राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाने की शुरुआत 2015 में हुई थी| इंटरनेशनल ब्यूरो और इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी द्वारा इसे आयोजित किया गया था| इस दिन देशभर में लोगों को मिर्गी के लक्षणों, कारणों और उपचार के बारे में जानकारी दी जाती है साथ ही लोगों को अपना अनुभव शेयर करने को मौका भी दिया जाता है|
स्वेज नहर मिस्र में भूमध्य सागर पर बन्दरगाह सईद से दक्षिण की ओर स्वेज शहर (स्वेज की खाड़ी के उत्तरी किनारे पर स्थित) तक 120 मील तक फैली हुई है। नहर मिस्र के बड़े हिस्से को सिनाई प्रायद्वीप से अलग करती है। इसे बनने में 10 साल लगे और इसे आधिकारिक तौर पर 17 नवंबर, 1869 को खोला गया।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ़ भारत की आज़ादी की मांग करते हुए जिसने हंसते-हंसते अपनी अपनी आखिरी सांस भी कुर्बान करने में ऐसी निडरता दिखाई जो भारतीय इतिहास के पन्नों में एक मिसाल बन अंकित हो गई। महान क्रांतिकारी भगत सिंह के यह स्वर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ सबकी रगों में देशभक्ति का संचार कर गया।
यह दिन पहली बार 20 अक्टूबर 2010 को मनाया गया था और तब से हर 5 साल में मनाया जाता है|विश्व सांख्यिकी दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा की गई थी।2020 में तीसरा विश्व सांख्यिकी दिवस मनाया जाएगा| इस बार की थीम- कनेक्टिंग द वर्ल्ड विद डाटा वी कैन ट्रस्ट रखी गई है’|
जीन बैप्टस सीमेन चार्डिन ने 200 से अधिक चित्रों की रचना की। इनका पसंदीदा विषय खेलने वाला बच्चा रहा। घरेलू अंदरूनी शैली के चित्रों का को इन्होंने बखूबी चित्रित किया। उनकी चित्रकारी में बच्चों और घरेलू गतिविधियों को बखूबी दर्शाया गया है
देश के पहले गैर राजनीतिज्ञ राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्दुल कलाम, जिनको उनके विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा। भारत के मिसाइल मैन के नाम से जाने जाने वाले अब्दुल कलाम जी ने मिसाइल प्रणाली को उड़ान दी। ‘पद्म भूषण’ और ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित होने वाले वह एक पहले ऐसे राष्ट्रपति बने जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पूर्व ही ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया गया।
जो अपनी मदद करता है, ईश्वयर उसी की मदद करते हैं।कैसे ?जानते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा लिखी गई कहानी महावीर और गाड़ीवान, निधि मिश्रा की आवाज में
सत्येंद्र नाथ बोस एक महान क्रांतिकारी थे। ये अरविंद घोष के प्रभाव से क्रांतिकारियों के संपर्क में आए। स्वदेशी का प्रचार करने के उद्देश्य से “छात्र भंडार” नामक संस्था बनाई जिसमें युवकों को क्रांतिकारी दल से जोड़ने का कार्य किया। 21 नवंबर 1908 को सत्येंद्र नाथ देश के लिए शहीद हुए।
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