द्यूत क्रीड़ा में युधिष्ठिर के द्वारा द्रौपदी को भी दाँव लगाने के पश्चात, हार जाने के पश्चात, दुर्योधन ने अपने अनुज भाई दुशासन से से भरी सभा में द्रोपदी का चीर हरण करने का आदेश दिया |इसके उपरांत क्या हुआ?इस कथा को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी द्रौपदी चीर हरण ,शिवानी आनंद की आवाज में…
आचार्य गुरु द्रोणाचार्य के सभी शिष्यों में अर्जुन उनके प्रिय शिष्य थे |एक बार आचार्य गुरु द्रोणाचार्य ने उन्हें और अपने सभी शिष्यों को एक लक्ष्य भेद करने का आदेश दिया ,किंतु अर्जुन के द्वारा उस लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के गुण से आचार्य गुरु द्रोणाचार्य बहुत प्रभावित हुए| आचार्य गुरु द्रोणाचार्य ने अर्जुन को एक अमोघ शक्ति बाण प्रदान किया| अमोघ शक्ति बाण का क्या विशेषता है ?इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी अर्जुन की अमोघ शक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में..
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