वह खूबसूरत बचपन, जब गर्मियों की छुट्टियां नानी के यहां बिता करती थी ,वह मीठे -गुदगुदाने वाले पलो का खूबसूरत एहसास , अंगोना साहा के साथ…
एक ही मां के अंश यानी सिबलिंग्स,यह रिश्ता बहुत खास होता है वह छोटी-छोटी नोकझोंक, वह साथ-साथ हंसना ,रोना और और अपनी कुछ खास बातों को सिर्फ उनके साथ बांटना |समय की रफ्तार में अगर यह रिश्ते आप से दूर चले गए हैं ,तो फिर से उन्हें अपने नजदीक जरूर लाइए |कैसे? जानते हैं इस खूबसूरत एहसास को, अंगोना साहा के साथ..
कभी आपने यह अनुभव किया है कि जिंदगी में कुछ रिश्ते जो हमारे खून के नहीं होते ,फिर भी हमारे जीवन में एक विशेष स्थान रखते हैं |उन्हें भूलना असंभव होता है |ऐसे ही एक रिश्ते का अनुभव अंगोना साहा हमारे साथ बांट रही है…
सबसे खूबसूरत रिश्ता है दोस्ती का ,यही ऐसा रिश्ता है जो हमें किसी भी दायरे में नहीं बांधता ,हम जैसे हैं ,वैसे ही आप लाए जाते हैं| कैसे? जानते हैं इस खूबसूरत दोस्ती के रिश्ते के बारे में, अंगोना साहा के साथ..
सबसे खूबसूरत रिश्ता है दोस्ती का ,यही ऐसा रिश्ता है जो हमें किसी भी दायरे में नहीं बांधता ,हम जैसे हैं ,वैसे ही आप लाए जाते हैं| कैसे? जानते हैं इस खूबसूरत दोस्ती के रिश्ते के बारे में, अंगोना साहा के साथ..
एक छोटे बच्चे की पूरी दुनिया उसकी मां में बसी होती है वह अपनी हर छोटी -बड़ी बात के लिए सिर्फ अपनी मां पर ही निर्भर रहता है किंतु जैसे समय के साथ वह परिपक्व होने लगता है वह मां जो दुनिया का ज्ञान उसे दे रही थी, आज अपने बच्चों से ही हर बात पूछती है ?क्या इस बदलाव में उन दोनों के बीच का स्नेह का बंधन वैसा ही रहता है? जानते हैं इस खूबसूरत अनुभव को, अंगोना साहा के साथ
एक दिन एक कवि किसी धनी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह धनवान खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। किंतु धनवान व्यक्ति किस प्रकार उस कवि का हृदय तोड़ता है और फिर बीरबल किस प्रकार धनवान व्यक्ति को इस बात के लिए सबक सिखाते हैं, पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कहानी कवि और धनवान आदमी ,अंजू जेटली की आवाज में
कीचक, विराट नरेश का साला था| अज्ञातवास के समय पांडू पुत्रों ने विराट की राजधानी में निवास किया था |उनके साथ उनकी पत्नी द्रौपदी भी थी |ऐसे में कीचक की कामुक दृष्टि द्रौपदी के ऊपर पड़ी| द्रौपदी ने इस बात को भाँप लिया अब कीचक को किस प्रकार इस बात का दंड मिला? महाभारत की कहानियों में से एक कहानी कीचक का वध के पूरे प्रसंग को सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में …
महाभारत के युद्ध में गुरु द्रोणाचार्य जी की मृत्यु के पश्चात कर्ण को कौरवों का सेनापति बनाया गया |कर्ण के युद्ध कौशल से पांडु पुत्रों की हार सुनिश्चित लगने लगी ,किंतु कर्ण का सामना जब सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी अर्जुन के सामने हुआ तो युद्ध अपने चरम सीमा पर पहुंच गया | कर्ण किसी भी तरीके से अर्जुन से धनुर्विद्या में कम ना था किस प्रकार पांडु पुत्र अर्जुन के द्वारा कर्ण का वध हुआ? इस प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी कर्ण और अर्जुन का संग्राम और कर्ण वध, शिवानी आनंद की आवाज में…
शल्य पर्व में कर्ण की मृत्यु के पश्चात कृपाचार्य द्वारा सन्धि के लिए दुर्योधन को समझाना, सेनापति पद पर शल्य का अभिषेक, मद्रराज शल्य का अदभुत पराक्रम, युधिष्ठिर द्वारा शल्य और उनके भाई का वध, सहदेव द्वारा शकुनि का वध, बची हुई सेना के साथ दुर्योधन का पलायन, दुर्योधन का ह्रद में प्रवेश, व्याधों द्वारा जानकारी मिलने पर युधिष्ठिर का ह्रद पर जाना, युधिष्ठिर का दुर्योधन से संवाद, श्रीकृष्ण और बलराम का भी वहाँ पहुँचना, दुर्योधन के साथ भीम का वाग्युद्ध और गदा युद्ध और दुर्योधन का धराशायी होना, क्रुद्ध बलराम को श्री कृष्ण द्वारा समझाया जाना, दुर्योधन का विलाप और सेनापति पद पर अश्वत्थामा का अभिषेक आदि वर्णित है|इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानीशल्य पर्व ,शिवानी आनंद की आवाज में…
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