिन वह उसका सदुपयोग ना करके उसे जमीन में गाडे रखता था ।एक दिन उसका यह सारा सोना चोरी हो गया। इस बात से कंजूस को क्या सीख मिली और उसने क्या किया जाने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा लिखी गई कहानी कंजूस और सोना निधि मिश्रा जी की आवाज में
कहानी पाकिस्तान हिंदुस्तान बंटवारे के समय की है| एक परिवार पाकिस्तान से पटियाला आया हुआ है |उसके यहां जो भंगन मक्खनी काम कर रही है, वह एक अति सुंदर युवती है | जो अपने भाई- भाभी के साथ रहती है |हिंदू -मुसलमानों में अचानक दंगे शुरू हो जाते हैं | दंगों का फायदा उठाते हुए कुछ राक्षस प्रवृत्ति के लोग मक्खनी के साथ बलात्कार करते हैं क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सविन्दरसिंह उप्पल के द्वारा लिखी गई कहानी राक्षस, निधि मिश्रा की आवाज में
कहानी एक सफेद मखमली कबूतर और एक प्यारे से 5 साल के बच्चे पारस के बीच की है |कबूतर और उस बच्चे के बीच में किस तरह प्रेम का रिश्ता बन जाता है| इसको दर्शाती हुई कहानी है सुधा भार्गव के द्वारा लिखी गई कहानी लपक लड्डू, निधि मिश्रा की आवाज में
अभी भगवान् वशिष्ठजी के वचन पूर्ण भी नहीं हुए थे कि सहसा दौड़ता हुआ एक मनुष्य आकर उनके चरणों पर गिर पड़ा, और कहने लगा-”भगवन्! आप ही इस संसार में ‘ब्रह्मर्षि’ कहलाने के योग्य हैं, लोग मुझे वृथा ही महर्षि कहते हैं। इस पूरी कथा को जाने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी ब्रह्मर्षि ,निधि मिश्रा की आवाज में
कहानी चंद्रदेव और मालती की है |यह दोनों पति-पत्नी एक दिखावटी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं |वास्तव में आंतरिक रूप से एक दूसरे से अप्रसन्न है| चंद्रदेव, मालती को लेकर पहाड़ पर जाता है जहां उनकी मुलाकात उनकी परिचारिका बूटी से होती है| बूटी अपने विवाह को लेकर बेहद उत्साहित है| यह देखकर क्या मालती के मन में अपने वैवाहिक जीवन के प्रति परिवर्तन आता है? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी परिवर्तन .निधि मिश्रा की आवाज में…
नाहर एक हिंदुस्तानी युवक है उसने एक विदेशी लड़की कैथी से विवाह किया है और विवाह के बाद जो विदेश में ही रहने लगा | कैथी ने इस विवाह को लेकर नाहर के सामने एग्रीमेंट कराया है | एग्रीमेंट नाहर के लिए एक जी का जंजाल साबित हो रहा है |क्या होगा आगे कहानी में नाहर और कैथी का विवाह टिक पाएगा| जानने के लिए सुनते हैं सुदर्शन प्रियदर्शिनी की लिखी कहानी आचार संहिता, निधि की आवाज में..
कहानी की नायिका नीरजा एक अति महत्वाकांक्षी महिला है| अपनी महत्वाकांक्षा को अहमियत देते हुए नीरजा अपना वैवाहिक जीवन को उपेक्षित करती है| आज उसे समझ में आ रहा है कि वैवाहिक जीवन कितना शाश्वत है क्या नीरजा अपनी उस मृगतृष्णा से बाहर आ पाएगी |
महंगू एक मिल का गरीब मजदूर है | कहानी के एक प्रसंग के बाद वह अमीर बनने का सपना देखने लगता है और इसी दिशा में काम भी शुरू कर देता है, किंतु उसके कुछ गलत निर्णय के कारण वह सपना उसे बहुत महंगा पड़ता है | पूरी कहानी जाने के लिए सुनते कहानी ‘फूल बागान का सपना ‘….
बड़े-बूढ़े कुछ झूठ नहीं कह गए हैं कि परदेश जाए तो ऐसे चौकन्ने रहें, जैसे बुढ़ापें में ब्याह करने वाला अपनी जवान जोरू से रहता है। हम चौकन्नेपन क्या, दसकन्नेपन की सिफारिश करते हैं, वरना ईश्वर न करे किसी पर ऐसे बीते, जैसी परदेश में हम पर बीती, यानी हम साढ़े पांच हाथ के जीते-जागते मौजूद रहे और परदेश ने हमारे मुंह पर कानूनी तमाचा मारकर कुछ देर के लिए यह साबित कर दिया कि हम फौत शुद यानी मर गए।कहानी का पात्र जो परदेश में है वहां उसके साथ क्या घटना घटती है पूरा वृतांत जानने के लिए सुनते हैं अमृतलाल नागर जी के द्वारा लिखी गई कहानी जब बात बनाए ना बनी,अमित तिवारी जी की आवाज में
द्रौपदी जब अपना शील खो रही थी , तब आप कहां थे कृष्ण ??? कृष्ण और उद्धव जी के बीच में चल रहे संवाद को उस संदर्भ मे उस प्रसंग को प्रेषित करता है जब धर्मराज युधिष्ठिर, दुर्योधन से द्युत क्रीडा में पराजित हो गए थे | भगवान श्री कृष्ण उसी संदर्भ में उद्धव को स्पष्टीकरण देते हैं | सुनते हैं इस संवाद को अमित तिवारी जी की आवाज में……
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pragati sharma sharma