युवती: डार्लिंग, पुलिस ने मुझे आज पकड़ ही लिया होता।
चैंपलिन: जान! क्या तुम इन पुलिस वालों को मूर्ख समझती हो?
युवती: भाग चलो यहां से, नहीं तो हम बुरी तरह फंस जाएंगे।
पुलिस: इस बिल्डिंग को चारों तरफ से पुलिस ने घेर लिया है। सभी लोग अपने घरों से बाहर निकल आएं।
क्यों पीछा कर रहे थे कुछ पुलिस वाले युवती और चैंपलिन का? क्या युवती पुलिस वालों को धोखा देने में कामयाब होती है? क्या चैंपलिन की पुलिस वालों से मुठभेड़ होती है? चैंपलिन और पुलिस की मुठभेड़ में किसकी मौत होती है? ताबूत में किसकी लाश मिलती है?
कहानी का सस्पेंस जानने के लिए आज ही सुनें शेफाली कपूर की आवाज में कहानी ‘एनकाउंटर’।
युवती: डार्लिंग, पुलिस ने मुझे आज पकड़ ही लिया होता।
चैंपलिन: जान! क्या तुम इन पुलिस वालों को मूर्ख समझती हो?
युवती: भाग चलो यहां से, नहीं तो हम बुरी तरह फंस जाएंगे।
पुलिस: इस बिल्डिंग को चारों तरफ से पुलिस ने घेर लिया है। सभी लोग अपने घरों से बाहर निकल आएं।
क्यों पीछा कर रहे थे कुछ पुलिस वाले युवती और चैंपलिन का? क्या युवती पुलिस वालों को धोखा देने में कामयाब होती है? क्या चैंपलिन की पुलिस वालों से मुठभेड़ होती है? चैंपलिन और पुलिस की मुठभेड़ में किसकी मौत होती है? ताबूत में किसकी लाश मिलती है?
कहानी का सस्पेंस जानने के लिए आज ही सुनें शेफाली कपूर की आवाज में कहानी ‘एनकाउंटर’।
युवती: डार्लिंग, पुलिस ने मुझे आज पकड़ ही लिया होता।
चैंपलिन: जान! क्या तुम इन पुलिस वालों को मूर्ख समझती हो?
युवती: भाग चलो यहां से, नहीं तो हम बुरी तरह फंस जाएंगे।
पुलिस: इस बिल्डिंग को चारों तरफ से पुलिस ने घेर लिया है। सभी लोग अपने घरों से बाहर निकल आएं।
क्यों पीछा कर रहे थे कुछ पुलिस वाले युवती और चैंपलिन का? क्या युवती पुलिस वालों को धोखा देने में कामयाब होती है? क्या चैंपलिन की पुलिस वालों से मुठभेड़ होती है? चैंपलिन और पुलिस की मुठभेड़ में किसकी मौत होती है? ताबूत में किसकी लाश मिलती है?
कहानी का सस्पेंस जानने के लिए आज ही सुनें शेफाली कपूर की आवाज में कहानी ‘एनकाउंटर’।
युवती: डार्लिंग, पुलिस ने मुझे आज पकड़ ही लिया होता।
चैंपलिन: जान! क्या तुम इन पुलिस वालों को मूर्ख समझती हो?
युवती: भाग चलो यहां से, नहीं तो हम बुरी तरह फंस जाएंगे।
पुलिस: इस बिल्डिंग को चारों तरफ से पुलिस ने घेर लिया है। सभी लोग अपने घरों से बाहर निकल आएं।
क्यों पीछा कर रहे थे कुछ पुलिस वाले युवती और चैंपलिन का? क्या युवती पुलिस वालों को धोखा देने में कामयाब होती है? क्या चैंपलिन की पुलिस वालों से मुठभेड़ होती है? चैंपलिन और पुलिस की मुठभेड़ में किसकी मौत होती है? ताबूत में किसकी लाश मिलती है?
कहानी का सस्पेंस जानने के लिए आज ही सुनें शेफाली कपूर की आवाज में कहानी ‘एनकाउंटर’।
युवती: डार्लिंग, पुलिस ने मुझे आज पकड़ ही लिया होता।
चैंपलिन: जान! क्या तुम इन पुलिस वालों को मूर्ख समझती हो?
