बोलने वाली लड़की – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कॉलेज के दिनों से दीपशिखा अपना नाम हमेशा अग्निशिखा बतलाती थी, क्योंकि उसे अग्नि की तरह प्रज्वलित रहना पसंद था ।बोलने में निडर ,वाचाल ।उसके इन्हीं गुणों से प्रभावित होकर कपिल ने दीपशिखा से विवाह किया किंतु शादी के बाद कपिल को दीपशिखा के यही गुण क्यों अच्छे नहीं लग रहे? क्या दीपशिखा भी अपने ससुराल में गुमसुम हो जाएगी? सुनिए बेहद भावपूर्ण कहानी बोलने वाली लड़की, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
बोलने वाली लड़की – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कॉलेज के दिनों से दीपशिखा अपना नाम हमेशा अग्निशिखा बतलाती थी, क्योंकि उसे अग्नि की तरह प्रज्वलित रहना पसंद था ।बोलने में निडर ,वाचाल ।उसके इन्हीं गुणों से प्रभावित होकर कपिल ने दीपशिखा से विवाह किया किंतु शादी के बाद कपिल को दीपशिखा के यही गुण क्यों अच्छे नहीं लग रहे? क्या दीपशिखा भी अपने ससुराल में गुमसुम हो जाएगी? सुनिए बेहद भावपूर्ण कहानी बोलने वाली लड़की, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
बोलने वाली लड़की – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कॉलेज के दिनों से दीपशिखा अपना नाम हमेशा अग्निशिखा बतलाती थी, क्योंकि उसे अग्नि की तरह प्रज्वलित रहना पसंद था ।बोलने में निडर ,वाचाल ।उसके इन्हीं गुणों से प्रभावित होकर कपिल ने दीपशिखा से विवाह किया किंतु शादी के बाद कपिल को दीपशिखा के यही गुण क्यों अच्छे नहीं लग रहे? क्या दीपशिखा भी अपने ससुराल में गुमसुम हो जाएगी? सुनिए बेहद भावपूर्ण कहानी बोलने वाली लड़की, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
दर्पण – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कितने ही वर्तमान के अरमानों को कुचल कर ,इंसान भविष्य की इमारत बनाने की इच्छा तो रखता है किंतु क्या यह सच नहीं है कि जब भविष्य में जब उन इच्छाओं के पूरा होने का क्षण आता है तब तक उस इच्छा का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। ऐसा ही कुछ हो रहा है नायिका बानी के साथ। बानी जब तक मां-बाप के साथ थी तो उनके कड़े अनुशासन के कारण अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं का दमन करना पड़ता था ।आज जब बानी शादीशुदा है तो पति के नियमों के चलते उसे फिर अपनी इच्छाओं पर मौन का चोला पहनाना पड़ रहा है। इतने वर्षों के बाद जब उसकी छोटी-छोटी इच्छाओं का सम्मान किया जा रहा है तो वह क्यों उत्साह विहीन हो चुकी है ?बेहद भावुक कर देने वाली ममता कालिया की कहानी है दर्पण, जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
अंगूठी – ममता कालिया – शैफाली कपूर
ऑफिस का एक मित्र रजत गुप्ता अपने सहकर्मी मिस्टर चावला के घर शनिवार दोपहर खाने पर आता है ।खाना -खाने के बाद अचानक उसे लगता है कि उसके हाथ की सोने की अंगूठी शायद सोफे के किनारे फस गई है ।अब क्या था घर में हलचल मच जाती है सोफे को अलट -पलट सभी तरीके से देखा जाता है ,पर वह अंगूठी नहीं मिलती ।ऐसी दशा में मिस्टर चावला को बैठे-बिठाए क्या- क्या मुसीबत सहनी पड़ रही है ?क्या हुआ उस अंगूठी का, क्या वाकई वह अंगूठी मिल पाई ?रजत गुप्ता की अंगूठी क्या वास्तव में सोफे में थी या कहीं और खोई थी? ऐसे बहुत सारे प्रश्नों की गुत्थी को सुलझा पायेंगे, जब सुनेंगे ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी अंगूठी ,शैफाली कपूर की आवाज़ में…
आखिरी लिबास – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में लेखिका एक पुरस्कार समारोह में अपने सह लेखकों के साथ दिल्ली से बरेली जा रही होती है तो अचानक उसकी नज़र एक ऐसी दुकान पर पड़ती है जिसके बोर्ड पर लिखा था ‘आखिरी लिबास’, लेखिका के मन में भय,आश्चर्य जैसी कई भावनाएं आ जाती है ।आखिरी ये कैसा नाम हुआ? पर क्या आप जानते हैं इस नाम का क्या आशय है ?लेखिका ने इस घटना से ऐसा क्या अनुभव किया? सुनिए ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी आखिरी लिबास, शैफाली कपूर की आवाज़ में
