विक्रमादित्य के द्वारा मृग के रूप में श्रापित राजकुमार को मृग रूप से मुक्ति दिला कर, पुनः राजकुमार को उसका राज्य वापस दिलाने की एक रोचक घटना है| जिसे सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी तीसवीं पुतली जयलक्ष्मी मृग रूप से मुक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में..
याज्ञवल्क्य नाम के मुनि ने एक एक चुहिया उसे कन्या का रुप दे दिया, और अपने आश्रम में ले आये |अपनी ही लड़की की तरह उसका लालन-पालन किया | कन्या विवाह का समय आया ,तब कन्या ने किसको वर के रूप में चुना ?इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानी चुहिया का स्वयंवर, शिवानी आनंद की आवाज में…
10 नवंबर 1908 को कनाई लाल दत्त को मात्र 20 बरस की आयु में फांसी हुई। खुदीराम बोस के बाद फांसी के फंदे पर झूलने वाले वह दूसरे क्रांतिकारी थी।
Credit: Josh Talk
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मां हमारे जीवन में क्या महत्व रखती है ये कविता ये बखूबी बताती है। मां जैसा अगर कोई है तो वो मां ही है।
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