यह दिन पहली बार 20 अक्टूबर 2010 को मनाया गया था और तब से हर 5 साल में मनाया जाता है|विश्व सांख्यिकी दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा की गई थी।2020 में तीसरा विश्व सांख्यिकी दिवस मनाया जाएगा| इस बार की थीम- कनेक्टिंग द वर्ल्ड विद डाटा वी कैन ट्रस्ट रखी गई है’|
ऑपरेशन पवन: श्रीलंका की धरती पर भारतीय सेना का खतरनाक मिशन|इस मिशन के बाद भारतीय सेना ने लिट्टे को काफी हद तक कमज़ोर कर दिया था. 1987 था जब भारतीय शांति सेना ने श्रीलंका में जाफना को लिट्टे के कब्जे से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन पवन शुरू किया था।
7 अक्टूबर, 1944 को संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावित ढांचे को प्रकाशित किया गया। इनमें प्रस्तावों पर आगे चलकर याल्टा सम्मेलन (फरवरी 1945) में विचार-विमर्श किया गया, जहां सोवियत संघ, अमेरिका एवं ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक हुई थी।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म भारतीय इतिहास में सदा अविस्मरणीय रहेगा । गांधी जी के अहिंसक आंदोलन ने भारत को आज़ादी दिलाने में अपनी अभूतपुर भूमिका निभाई। अहिंसा के पुजारी के रूप में पूरी दुनिया ने उन्हें अपना गुरु माना। राजनीतिक और आध्यात्मिक नेता के रूप में वह सदैव याद किए जाएंगे।उनके द्वारा किए गए प्रमुख आंदोलन सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, चंपारन , भारत छोड़ो आंदोलन हैं। दांडी मार्च भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पडाव रहा ।इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ़ भारत की आज़ादी की मांग करते हुए जिसने हंसते-हंसते अपनी अपनी आखिरी सांस भी कुर्बान करने में ऐसी निडरता दिखाई जो भारतीय इतिहास के पन्नों में एक मिसाल बन अंकित हो गई। महान क्रांतिकारी भगत सिंह के यह स्वर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ सबकी रगों में देशभक्ति का संचार कर गया।
संयुक्त राष्ट्र दिवस 24 अक्टूबर को 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक निर्माण की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है
इटली के विश्व संरक्षण संगठन सम्मेलन में ‘विश्व पशु दिवस’ मनाने की घोषणा की गई। जर्मन लेखक ज़िमर्मन ने1925 में बर्लिन में प्रथम विश्व पशु दिवस का आयोजन किया। उनके अथक प्रचार एवं प्रसार के कारण 1931 में वैश्विक स्तर पर विश्व पशु दिवस मनाने की शुरुआत की गई ।जिसका उद्देश्य पशु कल्याण मानकों में सुधार करना था।
तुम दिल पर क्यों लगाती हो। कहने दिया करो जो कहते हैं। हम तो अब तिड़के घड़े का पानी ठहरे। आज हैं, कल नहीं रहेगें। फेंकने दो कंकर-पत्थर। जो दिन कट जाएं, अच्छा है।”कहानी में वृद्ध और वृद्धा अपने बेटे -बहु के साथ रह रहे हैं |वृद्धावस्था में क्या है उनकी स्थिति ?जानने के लिए सुनते हंं सुभाष नीरव के द्वारा लिखी गई कहानी तिड़के घड़े , शिवानी आनंद के द्वारा
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