विश्व पोलियो दिवस मनाने की शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल ने की है। इसकी शुरुआत पोलियो टीका की खोज करने वाली टीम के सदस्य जोनास साल्क के जन्मदिन पर की गई है। पोलियो वैक्सीन की खोज साल 1955 में की गई थी। वहीं, पोलियो संक्रमितों के सबसे अधिक मामले साल 1980 में देखे गए थे
महेंद्र लाल सरकार भारत के चिकित्सक, समाज सुधारक और वैज्ञानिक के रूप में प्रसिद्ध हुए ।इनके द्वारा ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस’ की स्थापना की गई।
पांडुरंग शास्त्री एक दार्शनिक, आध्यात्मिक नेता, समाज सुधारक के रूप में जाने वाले एक जाना- माना नाम है। उनके द्वारा स्वाध्याय आंदोलन और स्वाध्याय परिवार की स्थापना की गई ।श्री भगवतगीता पर आधारित आत्मज्ञान आंदोलन उनमें से एक है। उनके जन्म दिवस को ‘मनुष्य गौरव दिन’ के रूप में मनाया जाता है 1999 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
आज ही के दिन 24 अक्टूबर 1946 को व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज (White Sands Missile Range) से सैनिकों और वैज्ञानिकों ने एक वी-2 मिसाइल (V-2 missile) लॉन्च की, जिसमें 35-मिलीमीटर मोशन पिक्चर कैमरा था. इसके जरिए अंतरिक्ष से पृथ्वी की पहली तस्वीर ली गई. इन तस्वीरों को बाहरी अंतरिक्ष (Outer Space) की शुरुआत से ठीक ऊपर 65 मील की ऊंचाई पर लिया गया था. इन तस्वीरों को जिस कैमरे में लिया गया था, वो लैंडिंग के दौरान क्रैश से इसलिए बच गया, क्योंकि इसे स्टील कैसेट में बंद किया गया था. ये पहली बार नहीं था, जब पृथ्वी की कर्व को तस्वीर में देखा गया था.
राष्ट्रीय प्रेस दिवस (National Press Day) हर साल 16 नवंबर को भारत में स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। इस दिन भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक नैतिक प्रहरी के रूप में कार्य करना शुरू किया कि प्रेस उच्च मानकों को बनाए रखे और किसी भी प्रभाव या खतरों से विवश न हो।…
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्यार से ‘चाचा नेहरू’ भी कहा जाता था और उनकी मृत्यु के बाद, उनके जन्मदिन को भारत में ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
SSC Aspirants को इस Mindset के साथ पढ़ना चाहिए📋💯 – Vikrant Rajawat – Josh Talks Hindi
द्रौपदी के सत्य, तेज और सतीत्व के आगे निस्तेज हो मदान्ध दुर्योधन, दु:शासन, आदि को द्रौपदी पुनः ललकारती हुई कहती है तुम्हारे भरसक प्रयास करने के बावजूद तुम मेरा बाल बांका भी ना कर सके क्योंकि तुम सब अधर्म अधर्म और छल कर रहे हो और तुम्हारे द्वारा किए गए अधर्म के लिए तुम्हें भविष्य में कभी क्षमा नहीं मिलेगी|
विशेषतः महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करने वाले समाज- सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म दिवस
द्रौपदी स्वाभिमानिनी है। वह अपमान सहन नहीं कर सकती। वह अपना अपमान नारी जाति का अपमान समझती है। वह नारी के स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी बात को स्वीकार नहीं कर सकती। वह अन्यायी और अधर्मी पुरुषों से संघर्ष करने वाली है। जानते हैं कैसे ?द्वारिका प्रसाद महेश्वरी के द्वारा लिखी गई सत्य की जीत ( भाग – 2),नयनी दीक्षित की आवाज़ में
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