राजा विक्रमादित्य वृद्ध हो गए थे तथा अपना योग बल से उन्होंने यह भी जान लिया था कि उनका अंतिम समय काफी निकट आ गया है विक्रमादित्य की मृत्यु के पश्चात उनका पुत्र सिंहासन पर नहीं बैठ पाया, अंत में उनके पुत्र ने राजा विक्रमादित्य के सिंहासन के लिए क्या और कैसे निर्णय लिया ? इस पूरी कहानी इकत्तीसवीं पुतली कौशल्या विक्रमादित्य की मृत्यु को जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में ..
सुधा अरोड़ाअरोड़ा की लिखी कहानी डेजर्ट फोबिया उर्फ समुद्र में रेगिस्तान ,जिसमें कहानी की नायिका उस पड़ाव में पहुंच चुकी है जब वह बिल्कुल अपने आप को एकाकी महसूस कर रही है | यह एकाकीपन उसके चित्रों में साफ झलक रहा है |आज उसके घर की खिड़की से दिखाई देने वाला गहरा नीला समंदर भी मटमैला होते-होते मानो एक हताश रेगिस्तान में तब्दील हो चुका है | नायिका क्यों ऐसा महसूस कर रही है ?क्यों है नायिका के जीवन में इतना एकाकीपन ?
कहानी का मुख्य पात्र नरेंद्र एक चित्रकार है |उसे कम समय में ही प्रसिद्धि इसलिए प्राप्त हो गई क्योंकि वह जो भी चित्र बनाता था उसमें अपनी सारी योग्यता लगा देता था |नरेंद्र को चित्रकारी में ऐसी महत्वाकांक्षा थी कि वह ऐसा चित्र बनाना चाहता था जिसमें उसकी भावनाएं और विचारों का अद्भुत संगम नजर आए|नरेंद्र को इस संदर्भ में एक कला प्रदर्शनी में चित्र बनाने का मौका प्राप्त हुआ, उस कला प्रदर्शनी के लिए नरेंद्र कौन सा चित्र बनाएं अमर हो जाए ऐसी महत्वाकांक्षा उस की चरम सीमा पर थी |कहानी के अंत में आखिर नरेंद्र ने ऐसा चित्र बनाया, जिससे वह अमर तो हो गया किंतु उस चित्र को बनाने के लिए उसने अपने जीवन की क्या कीमत चुकाई ? यह कहानी का बेहद मार्मिक प्रसंग है |जिसे जान सकते हैं रविंद्र नाथ ठाकुर के द्वारा लिखी गई कहानी अंतिम प्यार में, शिवानी आनंद की आवाज में….
रहमत मियां के बेटे सुक्खन जब गोश्त लेने बाजार गए तो उनकी लापरवाही से पूरे कस्बे में क्या कांड घटित हुआ ?जानने के लिए सुनते हैं सुभाष नीरव द्वारा लिखी गई कहानी एक और कस्बा, शिवानी आनंद की आवाज में
सिंहासन बत्तीसी-तेरहवीं पुतली – कीर्तिमती एक बार राजा विक्रमादित्य ने एक महाभोज का आयोजन किया। उस भोज में असंख्य विद्धान, ब्राह्मण, व्यापारी तथा दरबारी आमन्त्रित थे। भोज के मध्य में इस बात पर चर्चा चली कि संसार में सबसे बड़ा दानी कौन है। इस धरा पर सर्वश्रेष्ठ दानवीर कौन है? इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-तेरहवीं पुतली – कीर्तिमती शिवानी आनंद की आवाज में
विक्रमादित्य के राज्य में एक गरीब दरिद्र ब्राह्मण और भाट रहते थे |दोनों की पुत्रियों के विवाह के लिए उन दोनों के पास धनराशि नहीं थी | विक्रमादित्य ने दोनों की पुत्रियों के विवाह के लिए धन प्रदान किया| किंतु भाट को 1000000 स्वर्ण मुद्राएं ,जबकि ब्राह्मण को कुछ सौ स्वर्ण मुद्राएँ ही प्रदान की | विक्रमादित्य ने इस प्रकार का पक्षपात क्यों किया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी पच्चीसवीं पुतली त्रिनेत्री ईश्वर से आस ,शिवानी आनंद की आवाज में..
