5 रुपये की भेल पूरी खाने के पैसे नहीं होते थे Rags To Riches Ganesh Varahade Josh Talks Hindi
Credit: Josh Talk
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कहानी “जो है उस धूसर सन्नाटे में “,धीरेंद्र अस्थाना जी ने बहुत ही सजीव ढंग से प्रस्तुत किया है कि आज की दुनिया में किसी भी तरह की संवेदना लोगों में नहीं बची है| खासतौर पर मीडिया, अखबार और किसी भी तरह के सोशल अकाउंट पर| आज की तारीख में किसी का जीना- मरना इस बात का मायने नहीं रखता कि वह इंसान इंपॉर्टेंट था या नहीं |लोग मरते हैं ,मर जाते हैं इस तरह की स्टेटमेंट हमें अक्सर सुनने को मिल जाते हैं |आज का समय जिसमें हम लोग जी रहे हैं, बहुत ही असंवेदनशील है | इस पूरे समाज में जो असंवेदनशील है ,उसमें एक ऐसा इंसान जो किसी एक की मृत्यु होने पर अपना खुद का व्यक्तित्व ही भूल जाता है इस बात पर आधारित है यह कहानी…
हिमालय पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना 4 नवंबर, 1954 में भारत में पर्वतारोहण को क्रीड़ा के रूप में बढ़ावा देने हेतु की गई थी|1953 में तेंज़िंग नाॅरगे और एडमंड हिलेरी द्वारा एवरेस्ट की चोटी पर पहला मानव कदम रखा गया|
सत्य की जीत के इस प्रसंग में द्युत सभा में युधिष्ठिर जब द्रौपदी को भी हार जाते हैं तब दुशासन द्वारा द्रौपदी का द्युत सभा में चीरहरण करने के आगे बड़ने पर भी समस्त धर्माचार्य भीष्म पितामह ,द्रोणाचार्य ,विदुर सहित सभी इस दृश्य को देख मौन हैं ऐसे में सिर्फ कौरवों में विकर्ण पुरज़ोर विरोध करता है ऐसे में कर्ण क्या कहता है। द्वारिका प्रसाद महेश्वरी के द्वारा लिखी गई महाभारत में द्युत सभा का वर्णन नयनी दीक्षित की आवाज़ में
सुभागी तुलसी महतो और लक्ष्मी की बेटी है जब वह मात्र 11 वर्ष की थी तब से वह विधवा है| सुभागी बेहद मेहनती और संस्कारी लड़की है |तुलसी महतो का पुत्र रामू आलसी और कामचोर है | रामू पिता से बटवारा करवा लेता है | सुभागी अपने मां-बाप की जिम्मेदारी लेती है |मां- बाप के मरने के बाद उसके जीवन में क्या बदलाव आता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद जी के द्वारा लिखी गई कहानी सुभागी भूपेश पांड्या की आवाज में
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