युवती: भाग चलो यहां से, नहीं तो हम बुरी तरह फंस जाएंगे।
पुलिस: इस बिल्डिंग को चारों तरफ से पुलिस ने घेर लिया है। सभी लोग अपने घरों से बाहर निकल आएं।
क्यों पीछा कर रहे थे कुछ पुलिस वाले युवती और चैंपलिन का? क्या युवती पुलिस वालों को धोखा देने में कामयाब होती है? क्या चैंपलिन की पुलिस वालों से मुठभेड़ होती है? चैंपलिन और पुलिस की मुठभेड़ में किसकी मौत होती है? ताबूत में किसकी लाश मिलती है?
कहानी का सस्पेंस जानने के लिए आज ही सुनें शेफाली कपूर की आवाज में कहानी ‘एनकाउंटर’।
भारत वर्ष को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए हर वर्ग के लोगों—बच्चे, बूढ़े और जवान—ने आजादी के संघर्ष में अपना अमूल्य योगदान दिया। इन महान स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल की यातनाएं सहीं, अत्याचार झेले, लेकिन अपने संकल्प को टूटने नहीं दिया।
सोचिए, कितना रोमांचकारी और प्रेरणादायक होगा यदि हम इन अनुभवों को उन्हीं की जुबानी सुनें। ऐसा ही एक अमूल्य दस्तावेज है स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय जगदीश प्रसाद राजवंशी जी की किताब हवालात, राजवंशी जी जो मात्र 25 वर्ष की आयु में जेल गए और लखनऊ जेल से ही जेल में बिताए अपने अनुभवों को समेटकर यह पुस्तक लिखी। यह पुस्तक न केवल उनके संघर्षों की गाथा है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है।
युवती: तो तुमने आखिर क्या फैसला किया?
ज्ञान सिंह: मैं इस कड़े को नहीं निकाल पाऊंगा और आखिर मैं ऐसा क्यों करूं?
युवती: मैं तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी कर दूंगी।
ज्ञान सिंह: तुम मुझे दे ही क्या सकती हो?
आखिर वह खूबसूरत युवती कौन है जो ज्ञान सिंह से उसके गुरु का दिया हुआ कड़ा मांग रही है? एक रात ज्ञान सिंह के साथ कौन सी हैरतअंगेज घटना हुई? ज्ञान सिंह के साथ आखिर क्या हुआ? सुनिए सस्पेंस से भरी हुई एक रोमांचक कहानी “नागिन का इश्क”, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
भारत वर्ष को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए हर वर्ग के लोगों—बच्चे, बूढ़े और जवान—ने आजादी के संघर्ष में अपना अमूल्य योगदान दिया। इन महान स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल की यातनाएं सहीं, अत्याचार झेले, लेकिन अपने संकल्प को टूटने नहीं दिया।
सोचिए, कितना रोमांचकारी और प्रेरणादायक होगा यदि हम इन अनुभवों को उन्हीं की जुबानी सुनें। ऐसा ही एक अमूल्य दस्तावेज है स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय जगदीश प्रसाद राजवंशी जी की किताब हवालात, राजवंशी जी जो मात्र 25 वर्ष की आयु में जेल गए और लखनऊ जेल से ही जेल में बिताए अपने अनुभवों को समेटकर यह पुस्तक लिखी। यह पुस्तक न केवल उनके संघर्षों की गाथा है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है।
“डैनी: “”एमिला, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं। मेरे प्यार की ख़ातिर मैं तुम्हें एक छोटी सी तकलीफ़ देना चाहता हूं।””
एमिला: “”क्या कह रहे हो, डैनी? कैसी तकलीफ़, कैसी मदद? मैं कुछ समझी नहीं।””
डैनी: “”तुम्हें डॉक्टर ड्यूड के यहां से कुछ फाइलें लानी पड़ेगी।””
एमिला: “”पर ऐसा करना तो गलत होगा।””
डैनी डॉक्टर ड्यूड के यहां से एमिला से कुछ फाइलें क्यों मंगवाना चाह रहा है? आखिर इसके पीछे उसका क्या मकसद है? क्या एमिला अपने प्यार की खातिर यह गलत काम करने को राज़ी हो जाती है? क्या है इसके पीछे का राज़? जानने के लिए सुनिए नसरीन हिना के द्वारा लिखी गई कहानी ‘ब्लैकमेल’, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
