एक बार राजा विक्रमादित्य ने एक युवक- युवती के प्राण नदी के बहाव से बचाने के पश्चात विक्रमादित्य को ज्ञात हुआ कि वे युवक –युवती, भाई -बहन है| विक्रमादित्य ने उस युवती को अपनी मुंह- बोली बहन के रूप मंो स्वीकार कर लिया अब विक्रमादित्य ने किस प्रकार अपनी मुंह- बोली बहन का विवाह योग्य व्यक्ति से कराया? इसके पीछे की कहानी जानने के लिए सुनते हैं इसी की कहानियों में से एक कहानी उन्तीसवीं पुतली मानवती राजा विक्रम की बहन की शादी, शिवानी आनंद की आवाज में..
यह कहानी एक बेहद शरारती लकड़े पाठक की है| जिसकी शरारतों से तंग हो,उसकी मां उसे मामा के संग भेज देती हैं। शुरुआत में तो पाठक नई जगह जाने के उत्साह में राज़ी हो जाता है लेकिन वहां घर और अपने लोगों से दूरी पाठक के लिए असहनीय हो जाती है और वह घर वापसी के उपाय करता है।
राजा कृष्णदेव राय बहुत बड़े कला प्रेमी थे| इस संदर्भ में कलाकारों को तेनाली रामा की सलाह से सम्मानित भी करते थे| इस बात से राज दरबार के अन्य लोग तेनालीरामा से चिढ़ते थे उन्होंने तेनाली रामा के ऊपर रिश्वतखोर होने का आरोप लगा दिया| अब तेनालीरामा ने इस आरोप को कैसे गलत सिद्ध किया ?इस रोचक किस्से को सुनते हैं तेनाली रामा की कहानी में से एक कहानी रिश्वत का खेल सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में….
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