राजा विक्रमादित्य ने एक बार अद्भुत- अलौकिक स्वप्न देखा| उस अद्भुत- अलौकिक सपने की उन्होंने ज्योतिषियों से अपने सपने की चर्चा की और उन्हें इसकी व्याख्या करने को कहा। सारे विद्वान और पण्डित इस नतीजे पर पहुँचे कि महाराजाधिराज ने सपने में स्वर्ग का दर्शन किया है तथा सपने का अलौकिक महल स्वर्ग के राजा इन्द्र का महल है। देवता शायद उन्हें वह महल दिखाकर उन्हें सशरीर स्वर्ग आने का निमन्त्रण दे चुके है। किंतु क्या वास्तव में सपने की सत्यता यही साबित हुई इसे जानने के सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी अट्ठाईसवीं पुतली वैदेही स्वर्ग की यात्रा, शिवानी आनंद की आवाज में…
धार्मिक ग्रंथों में राजा बलि के पराक्रमी और दानवीर होने के सारे प्रसंगों का अध्ययन किया |अब उन्होंने उनके दर्शन करने का विचार बनाया, लेकिन उनके दर्शन कैसे हो, इसके लिए उन्होंने अपनी राज-पाट और मोह -माया को त्याग कर कठोर तपस्या प्रारंभ कर दी| उनकी तपस्या से उन्हें पाताल लोक में राजा बलि के दर्शन हो पाए ?उसके बाद क्या हुआ इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सताइसवीं पुतली मलयवती विक्रमादित्य और दानवीर राजा बलि,शिवानी आनंद की आवाज में…
एक बार राजा विक्रमादित्य ने एक युवक- युवती के प्राण नदी के बहाव से बचाने के पश्चात विक्रमादित्य को ज्ञात हुआ कि वे युवक –युवती, भाई -बहन है| विक्रमादित्य ने उस युवती को अपनी मुंह- बोली बहन के रूप मंो स्वीकार कर लिया अब विक्रमादित्य ने किस प्रकार अपनी मुंह- बोली बहन का विवाह योग्य व्यक्ति से कराया? इसके पीछे की कहानी जानने के लिए सुनते हैं इसी की कहानियों में से एक कहानी उन्तीसवीं पुतली मानवती राजा विक्रम की बहन की शादी, शिवानी आनंद की आवाज में..
राजा विक्रमादित्य अद्भुत गुणग्राही थे। वे सच्चे कलाकारों का बहुत अधिक सम्मान करते थे तथा स्पष्टवादिता पसंद करते थे। उनके दरबार में योग्यता का सम्मान किया जाता था। चापलूसी जैसे दुर्गुण की उनके यहाँ कोई कद्र नहीं थी। यही सुनकर एक दिन एक युवक उनसे मिलने उनके द्वार तक आ पहुँचा। शास्त्रों का ज्ञाता था। कई राज्यों में नौकरी कर चुका था। युवक स्पष्टवक्ता होने के कारण उसके आश्रयदाताओं को वह धृष्ट नज़र आया, अतः हर जगह उसे नौकरी से निकाल दिया गया।विक्रमादित्य ने उस युवक की गुणवत्ता को परखा और उसे उचित सम्मान दिया |कैसे?इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानीबाइसवीं पुतली अनुरोधवती राजा विक्रमादित्य और बुद्धि और संस्कार पर चर्चा ,शिवानी आनंद की आवाज में …
Reviews for: Sinhasan Battisi – thirtyone Putli kaushalya (सिंहासन बत्तीसी -इकत्तीसवीं पुतली – कौशल्या)