“आसिफ़: “”यार, ऐसे कैसे चलेगा? कुछ तो आईडिया लगाना पड़ेगा।””
अशफ़ाक: “”हां, यार, कोई ऐसा जुगाड़ करना पड़ेगा कि मेहनत भी ना करें और रातों-रात अमीर भी बन जाए।””
फ़रहान: “”जब मालामाल हो जाएंगे तो चल देंगे अमेरिका।””
आमिर: “”और होगी अपनी ऐश ही ऐश।””
परवेज़: “”मेरे पास एक सॉलिड आईडिया है, और मैं कहता हूं कि यह 100% काम करेगा।””
परवेज़ के पास ऐसा कौन सा आईडिया था जो पांचो दोस्तों को रातों-रात अमीर बना सकता था? क्या परवेज़ के आईडिया से पांचो दोस्त अमीर हो सके? जानने के लिए मिर्जा हैदर अब्बास के द्वारा लिखी गई कहानी ‘धोखा’, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
चट्टानो में आग – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
जासूसी कहानी चट्टानों में आग की पूरी कहानी एक मिलिट्री अफ़सर के इर्द-गिर्द घूमती है ।जो नशीली पदार्थों की तस्करी करने वाला गिरोह है। कर्नल ज़रग़ाम उस गिरोह में जब नहीं शामिल होना चाहता तो उसे धमकियाँ मिलनी शुरू हो जाती है ।ऐसे में परेशान ज़रग़ाम ,कैप्टन फ़ैयाज़ से मदद के लिए लिखता है और कैप्टन फ़ैयाज़ ,इमरान को उसकी मदद के लिए भेजता है क्या इमरान अपनी सूझबूझ से नकली दवाइयां बेचने वाले गिरोह को गिरोह का पर्दाफाश कर पाएगा पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं चट्टानों में आग, नयनी दीक्षित की आवाज में..
जु़ल्म की अजी़ब दास्तां होती है। कभी जु़ल्म होता है तब पता चलता है ,तो कभी जु़ल्म होने वाला होता है तब पता चलता है। लेकिन दोनों ही सूरत में मर्डर, जुल्म, वारदात तो हो ही गया होता है ।वारदात से पहले, पुलिस को आगाह करना ,मौके पर पुलिस को बुलाना और जब तक पुलिस इस वारदात को होने से बचाएं, वारदात को अंजा़म देना ।यूं कहिए कि छलावे में फँसाना। महेश दुबे की कहानी छलावा कुछ ऐसी ही है ।छलावा कोई परिस्थिति है, इंसान हैं, चीज़ है ,जगह है ,क्या है? तो छलावे को अंजा़म कौन दे रहा है? जानना चाहेंगे ,तो सुनिए नयनी दीक्षित की शानदार आवाज़ में महेश दुबे के द्वारा लिखी mysteryऔर thriller से भरपूर कहानी छलावा।
ख़ौफ़नाक इमारत – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
क्या ऐसी कोई इमारत आपने देखी है जिसके अंदर बनी हुई सालों पुरानी कब्र से मुर्दा निकलकर लोगों का मर्डर कर दे? और आखिर वह मुर्दा ऐसा क्यों कर रहा है? क्या सचमुच उसके अंदर मुर्दा है या कहानी कुछ और ही है ?क्या इस सीरीज़ का जासूस इमरान इन लोगों का पता लगा पाएगा? कौन है यह मुर्दा? मुर्दा है या फिर कोई जिंदा व्यक्ति? कौन कातिल है और कौन शिकारी ? इब्रेसफ़ी की सस्पेंस और थ्रिलर से भरपूर कहानियों की सीरीज़ सुनिए ख़ौफ़नाक इमारत मे, नयनी दीक्षित की आवाज़ में…
शोलागढ़@34km – Kumar Rehman (कुमार रहमान) – Nayani Dixit
विक्रम के खान की लाश शेयाली के बंगले में मिलती है वहां पीले रंग का एक बाल भी मिलता है । क्या असली वज़ह है विक्रम की मौत का? कौन है वह नकाबपोश क्या हुआ हाशना के साथ है? आखिरकार शेक्सपियर कैफे में मिली लड़की रैक्सीना इस पूरे प्रकरण में क्या रोल है? जानने के लिए सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में शोलागढ़@34 किलोमीटर का यह भाग
क्या आप मानते हैं कि यह क्या आपका पहला जीवन नहीं है? | आप अपने पिछले जीवन के बारे में और कैसे सीखते हैं? क्या कुछ लोग इसे याद करते हैं? जानने के लिए सुनते हैं Reincarnation
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