मोबाइल मोहब्बत- ममता कालिया – शैफाली कपूर
मुग्धा को अपने बचपन से जब से वह सही से बोल भी नहीं पाती थी तब से उसे मोबाइल फोन से जो मोहब्बत हुई ,उसका असर उसके हर एक क्रियाकलाप में देखा जा सकता है किंतु आज तो मुग्धा की शादी नमित के साथ हो रही है। क्या इन दोनों के जीवन की इस नयी शुरुआत करने पर मोबाइल फोन क्या कोई अपना रंग दिखायेगा?कैसी रहेगी विवाह के बाद की उनकी शुरुआत?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी मोबाइल मोहब्बत, शेफाली कपूर की आवाज़ में
अंगूठी – ममता कालिया – शैफाली कपूर
ऑफिस का एक मित्र रजत गुप्ता अपने सहकर्मी मिस्टर चावला के घर शनिवार दोपहर खाने पर आता है ।खाना -खाने के बाद अचानक उसे लगता है कि उसके हाथ की सोने की अंगूठी शायद सोफे के किनारे फस गई है ।अब क्या था घर में हलचल मच जाती है सोफे को अलट -पलट सभी तरीके से देखा जाता है ,पर वह अंगूठी नहीं मिलती ।ऐसी दशा में मिस्टर चावला को बैठे-बिठाए क्या- क्या मुसीबत सहनी पड़ रही है ?क्या हुआ उस अंगूठी का, क्या वाकई वह अंगूठी मिल पाई ?रजत गुप्ता की अंगूठी क्या वास्तव में सोफे में थी या कहीं और खोई थी? ऐसे बहुत सारे प्रश्नों की गुत्थी को सुलझा पायेंगे, जब सुनेंगे ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी अंगूठी ,शैफाली कपूर की आवाज़ में…
हेज़ल: क्या तुम्हें मालूम है कि कल रात किसी ने गरीब पीटर को चाकू मार कर कत्ल कर दिया?
एलिज़ाबेथ: मैं यह भी जानती हूँ कि पीटर का कातिल और कोई नहीं, बल्कि तुम्हारा पति रेमंड ही है।
हेज़ल: (हैरान होते हुए) यह नामुमकिन है! मेरे पति तो एक रोड हादसे में मर चुके हैं। वह भला पीटर की हत्या कैसे कर सकते हैं?
वाल्टर: एलिज़ाबेथ! तुम्हें हेज़ल के मरे हुए पति के बारे में ऐसा नहीं कहना चाहिए।
यहां पर कई सवाल उभरते हैं: एलिज़ाबेथ ने हेज़ल के पति रेमंड पर पीटर की हत्या का इल्जाम क्यों लगाया? आखिर यह पीटर कौन है और उसकी हत्या की वजह क्या हो सकती है? रेमंड का पीटर की हत्या से क्या संबंध हो सकता है? अगर रेमंड ने पीटर की हत्या नहीं की, तो असली कातिल कौन है? और एलिज़ाबेथ का रेमंड के साथ क्या रिश्ता है?
इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए सुनिए एरूनिका पार्कर जोन्स द्वारा लिखी गई रहस्यमय कहानी ‘साजिशबाज़ औरत’ शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
भारत वर्ष को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए हर वर्ग के लोगों—बच्चे, बूढ़े और जवान—ने आजादी के संघर्ष में अपना अमूल्य योगदान दिया। इन महान स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल की यातनाएं सहीं, अत्याचार झेले, लेकिन अपने संकल्प को टूटने नहीं दिया।
सोचिए, कितना रोमांचकारी और प्रेरणादायक होगा यदि हम इन अनुभवों को उन्हीं की जुबानी सुनें। ऐसा ही एक अमूल्य दस्तावेज है स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय जगदीश प्रसाद राजवंशी जी की किताब हवालात, राजवंशी जी जो मात्र 25 वर्ष की आयु में जेल गए और लखनऊ जेल से ही जेल में बिताए अपने अनुभवों को समेटकर यह पुस्तक लिखी। यह पुस्तक न केवल उनके संघर्षों की गाथा है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है।
अंगूठी – ममता कालिया – शैफाली कपूर
ऑफिस का एक मित्र रजत गुप्ता अपने सहकर्मी मिस्टर चावला के घर शनिवार दोपहर खाने पर आता है ।खाना -खाने के बाद अचानक उसे लगता है कि उसके हाथ की सोने की अंगूठी शायद सोफे के किनारे फस गई है ।अब क्या था घर में हलचल मच जाती है सोफे को अलट -पलट सभी तरीके से देखा जाता है ,पर वह अंगूठी नहीं मिलती ।ऐसी दशा में मिस्टर चावला को बैठे-बिठाए क्या- क्या मुसीबत सहनी पड़ रही है ?क्या हुआ उस अंगूठी का, क्या वाकई वह अंगूठी मिल पाई ?रजत गुप्ता की अंगूठी क्या वास्तव में सोफे में थी या कहीं और खोई थी? ऐसे बहुत सारे प्रश्नों की गुत्थी को सुलझा पायेंगे, जब सुनेंगे ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी अंगूठी ,शैफाली कपूर की आवाज़ में…
युवती: तो तुमने आखिर क्या फैसला किया?
