भगवान श्री कृष्ण के द्वारा इस लोक का त्याग करने के पश्चात ,पांडु पुत्र अर्जुन व अन्य भाई ,माता कुंती, द्रौपदी तथा अन्य सभी ने एक-एक करके अपनी देह को त्याग दिया |किंतु युधिष्ठिर ने संयास ले कर ब्रह्म ज्ञान प्राप्त किया और माना जाता है कि स्वयं देवराज इंद्र के द्वारा लाए गए रथ पर आरूढ़ होकर युधिष्ठिर ने स्वर्ग प्रस्थान किया| इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी पाण्डवों का हिमालय गमन, शिवानी आनंद की आवाज में…
आचार्य गुरु द्रोणाचार्य के सभी शिष्यों में अर्जुन उनके प्रिय शिष्य थे |एक बार आचार्य गुरु द्रोणाचार्य ने उन्हें और अपने सभी शिष्यों को एक लक्ष्य भेद करने का आदेश दिया ,किंतु अर्जुन के द्वारा उस लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के गुण से आचार्य गुरु द्रोणाचार्य बहुत प्रभावित हुए| आचार्य गुरु द्रोणाचार्य ने अर्जुन को एक अमोघ शक्ति बाण प्रदान किया| अमोघ शक्ति बाण का क्या विशेषता है ?इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी अर्जुन की अमोघ शक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में..
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