राजा विक्रमादित्य के परोपकारी होने का वृतांत इस कहानी में मिलता है| राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार अपनी महामंत्री की एकमात्र पुत्री के प्राणों की रक्षा करने हेतु असंभव से दिखने वाली परिस्थितियों को संभव किया और दुर्लभ ख्वांग बूटी लेकर आए जिससे उसके प्राणों की रक्षा की जा सकी? कैसे ??इस रोचक वृतांत जानते हैं सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी इक्कीसवीं पुतली चन्द्रज्योति विक्रमादित्य और दुर्लभ ख्वांग बूटी,शिवानी आनंद की आवाज में…
पर्यावरण संरक्षण के नाम पर, बिना विषय की गंभीरता समझे अपनी किट्टी पार्टी की सहेलियों के साथ श्रीमती खन्ना की पर्यावरण बचाने की मुहीम पर हास्य व्यंग।
एक बार पुरुषार्थ और भाग्य में इस बात पर ठन गई कि कौन बड़ा है। राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार झगड़े का अंत किया ? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-तीसरी पुतली चन्द्रकला
This story contains the description of a tarbooj (watermelon) and the whole world inside it.
देव शक्ति नाम के राजा के एक पुत्र के पेट में एक साँप चला जाता है और वह उसी के पेट में अपना बिल बना लेता है |जिस कारण राजकुमार का शरीर प्रतिदिन अस्वस्थ होता जा रहा है अब आगे क्या होता है राजकुमार के साथ ?पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी दो सांपों की कथा ,सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
बेताल, विक्रमादित्य से पूछता है कि यदि मां और पुत्री में अगर एक ऐसा रिश्ता बन जाए कि पुत्री अपनी मां की ही सास बन जाए और मां ,अपनी पुत्री की बहू.. तो बताओ राजन् कि माँ-बेटी के जो बच्चे हुए, उनका आपस में क्या रिश्ता हुआ ?क्या विक्रमादित्य बेताल के इस प्रश्न का उत्तर दे पाते हैं ,इसे जानने के लिए सुनते हैं बेताल पच्चीसी की कहानियों में से एक कहानी मां -बेटी के बच्चों में क्या रिश्ता हुआ?, शिवानी आनंद की आवाज में..
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