हमें हर मुमकिन कोशिश करनी है किसी भी जंग को जीतने के लिए |’काश ‘ के लिए कोई गुंजाइश नहीं रखनी है इसी प्रेरणा को अपनी कविता गर तलाश तेरी जारी है के माध्यम से तराशा है अनुपम ध्यानी जी ने अपनी आवाज से
स्थिरता और स्थायित्व सुनने और समझने में एक जैसे लगते हैं किंतु स्थिरता हम यह कह सकते हैं जैसे उसने कभी हार ना मानी हो स्थायित्व जिसने कभी लड़ा ही ना हो….. , इसके मूल रूप को समझने के लिए सुनते हैं अनुपम ध्यानी की आवाज में यह कविता….
रणभूमि का शव tu बन जा, पर रंगमंच की प्रीत ना बन” वास्तविकता में जीवन इसी भांति जीना चाहिए | कविता के शब्दों मे रूप से स्पष्ट रूप से प्रकट किया गया है |अनुपम ध्यानी की आवाज में कविता” Ban, na Ban “…
मैं अपना दिल किराये पे चढ़ाना चाहता हूँ ! यह कविता इस युग के प्रेमियों के लिए है !
30 seconds of positive energy, positive poetry.
जज़्बा |Passion| جازبہ | Hindi Kavita | हिंदी कविता | Motivational Poems by Anupam Dhyani
Passion is an ingredient , if missing, can dilute the hard work, talent, luck and focus put in winning.
Make passion the most important thing in your toolbox.
30 seconds of positive energy, positive poetry.
Sometimes life moves as slow as a tortoise ( or 2020) or speeds like a tracer bullet, but it moves, it always does. So should we.So do what you must in this life as well as you can and as soon as you can. Life is not going to wait for you.
मानवता- वरदान या अभिशाप ? |Hindi Kavita | हिंदी कविता | Motivational Poems by Anupam Dhyani
Maanavta- kho rahi hai!
SSR ki mrityu aur Bollywood ki underbelly – bhayaavah chehre- ko dekh kar aisa man hua ki kuch shabd likhun.– maanavta par- Humanity par. sawaal uthaun ki vilupt hoti maanavta kaise hame kha rahi hai!
Jai Hind!
लकीरें तो उनकी भी होती हैं, जिनके हाथ नहीं होते !
स्थिरता और स्थायित्व सुनने और समझने में एक जैसे लगते हैं किंतु स्थिरता हम यह कह सकते हैं जैसे उसने कभी हार ना मानी हो स्थायित्व जिसने कभी लड़ा ही ना हो….. , इसके मूल रूप को समझने के लिए सुनते हैं अनुपम ध्यानी की आवाज में यह कविता….
I am 26 ! I am the date that India became a Republic, but like my brother 15, I too am cursed to be remembered just one day! I am the pain of the nation! This Republic day, let us pledge to keep India- Bharat in us every single day! May the Tricolor hoist everyday in our hearts!
विद्यार्थी एक ऐसे रचनाकार थे, जिन्होंने आजादी आंदोलन के दौर में दंगाई भीड़ के बीच भाईचारा कायम करने के लिए उन्होंने जान दे दी. आजादी के इस दीवाने और सांप्रदायिक सौहार्द के पुजारी गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’ का जन्म 26 अक्टूबर, 1890 को इलाहाबाद के अतरसुइया मौहल्ले में हुआ था |
उस दिन मैं बिना कुछ सोचे हुए ही भाई निराला जी से पूछ बैठी थी,” आपके किसी ने राखी नहीं बांधी?” ” कौन बहन हम जैसे भुक्कड़ को भाई बनावेगी?” मे, उत्तर देने वाले के एकांकी जीवन की व्यथा थी, या चुनौती ? यह कहना कठिन है ।पर जान पड़ता है किसी अन्य चुनौती के आभास ने ही मुझे उस हाथ के अभिषेक की प्रेरणा दी। उनके अस्त-व्यस्त जीवन को व्यवस्थित करने के असफल प्रयास का स्मरण कर मुझे आज भी हंसी आ जाती है। संयोग से उन्हें कहीं से ₹300 मिले। उन्होंने मुझे अपने खर्च का बजट बनाने का आदेश दिया। अस्तु : नमक से लेकर नापित तक और चप्पल से लेकर मकान के किराए तक का अनुमान- पत्र मैंने बनाया। उन्हें पसंद आया ।पर दूसरे ही दिन वह सवेरे आ पहुँचे। ₹50 चाहिए किसी विद्यार्थी की परीक्षा शुल्क भरना है वरना—–
7 अक्टूबर, 1944 को संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावित ढांचे को प्रकाशित किया गया। इनमें प्रस्तावों पर आगे चलकर याल्टा सम्मेलन (फरवरी 1945) में विचार-विमर्श किया गया, जहां सोवियत संघ, अमेरिका एवं ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक हुई थी।
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Pragati Sharma