ज्ञान सिंह: मैं इस कड़े को नहीं निकाल पाऊंगा और आखिर मैं ऐसा क्यों करूं?
युवती: मैं तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी कर दूंगी।
ज्ञान सिंह: तुम मुझे दे ही क्या सकती हो?
आखिर वह खूबसूरत युवती कौन है जो ज्ञान सिंह से उसके गुरु का दिया हुआ कड़ा मांग रही है? एक रात ज्ञान सिंह के साथ कौन सी हैरतअंगेज घटना हुई? ज्ञान सिंह के साथ आखिर क्या हुआ? सुनिए सस्पेंस से भरी हुई एक रोमांचक कहानी “नागिन का इश्क”, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
भारत वर्ष को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए हर वर्ग के लोगों—बच्चे, बूढ़े और जवान—ने आजादी के संघर्ष में अपना अमूल्य योगदान दिया। इन महान स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल की यातनाएं सहीं, अत्याचार झेले, लेकिन अपने संकल्प को टूटने नहीं दिया।
सोचिए, कितना रोमांचकारी और प्रेरणादायक होगा यदि हम इन अनुभवों को उन्हीं की जुबानी सुनें। ऐसा ही एक अमूल्य दस्तावेज है स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय जगदीश प्रसाद राजवंशी जी की किताब हवालात, राजवंशी जी जो मात्र 25 वर्ष की आयु में जेल गए और लखनऊ जेल से ही जेल में बिताए अपने अनुभवों को समेटकर यह पुस्तक लिखी। यह पुस्तक न केवल उनके संघर्षों की गाथा है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है।
बोलने वाली लड़की – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कॉलेज के दिनों से दीपशिखा अपना नाम हमेशा अग्निशिखा बतलाती थी, क्योंकि उसे अग्नि की तरह प्रज्वलित रहना पसंद था ।बोलने में निडर ,वाचाल ।उसके इन्हीं गुणों से प्रभावित होकर कपिल ने दीपशिखा से विवाह किया किंतु शादी के बाद कपिल को दीपशिखा के यही गुण क्यों अच्छे नहीं लग रहे? क्या दीपशिखा भी अपने ससुराल में गुमसुम हो जाएगी? सुनिए बेहद भावपूर्ण कहानी बोलने वाली लड़की, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में।
कहानी में सुमित एक अपने कॉलेज की ही मुस्लिम लड़की सिदरा से अपने प्यार का दावा करता है हिज़ाब से सिर्फ उसकी खूबसूरत आकर्षित कर देने वाली आंखों को देख कर | दूसरी ओर मुस्लिम कौम के ही एक दूसरे युवक जीशान भी सिदरा से अपने प्यार का दावा करता है किंतु सिदरा हिज़ाब हटाकर अपना से चेहरा दिखाती है तब क्या होता है? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जुनैदद्वारा लिखी गई कहानी हिज़ाब ,अमित तिवारी की आवाज में
अनोखी यात्रा – गाय दी मोपासां – नयनी दीक्षित
कहानी अनोखी यात्रा में, प्यार की एक अनोखी यात्रा पर निकले जो दो लोग उस प्यार में, जिस तरह के बेलौस और बेसाख़्ता मोहब्बत है वह देखने को मिलेगी। प्यार को किसी भाषा, शब्द ,वाक्य किसी की जरूरत नहीं होती क्योंकि प्यार अपने आप में भाषा होता है। चाहे वह दो प्यार करने वाले उसे अनजान ही क्यों ना हो, बेपनाह मोहब्बत की ऐसी दास्तां सुनिए नयनी दीक्षित की आवाज़ में
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यह मधुर गीत उस स्थिति को दर्शाता है ,जब हम नए-नए प्रेम में पड़ते हैं | हमारा तन – मन हमारे काबू में नहीं होता | भावना तिवारी जी की मधुर आवाज में….
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ईशरसिंह ने अपनी बन्द होती आँखें खोलीं और कुलवन्त कौर के जिस्म की तरफ देखा, जिसकी बोटी-बोटी थिरक रही थी वह…वह मरी हुई थी…लाश थी…बिलकुल ठंडा गोश्त…जानी, मुझे अपना हाथ दे… कुलवंत सिंह भरे पूरे शरीर की एक दबंग औरत है ईश्वर सिंह से करीब 8 दिन बाद उसके पास आता है कुलवंत सिंह इस बात के लिए जिरह करती है 8 दिन कहां था? ईश्वर सिंह बहलाने की बहुत कोशिश करता है परंतु कुलवंत सिंह को सच्चाई का अंदाजा हो जाता है आखिर क्या थी? सच्चाई और कुलवंत सिंह को किस बात का अंदाजा हो जाता है? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं सआदत हसन मंटो की लिखी कहानी ठंडा गोश्त अनुपम ध्यानी की आवाज में
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